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देवरियाः अवैध रूप से चल रहा था संरक्षण गृह, पुलिस जानती थी फिर भी लड़कियों को शरण के लिए भेजती रही

Tue, 07 Aug 2018 04:20 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, देवरिया
ब्यूरो,अमर उजाला, देवरिया Updated Tue, 07 Aug 2018 04:20 AM IST
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deoria shelter home was running illegally, police even sent girls for rehabilitation
बालिका संरक्षण गृह

मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के अंतर्गत संचालित संस्थाओं की मान्यता जून 2017 में ही स्थगित हो गई थी। तीन वर्षों से संस्था को फंड रोक दिया गया था। इसके बावजूद न संस्था का संचालन रुका और न ही वहां लड़कियों को भेजने का सिलसिला थमा।

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घर से भागी या गुमशुदा हाल में मिली लड़कियों को पुलिस खुद इसी संस्था में शरण दिलाती थी। संस्था के रिकार्ड की मानें तो पिछले तीन वर्षों में स्वाधार गृह व बालगृह में 707 लड़कियों को पहुंचाया गया, जिन्हें बाद में परिवार के पास भेज दिया गया। हर तरफ यही सवाल है कि संस्था की मान्यता न होने की बात जानते हुए भी अफसर लड़कियों को यहीं क्यों भेजते थे। इससे बड़ा सवाल, लड़कियां आती थीं तो बिना फंड उनका भरण-पोषण कैसे होता था।
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प्रदेश में हुए पालना घोटाला की सीबीआई जांच में मां विंध्यवासिनी संस्था का नाम भी आने के बाद महिला बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने संस्था को मिलने वाली सरकारी मदद पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जून 2017 में संस्था की मान्यता को भी स्थगित करते हुए यहां मौजूद सभी बच्चों को गोरखपुर और बलिया के केंद्रों में शिफ्ट करने के निर्देश हुए। जिम्मेदारों की अनदेखी के बावजूद संचालिका ने मनमाने ढंग से सभी संस्थाओं का संचालन जारी रखा। विभागीय अफसर सिर्फ पत्र लिखने तक सिमटे रहे। 
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कई बार हो चुकी थी संरक्षण गृह बंद कराने की मांग

deoria shelter home was running illegally, police even sent girls for rehabilitation
यौन शोषण - फोटो : अमर उजाला
सूत्रों की मानें तो पुलिस-प्रशासन के अफसरों को भी कई बार पत्र लिखकर संस्था को बंद कराने की मांग की गई, लेकिन कार्रवाई की बजाए पुलिस गुमशुदा व घर से भागी लड़कियों को बरामदगी के बाद इसी केंद्र में आश्रय दिलाती थी। इस मामले में डीएम सुजीत कुमार ने 19 सितंबर 2017 को ही एसपी को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया था कि यह संस्था अवैध है। लिहाजा सभी थानों को निर्देशित कर दें कि किसी भी बालिका, किशोरी या युवती को यहां न भेजें। उन्हें पहले बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करें, यह समिति ही तय करेगी कि बच्चे कहां भेजे जाएं। इसके बाद भी पुलिस मनमाने ढंग से हर बार लड़कियों को यहीं भेजती रही।

तीन वर्षों में रखी गई लड़कियां
स्वाधार गृह:
वर्ष 2016-17: 127
वर्ष 2017-18: 155
वर्ष 2018-19: 55

बालगृह बालिका: 
वर्ष 2016-17: 135
वर्ष 2017-18: 165
वर्ष 2018-19: 60
(स्रोत: बालगृह का रिकार्ड)
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