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सुप्रीम कोर्ट: जिला अदालतों को केस के मेरिट पर फैसले की आजादी हो, हाईकोर्ट से भी जताई यह अपेक्षा
Mon, 13 Dec 2021 09:30 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 13 Dec 2021 09:30 PM IST
सार
शीर्ष कोर्ट ने इसके साथ ही यह भी कहा कि एक अपीलीय कोर्ट को यह उम्मीद नहीं करना चाहिए कि केस की संवेदनशीलता को देखते हुए निचली कोर्ट किसी खास तरीके से काम करे। अपीलीय कोर्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कोई भी टिप्पणी करने से पहले सतर्कता बरते।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालतों में सुनवाई को लेकर सोमवार को बड़ी बात कही। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जिला न्यायालयों को केस की योग्यता के दम पर फैसले देने की आजादी होना चाहिए। उसे किसी केस पर उसके गुणदोषों और उसके समक्ष पेश सारी सामग्री पर विचार कर के निर्णय देना चाहिए, ताकि वह निंदा से बच सके।
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शीर्ष कोर्ट ने इसके साथ ही यह भी कहा कि एक अपीलीय कोर्ट को यह उम्मीद नहीं करना चाहिए कि केस की संवेदनशीलता को देखते हुए निचली कोर्ट किसी खास तरीके से काम करे। अपीलीय कोर्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कोई भी टिप्पणी करने से पहले सतर्कता बरते।
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जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही यह बात
जस्टिस एसके कौल व जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक हाईकोर्ट का एक आदेश खारिज करते हुए की। हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट का आदेश उलट दिया था। निचली कोर्ट ने वर्ष 2001 में एक पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में दो लोगों को दोषमुक्त करार दिया था। इसे उलटते हुए हाईकोर्ट ने दोनों को दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
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हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ आरोपी द्वारा दायर अपील पर अपने 20 पेज के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कभी-कभी अदालतों की अपनी बाध्यताएं होती हैं। विभिन्न अदालतों विभिन्न निर्णय लिए जाते हैं। एक ओर निचली अदालत और दूसरी ओर अपीलीय अदालतें हैं। यदि ऐसे निर्णय संस्थागत बाधाओं के कारण दिए जाते हैं, तो वे अच्छे संकेत नहीं देते हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जिला कोर्ट को मूलभूत कोर्ट जाना जाता है। इसलिए उसे अपनी योग्यता के दम पर किसी केस का फैसला देने की आजादी होना चाहिए। अन्यथा वह एक रूढ़िबद्ध संस्था बन सकती है जो नैतिक आधार पर दोषी ठहराने वाला मंच बन जाएगी। किसी निर्णय पर उसके समक्ष रखी गई सभी सामग्रियों पर विचार करके फैसला देने पर वह निंदा से बच सकती है। वहीं अपीलीय अदालत से अपेक्षा की जाती है कि वह कोई भी टिप्पणी करने से पहले कुछ सावधानी बरते।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामलों से निपटने के लिए कई स्तरों की अदालतें हैं। यदि कोई निचली कोर्ट केस की संवेदनशीलता के बावजूद उसके मेरिट पर फैसला सुनाती है तो उसकी तारीफ की जाना चाहिए।