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भारत-पाक के रिश्ते पर बड़ा सवाल, क्या खत्म हो जाएगा राजनयिक दस्तूर?

Fri, 16 Mar 2018 06:22 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 16 Mar 2018 06:22 PM IST
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Do India-Pak will finish their Diplomat Relationship

बढ़े हुए राजनयिक तनाव वाले माहौल में पाकिस्तान ने भारत में अपने उच्चायुक्त सोहैल महमूद को वार्ता के लिए इस्लामाबाद बुला लिया है। इसी बीच, भारत पर अपने राजनयिकों को प्रताड़ित करने का सबूत देते हुए पाकिस्तान ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं। पाकिस्तान ने भारत पर दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत अपने कर्मचारियों के बच्चों को प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए हैं।

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हालांकि, भारत ने इन सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि वह स्थापित राजनयिक चैनलों के ज़रिए इन आरोपों का जवाब देगा। वहीं भारत ने भी पाकिस्तान पर इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग में कार्यरत कर्मचारियों के शोषण के आरोप लगाए हैं।
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कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन मानते हैं कि दोनों देशों के बीच हालात ख़राब हुए हैं। सुशांत सरीन कहते हैं कि इस्लामाबाद स्थित भारत के उच्चायोग में कार्यरत कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा था जिसके बाद शायद भारत, पाकिस्तान को जवाब दे रहा है।

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Do India-Pak will finish their Diplomat Relationship

सरीन कहते हैं, "पाकिस्तान में कार्यरत भारतीय अधिकारियों को परेशान किया जा रहा था। दूतावास की सुविधाएं कम की गईं थीं। और भी कई तरह से परेशानियां पेश की जा रहीं थी। भारत का सब्र कभी न कभी तो टूटना ही था। मुझे लगता है कि भारत ने अब पाकिस्तान को जवाब देने का फ़ैसला लिया है और कुछ घटनाएं हो रही हैं।"

भारत और पाकिस्तान हमेशा से एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी रहे हैं लेकिन क़रीब आने की कोशिशें भी दोनों ओर से होती रही है। हालांकि हाल के सालों में दोनों देशों के बीच फ़ासला ज़्यादा बढ़ा है, ख़ासकर भारत में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रवादी सरकार आने के बाद से दोनों देशों के बीच सीमा पर भी तनाव बढ़ा है।

सुशांत सरीन कहते हैं, "सीमा पर पहले से चल रहे तनाव के माहौल में एक और मोर्चे पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। राजनयिकों के साथ इस तरह का बर्ताव होना तो नहीं चाहिए, लेकिन दोनों देशों में से एक कुछ भी करेगा तो दूसरी तरफ़ से प्रतिक्रिया आएगी ही। एक बात ये भी है कि भारत ने काफ़ी सब्र से काम लिया है। लेकिन अब नज़र आ रहा है कि नीति में बदलाव हो रहा है।"

Do India-Pak will finish their Diplomat Relationship

सरीन कहते हैं, "दूसरे पक्ष को खुली छूट देने का राजनयिकों पर भी असर होता है। ऐसे में पाकिस्तान में होने वाली किसी हरकत की प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है।"

दोनों देशों ने अपनी-अपनी तरफ से राजनयिकों को परेशान करने के आरोपों को खारिज किया है। सुशांत सरीन इसे स्वाभाविक ही मानते हैं। वे कहते हैं, "दोनों ही देशों की सरकारें इसे स्वीकार नहीं करेंगी। लेकिन भारत ने प्रतिक्रिया की है इसके प्रमाण भी सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान में रहे भारतीय अधिकारी जानते हैं कि भारतीय दूतावास के लोगों को किस तरह से प्रताड़ित किया जाता है।"

हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ता हुआ भी नज़र आया है। खासकर चरमपंथ के मामले में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के सवालों का सामना करना पड़ा है। भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के आपसी रिश्ते में भी कई तरह के उतार-चढ़ाव आए हैं।

सुशांत सरीन कहते हैं, "भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के त्रिकोणीय संबंध बीते पंद्रह सालों से ही जटिल हैं और इन संबंधों में बदलाव का कोई संकेत नज़र नहीं आ रहा है। पाकिस्तान के हक्कानी नेटवर्क या तालिबान के साथ संबंध तोड़ने के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं।"

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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम-ज़्यादा होता रहता है और दोनों ही देशों की राजनीति इससे प्रभावित होती रही है। सरीन कहते हैं, "पाकिस्तान में होने वाले चुनावों में भारत एक बड़ा मुद्दा रहेगा, ठीक इसी तरह भारत के चुनावों में भी पाकिस्तान मुद्दा रहता है। पाकिस्तान में राष्ट्रीय चुनाव होने हैं ऐसे में ये तनाव कम होता नहीं दिख रहा है।"

सरीन ये भी कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के चुनावों में मुद्दा तो होते हैं, लेकिन ये निर्णायक नहीं होते।

हालांकि ये पहली बार नहीं है कि दोनों देशों के बीच तनाव इस स्तर तक पहुंचा है। ऐसे भी हुआ है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध लगभग कट गए हों।

सुशांत कहते हैं, "ऐसा हो सकता है कि दोनों देश कुछ समय तक एक-दूसरे के साथ खेल खेलें और कुछ समय बाद हालात सामान्य हो जाएं। ये भी मुमकिन है कि पाकिस्तान इन हालातों को लंबा खींचे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ प्वाइंट स्कोर करने की कोशिश करें। बहुत मुमकिन है कि पाकिस्तान कुछ समय तक भारत में अपने राजदूत को भेजे ही ना।"

अगर ये तनाव बहुत ज़्यादा बढ़ा तो पाकिस्तान राजनयिकों के लिए भारत 'नो फैमिली स्टेशन' हो जाएगा यानी पाकिस्तान के राजनयिक को भारत में अपना परिवार नहीं रखेंगे।

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