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'छात्रों के आगे झुकी सरकार': प्रधान के इस्तीफे पर AAP से लेकर कांग्रेस तक ने यूं घेरा, किसने क्या कहा?
Sat, 25 Jul 2026 03:31 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 25 Jul 2026 03:31 PM IST
सार
सीजेपी और विपक्ष के भारी दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे एक दिन पहले सरकार ने एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया था। अब विपक्षी नेताओं ने इसे छात्रों की जीत बताया है। किसने क्या-क्या कहा है? जानिए...
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विपक्ष की प्रतिक्रिया
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करके इस बात की जानकारी दी। विपक्ष ने इसे छात्रों की जीत बताया है और पीएम मोदी की जिद की हार। केंद्रीय मंत्री प्रधान के इस्तीफे पर किसने क्या-क्या कहा? आइये जानते हैं।
मोदी की जिद की हार- मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भारत के 'छात्रों की आवाज' आखिरकार उस अहंकारी सत्ता के दरवाजे तक पहुंच ही गई है। यह हमारे उन लाखों युवाओं की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए देश भर की सड़कों पर अपनी आवाज़ उठाई। यह सच की जीत है और मोदी की जिद की हार है। यह उन सभी परिवारों की जीत है जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्ट है। यह एकजुट विपक्ष की जीत है, जिसने छात्रों के हित में संसद से लेकर सड़कों तक अपनी आवाज उठाई। खरने ने यह भी कहा कि अब मोदी की बारी है कि वे हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगें और उन लोगों के ख़िलाफ सख्त कार्रवाई करें जिन्होंने उन पर लाठियां और पैलेट गन चलाईं।
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लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत: केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को जनता के सामने झुकना पड़ा। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो मैसेज शेयर कर लिखा, 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई। लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत। यह छात्रों की जीत है, यह Gen-z की जीत है। आपलोगों का संघर्ष रंग लाया।
दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी को झुकाया: अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि नई पीढ़ी की एक बड़ी जीत है। सरकार को प्राइमरी शिक्षा से लेकर हायर एजुकेशन तक हर चीज के बारे में बहुत गंभीरता से सोचना होगा। एग्जाम पेपर लीक को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए और सड़कों पर फैला युवाओं का यह आंदोलन आखिरकार दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को झुकाने में कामयाब रहा, जिसके अनगिनत सहयोगी दल हैं। यह युवाओं की एक बड़ी जीत है, लेकिन सभी राजनीतिक दलों के लोगों को इससे यह सीखना चाहिए कि भविष्य में परीक्षाओं की व्यवस्था को मज़बूत करना होगा ताकि कोई पेपर लीक न हो और युवाओं के लिए रोज़गार और नौकरियों के रास्ते खोलने होंगे।
संजय सिंह ने क्या कहा?
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पिछले 12 साल में सिर्फ दो बार ऐसा वक्त आया जब अंहकार में चूर मोदी सरकार को मजबूरी में झुकना पड़ा। पहला किसानों का आंदोलन था जब एक साल बाद सरकार झुकी और दूसरा नौजवानों का यह आंदोलन है जिसमें सरकार को झुकना पड़ा। इसके परिणाम स्वरूप शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और एनटीए के कई अधिकारियों को बर्खास्त किया गया जो युवाओं की बहुत बड़ी जीत है। इससे अलावा, मोदी सरकार का रिकॉर्ड रहा है कि उसने हर आंदोलन को लाठियों से कुचलने का काम किया और सरकार किसी के आगे नहीं झुकी।
संजय सिंह ने कहा कि हम लोग नारा लगाते थे कि जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है। देश के करोड़ों युवाओं को नमन कि युवाओं ने इस देश के प्रधानमंत्री और अहंकारी सरकार को दिखा दिया है कि जब युवा जागता है तो सरकार को कुंभकरण की नींद तोड़नी पड़ती है। उन्होंने पिछले एक महीने से जंतर मंतर के साथ पूरे देश में इसके समर्थन में आंदोलन चल रहा था। सोनम वांगचुक ने अनशन किया और अभिजीत दीपके ने आंदोलन चलाया और करोड़ों युवाओं ने सड़क पर उतर कर इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। युवाओं की बहुत साफ तौर पर एक ही मांग थी कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो और इससे कम में कोई समझौता नहीं होगा।
संजय सिंह ने कहा कि 12 साल में यह पहली बार है, जब किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ है, जबकि इससे पहले किसान आंदोलन में गृह राज्य मंत्री के बेटे द्वारा पांच किसानों को कुचलने के बावजूद मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ था। उन्होंने युवाओं के संघर्ष को बधाई देते हुए कहा कि वे अपनी ताकत और ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में आगे लेकर बढ़ें। पेपर लीक से उठा हुआ यह सवाल अब रोजगार तक जाएगा और युवाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें काम मिले और उनके प्रति सरकार की जवाबदेही व जिम्मेदारी तय हो।
छात्रों ने मोदी के अहंकार को तोड़ा: सिसोदिया
