फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Dilimitation issue jac meeting in chennai stalin said legal fight as well kerala cm

Delimitation: परिसीमन को 25 साल और आगे बढ़ाने का आग्रह, जेएसी की बैठक में प्रस्ताव पास

Sat, 22 Mar 2025 03:31 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 22 Mar 2025 03:31 PM IST
सार

बैठक के दौरान सीएम स्टालिन ने कहा कि विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जाना चाहिए, जो इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ने के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों योजनाओं पर सुझाव दे।

विज्ञापन
Dilimitation issue jac meeting in chennai stalin said legal fight as well kerala cm
परिसीमन के मुद्दे पर हुई जेएसी की बैठक - फोटो : पीटीआई

विस्तार

परिसीमन के मुद्दे पर आज विपक्षी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों की चेन्नई में बैठक हुई। इस बैठक को ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) नाम दिया गया। इस बैठक का आयोजन तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने किया। स्टालिन ने साफ किया कि वे परिसीमन के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे। वहीं बैठक के दौरान केरल के सीएम पी विजयन ने कहा कि लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा सिर पर लटकती तलवार जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने बिना किसी से चर्चा के परिसीमन के मुद्दे पर कदम बढ़ाया। 
विज्ञापन


मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से शनिवार को बुलाई गई पहली संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की बैठक में परिसीमन पर एक प्रस्ताव पास किया गया। इसमें सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से परिसीमन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की गई और 1971 की जनगणना के आधार पर संसदीय क्षेत्रों की संख्या की सीमा को अगले 25 वर्षों के लिए बढ़ाने का आग्रह किया गया। यह भी तय किया गया कि मौजूदा संसद सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष मांगों पर दबाव डालने के लिए एक संयुक्त ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे।
विज्ञापन


जेएसी की बैठक को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से उन राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण की सजा नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ तो संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। इससे हमारी अपनी बात कहने की ताकत कम हो जाएगी। हमारी इच्छा के बिना भी कानून बनाए जाएंगे। ऐसे फैसले लिए जाएंगे जो हमारे लोगों को प्रभावित करेंगे। हम ऐसे नागरिक होंगे जो अपने ही देश में राजनीतिक शक्ति खो देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्टालिन ने कही कानूनी लड़ाई लड़ने की बात
बैठक के दौरान सीएम स्टालिन ने कहा कि विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जाना चाहिए, जो इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ने के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों योजनाओं पर सुझाव दे। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीतिक लडाई के साथ-साथ कानूनी लड़ाई लड़ने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 'हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम निष्पक्ष परिसीमन चाहते हैं और हमें अपने अधिकारों के लिए लगातार कोशिश करनी होगी।' स्टालिन ने इस मुद्दे पर लोगों को जागरुक करने और इस लड़ाई में एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि 'हमारा प्रतिनिधित्व कमजोर नहीं पड़ना चाहिए।'

विजयन ने बताया लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ
केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने बैठक में कहा कि लोकसभा सीटों का परिसीमन का मुद्दा हमारे सिर पर लटकती तलवार जैसा है। उन्होंने इसे संविधान के सिद्धांतों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया। गौरतलब है कि दक्षिणी राज्यों का कहना है कि लोकसभा सीटों का परिसीमन अगर जनसंख्या के आधार पर किया गया तो इससे उन्हें सीटों का नुकसान होगा। यही वजह है कि दक्षिणी राज्य जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के परिसीमन का विरोध कर रहे हैं। दक्षिणी राज्यों का आरोप है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण किया, लेकिन अब उन्हें इसकी सजा दी जा रही है। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया है कि दक्षिणी राज्यों को सीटों का नुकसान नहीं होगा। 

ये भी पढ़ें- Tamil Nadu: भाजपा ने परिसीमन विवाद को बताया DMK का 'नाटक', राज्य के अधिकार दूसरे राज्यों को देने का लगाया आरोप

'प्रस्तावित परिसीमन को स्वीकार नहीं कर सकते'
जेएसी की बैठक के दौरान तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि 'आज देश गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। भाजपा जनसंख्या नियंत्रण की सजा दे रही है। हम एक देश हैं और हम इसका सम्मान करते हैं, लेकिन हम इस प्रस्तावित परिसीमन को स्वीकार नहीं कर सकते। यह परिसीमन हमें राजनीतिक रूप से सीमित करेगा। यह बतौर अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के तौर पर हमें दंडित करेगा। हमें इस पक्षपाती परिसीमन को लागू करने से भाजपा को रोकना होगा।'

बीजद प्रमुख और ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने एक वीडियो संदेश में कहा कि 'जेएसी की बैठक बेहद अहम है, जो राज्यों में रहने वाले लोगों के अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए हो रही है। देश के विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण अहम है, लेकिन जनसंख्या के आधार पर परिसीमन उन राज्यों के प्रति गलत है, जो जनसंख्या नियंत्रण कर रहे हैं। हमारी मांग है कि परिसीमन सिर्फ जनसंख्या के आधार पर नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार को इसे लेकर सभी पार्टियों से विस्तृत चर्चा करनी चाहिए ताकि इसे लेकर सभी शंकाएं दूर की जा सकें।'


जेएसी में प्रस्ताव पारित
ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक में परिसीमन पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि परिसीमन के मुद्दे पर सभी हितधारकों से लोकतांत्रिक तरीके से विस्तृत चर्चा हो। साथ ही 42वें, 84वें और 87वें को संविधान संशोधन को संरक्षित किया जाए, जिनमें जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को लागू किया गया है ताकि देश की जनसंख्या को नियंत्रित रखा जा सके। जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण किया है, उन्हें सजा नहीं दी जानी चाहिए। 

ये भी पढ़ें- भाषा को राजनीतिक पूंजी न बनाएं: त्रिभाषा फॉर्मूले पर सहमति के बाद कैसा विरोध! क्या चुनावी दिनों की गोलबंदी...?

ज्वाइंट एक्शन कमेटी की अगली बैठक हैदराबाद में होनी है। हालांकि अभी उसकी तारीख तय नहीं हुई है। बैठक में डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन में पारदर्शिता की कमी है और इसे लेकर विभिन्न हितधारकों से कोई चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि साल 1971 की जनगणना के आधार पर संसदीय सीटों पर रोक को अगले 25 वर्षों तक बढ़ाया जाना चाहिए।

संबंधित वीडियो


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed