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GST: 593 करोड़ रुपये की हेराफेरी, स्टार टैक्स कंसल्टेंट के ठिकानों पर DGGI की छापेमारी; मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Sat, 28 Feb 2026 04:36 AM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Shivam Garg Updated Sat, 28 Feb 2026 04:36 AM IST
सार

जीएसटी खुफिया महानिदेशालय ने बंगलूरू में 593 करोड़ रुपये के एक बड़े फर्जी इनवॉइस धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है। मामले में मास्टरमाइंड मोहम्मद सैफुल्लाह को गिरफ्तार किया गया है।

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DGGI Busts Rs 593 Crore Fake Invoice Fraud, Mastermind Arrested in Bengaluru
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की एक शीर्ष खुफिया एजेंसी, माल और सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 593 करोड़ रुपये के एक फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में मुख्य सरगना, जिसे इस धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, को बंगलूरू से गिरफ्तार किया गया है।

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जांच और छापेमारी की कार्रवाई
यह कार्रवाई एक संदिग्ध जीएसटी पंजीकरण की जांच के बाद शुरू हुई। प्रारंभिक जांच में मिली जानकारी के आधार पर, डीजीजीआई की बेलगावी जोन इकाई ने बंगलूरू में 'स्टार टैक्स कंसल्टेंट' से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी से एक सुनियोजित गिरोह का खुलासा हुआ जो बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी कर रहा था।
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मास्टरमाइंड मोहम्मद सैफुल्लाह की गिरफ्तारी
जांच में मोहम्मद सैफुल्लाह नाम के एक पंजीकृत जीएसटी  प्रैक्टिशनर की पहचान इस ऑपरेशन के मास्टरमाइंड के रूप में हुई। वह कई निष्क्रिय और शेल GSTINs का प्रबंधन कर रहा था और इनवॉइस मूल्य के प्रतिशत के रूप में गणना की गई कमीशन के बदले फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जारी करवाने का काम कर रहा था। जब उसके सामने पुख्ता सबूत पेश किए गए, तो उसने इस धोखाधड़ी वाली योजना में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली।
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मोहम्मद सैफुल्लाह को 24 फरवरी को बंगलूरू में वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे बंगलूरू की एक विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया, जिसने उसे बेलगावी स्थानांतरित करने के लिए ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी। इसके बाद, उसे बेलगावी की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-4 अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल
डीजीजीआई द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, इस गिरोह ने लगभग 235 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया। यह गिरोह विभिन्न कंपनियों को फर्जी इनवॉइस जारी करता था, जिसके आधार पर वे गलत तरीके से आईटीसी का लाभ उठा लेते थे। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपियों द्वारा संचालित कई जीएसटी पंजीकरणों का एकमात्र उद्देश्य फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करना था, ताकि अंतिम लाभार्थियों को धोखाधड़ी से आईटीसी क्लेम करने में मदद मिल सके।


शेल कंपनियों और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर का प्रयोग
धोखाधड़ी करने वाले गिरोह ने व्यवस्थित तरीके से ऑनलाइन लेखांकन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया। इसके ज़रिए वे कई शेल कंपनियों के माध्यम से होने वाले लेन-देन का रिकॉर्ड रखते और उन पर नज़र रखते थे। इन शेल कंपनियों की कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी, और उनका इस्तेमाल केवल कागजी कार्रवाई के लिए किया जा रहा था।

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