वहीं, दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि आपने वह कर दिखाया, जिसकी कुछ दिनों पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आपने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया है। देश के युवाओं और छात्रों ने नरेंद्र मोदी के अहंकार को तोड़ दिया है। जो नरेंद्र मोदी चार दिन पहले तक दिल्ली पुलिस की लाठियों के दम पर इन युवाओं के सिर फोड़ रहे थे, छात्रों के पैर तोड़ रहे थे, उनके साथ बदतमीजी कर रहे थे और उन्हें पशुओं की तरह क्रूरता से मार रहे थे। आज उन्हीं नरेंद्र मोदी को अपने भ्रष्ट शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेना पड़ा है।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा कि यह देश के छात्र-युवा आंदोलन की बहुत बड़ी जीत है। मोदी सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई थी। नीट पेपर लीक के बाद 22 छात्र-छात्राओं को अपनी जान गंवानी पड़ी और पिछले डेढ़ महीने से भीषण गर्मी में छात्र सड़क पर थे। सोनम वांगचुक को 20 दिनों के अनशन के बाद हाउस अरेस्ट कर लिया गया। 20 जुलाई को छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई, लोगों के हाथ-पैर और सिर टूटे, लेकिन प्रधानमंत्री ने नहीं सुना। अब जब यह आंदोलन देशव्यापी हो गया है, तो मोदी सरकार के अहंकार को झुकना पड़ा है। पिछले 12 वर्षों में तानाशाही के जरिए हर आवाज को कुचलने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रों ने सरकार के हर षड्यंत्र को फेल कर दिया। यह लोकतंत्र, संविधान, जंतर-मंतर और देश के युवाओं की जीत है।
वहीं, आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार को इस बात का बहुत घमंड था कि उनके यहां किसी के इस्तीफे नहीं होते। जिस घमंड को तोड़ने में बड़ी-बड़ी विपक्षी पार्टियां नाकाम रहीं, उसे देश की जेन-जी और 16-18 साल की युवा पीढ़ी ने तोड़ दिया। उन्होंने इतनी मजबूत और अहंकारी सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। जिस कद्दावर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पीछे पूरी सरकार खड़ी बताई जा रही थी, उन्हें अंततः इस्तीफा देना ही पड़ा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा संदेश है। युवा पीढ़ी को नमन है कि जो काम कोई नहीं कर पाया, वह इस देश की युवा पीढ़ी ने कर दिखाया है।
हर आंदोलनकारी को सलाम: आतिशी
उधर, आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि देश के युवाशक्ति की जीत हुई। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। जेन-जी के आगे मोदी जी के अहंकार को झुकना पड़ा। हर आंदोलनकारी को सलाम।
प्रधान को बचाने की कोशिश में थी भाजपा: कुणाल घोष
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा, 'उन्हें यह पहले ही कर देना चाहिए था। भाजपा उन्हें बचाने की कोशिश कर रही थी। यह उन लोगों और छात्रों की जीत है जो विरोध कर रहे थे, यह पूरे देश की जीत है।'
देर से आया फैसला, टाली जा सकती थी अनहोनी: अधीर रंजन चौधरी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आखिरकार सरकार पर समझदारी हावी हो ही गई। उन्होंने कहा कि यह फैसला बहुत पहले लिया जा सकता था। अगर समय रहते यह कदम उठाया गया होता, तो प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसी अनहोनी को आसानी से टाला जा सकता था।
अधीर रंजन ने आगे कहा कि सरकार ने यह कदम किसी इच्छा से नहीं, बल्कि भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के कारण निराशा में आकर उठाया है। सरकार अपने ही मंत्री का इस्तीफा लेने पर मजबूर हुई है। उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं के जज्बे, पक्के इरादे और उनके साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व को सलाम किया।
पीएम मोदी से माफी की मांग
दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग की। पार्टी ने लिखा कि यह इस्तीफा देश के करोड़ों युवाओं और Gen-Z के अटूट संघर्ष की जीत है। युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जो आवाज बुलंद की थी, उसी सत्य के आगे सरकार का घमंड टूटा है और युवाओं ने एक अयोग्य व भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ अपनी लड़ाई जीती है।
जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी था प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर छात्र लगातार सड़कों पर थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा था। विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार से बातचीत के दौरान सीजेपी ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा। छात्रों के इसी भारी दबाव के बीच शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया।
'पिछले 10 दिनों से मन अत्यंत दुखी था'
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में अपना दर्द साझा किया। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन अत्यंत दुखी था। वह नहीं चाहते कि देश की युवाशक्ति किसी भ्रम के जाल में फंसे। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगियों में नहीं उलझना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने पद से हटना ही बेहतर समझा।
इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले एनटीए पर बड़ा एक्शन
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बहुत बड़ी कार्रवाई की थी। सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय के दो वरिष्ठ सचिवों को भी हटाकर नए अधिकारियों की तैनाती की गई थी। नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर 36 दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा था।
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मोदी की जिद की हार- मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भारत के 'छात्रों की आवाज' आखिरकार उस अहंकारी सत्ता के दरवाजे तक पहुंच ही गई है। यह हमारे उन लाखों युवाओं की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए देश भर की सड़कों पर अपनी आवाज़ उठाई। यह सच की जीत है और मोदी की जिद की हार है। यह उन सभी परिवारों की जीत है जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्ट है। यह एकजुट विपक्ष की जीत है, जिसने छात्रों के हित में संसद से लेकर सड़कों तक अपनी आवाज उठाई। खरने ने यह भी कहा कि अब मोदी की बारी है कि वे हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगें और उन लोगों के ख़िलाफ सख्त कार्रवाई करें जिन्होंने उन पर लाठियां और पैलेट गन चलाईं।
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लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत: केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को जनता के सामने झुकना पड़ा। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो मैसेज शेयर कर लिखा, 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई। लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत। यह छात्रों की जीत है, यह Gen-z की जीत है। आपलोगों का संघर्ष रंग लाया।
Congratulations to the entire country on Dharmendra Pradhan’s resignation. Big win for democracy. pic.twitter.com/whzjhwSjOs
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 25, 2026
दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी को झुकाया: अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि नई पीढ़ी की एक बड़ी जीत है। सरकार को प्राइमरी शिक्षा से लेकर हायर एजुकेशन तक हर चीज के बारे में बहुत गंभीरता से सोचना होगा। एग्जाम पेपर लीक को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए और सड़कों पर फैला युवाओं का यह आंदोलन आखिरकार दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को झुकाने में कामयाब रहा, जिसके अनगिनत सहयोगी दल हैं। यह युवाओं की एक बड़ी जीत है, लेकिन सभी राजनीतिक दलों के लोगों को इससे यह सीखना चाहिए कि भविष्य में परीक्षाओं की व्यवस्था को मज़बूत करना होगा ताकि कोई पेपर लीक न हो और युवाओं के लिए रोज़गार और नौकरियों के रास्ते खोलने होंगे।
संजय सिंह ने क्या कहा?
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पिछले 12 साल में सिर्फ दो बार ऐसा वक्त आया जब अंहकार में चूर मोदी सरकार को मजबूरी में झुकना पड़ा। पहला किसानों का आंदोलन था जब एक साल बाद सरकार झुकी और दूसरा नौजवानों का यह आंदोलन है जिसमें सरकार को झुकना पड़ा। इसके परिणाम स्वरूप शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और एनटीए के कई अधिकारियों को बर्खास्त किया गया जो युवाओं की बहुत बड़ी जीत है। इससे अलावा, मोदी सरकार का रिकॉर्ड रहा है कि उसने हर आंदोलन को लाठियों से कुचलने का काम किया और सरकार किसी के आगे नहीं झुकी।
संजय सिंह ने कहा कि हम लोग नारा लगाते थे कि जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है। देश के करोड़ों युवाओं को नमन कि युवाओं ने इस देश के प्रधानमंत्री और अहंकारी सरकार को दिखा दिया है कि जब युवा जागता है तो सरकार को कुंभकरण की नींद तोड़नी पड़ती है। उन्होंने पिछले एक महीने से जंतर मंतर के साथ पूरे देश में इसके समर्थन में आंदोलन चल रहा था। सोनम वांगचुक ने अनशन किया और अभिजीत दीपके ने आंदोलन चलाया और करोड़ों युवाओं ने सड़क पर उतर कर इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। युवाओं की बहुत साफ तौर पर एक ही मांग थी कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो और इससे कम में कोई समझौता नहीं होगा।
संजय सिंह ने कहा कि 12 साल में यह पहली बार है, जब किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ है, जबकि इससे पहले किसान आंदोलन में गृह राज्य मंत्री के बेटे द्वारा पांच किसानों को कुचलने के बावजूद मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ था। उन्होंने युवाओं के संघर्ष को बधाई देते हुए कहा कि वे अपनी ताकत और ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में आगे लेकर बढ़ें। पेपर लीक से उठा हुआ यह सवाल अब रोजगार तक जाएगा और युवाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें काम मिले और उनके प्रति सरकार की जवाबदेही व जिम्मेदारी तय हो।
छात्रों ने मोदी के अहंकार को तोड़ा: सिसोदिया
वहीं, दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि आपने वह कर दिखाया, जिसकी कुछ दिनों पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आपने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया है। देश के युवाओं और छात्रों ने नरेंद्र मोदी के अहंकार को तोड़ दिया है। जो नरेंद्र मोदी चार दिन पहले तक दिल्ली पुलिस की लाठियों के दम पर इन युवाओं के सिर फोड़ रहे थे, छात्रों के पैर तोड़ रहे थे, उनके साथ बदतमीजी कर रहे थे और उन्हें पशुओं की तरह क्रूरता से मार रहे थे। आज उन्हीं नरेंद्र मोदी को अपने भ्रष्ट शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेना पड़ा है।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा कि यह देश के छात्र-युवा आंदोलन की बहुत बड़ी जीत है। मोदी सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई थी। नीट पेपर लीक के बाद 22 छात्र-छात्राओं को अपनी जान गंवानी पड़ी और पिछले डेढ़ महीने से भीषण गर्मी में छात्र सड़क पर थे। सोनम वांगचुक को 20 दिनों के अनशन के बाद हाउस अरेस्ट कर लिया गया। 20 जुलाई को छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई, लोगों के हाथ-पैर और सिर टूटे, लेकिन प्रधानमंत्री ने नहीं सुना। अब जब यह आंदोलन देशव्यापी हो गया है, तो मोदी सरकार के अहंकार को झुकना पड़ा है। पिछले 12 वर्षों में तानाशाही के जरिए हर आवाज को कुचलने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रों ने सरकार के हर षड्यंत्र को फेल कर दिया। यह लोकतंत्र, संविधान, जंतर-मंतर और देश के युवाओं की जीत है।
वहीं, आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार को इस बात का बहुत घमंड था कि उनके यहां किसी के इस्तीफे नहीं होते। जिस घमंड को तोड़ने में बड़ी-बड़ी विपक्षी पार्टियां नाकाम रहीं, उसे देश की जेन-जी और 16-18 साल की युवा पीढ़ी ने तोड़ दिया। उन्होंने इतनी मजबूत और अहंकारी सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। जिस कद्दावर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पीछे पूरी सरकार खड़ी बताई जा रही थी, उन्हें अंततः इस्तीफा देना ही पड़ा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा संदेश है। युवा पीढ़ी को नमन है कि जो काम कोई नहीं कर पाया, वह इस देश की युवा पीढ़ी ने कर दिखाया है।
हर आंदोलनकारी को सलाम: आतिशी
उधर, आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि देश के युवाशक्ति की जीत हुई। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। जेन-जी के आगे मोदी जी के अहंकार को झुकना पड़ा। हर आंदोलनकारी को सलाम।
प्रधान को बचाने की कोशिश में थी भाजपा: कुणाल घोष
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा, 'उन्हें यह पहले ही कर देना चाहिए था। भाजपा उन्हें बचाने की कोशिश कर रही थी। यह उन लोगों और छात्रों की जीत है जो विरोध कर रहे थे, यह पूरे देश की जीत है।'
देर से आया फैसला, टाली जा सकती थी अनहोनी: अधीर रंजन चौधरी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आखिरकार सरकार पर समझदारी हावी हो ही गई। उन्होंने कहा कि यह फैसला बहुत पहले लिया जा सकता था। अगर समय रहते यह कदम उठाया गया होता, तो प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसी अनहोनी को आसानी से टाला जा सकता था।
अधीर रंजन ने आगे कहा कि सरकार ने यह कदम किसी इच्छा से नहीं, बल्कि भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के कारण निराशा में आकर उठाया है। सरकार अपने ही मंत्री का इस्तीफा लेने पर मजबूर हुई है। उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं के जज्बे, पक्के इरादे और उनके साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व को सलाम किया।
पीएम मोदी से माफी की मांग
दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग की। पार्टी ने लिखा कि यह इस्तीफा देश के करोड़ों युवाओं और Gen-Z के अटूट संघर्ष की जीत है। युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जो आवाज बुलंद की थी, उसी सत्य के आगे सरकार का घमंड टूटा है और युवाओं ने एक अयोग्य व भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ अपनी लड़ाई जीती है।
जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी था प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर छात्र लगातार सड़कों पर थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा था। विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार से बातचीत के दौरान सीजेपी ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा। छात्रों के इसी भारी दबाव के बीच शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया।
'पिछले 10 दिनों से मन अत्यंत दुखी था'
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में अपना दर्द साझा किया। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन अत्यंत दुखी था। वह नहीं चाहते कि देश की युवाशक्ति किसी भ्रम के जाल में फंसे। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगियों में नहीं उलझना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने पद से हटना ही बेहतर समझा।
इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले एनटीए पर बड़ा एक्शन
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बहुत बड़ी कार्रवाई की थी। सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय के दो वरिष्ठ सचिवों को भी हटाकर नए अधिकारियों की तैनाती की गई थी। नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर 36 दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा था।