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सुप्रीम कोर्ट: सरोजिनी नगर में झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई रोकी, केंद्र को जारी किया नोटिस
Mon, 25 Apr 2022 08:21 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 25 Apr 2022 08:21 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के सरोजिनी नगर इलाके में करीब 200 झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा कि एक आदर्श सरकार को मानवीय रुख अपनाना चाहिए क्योंकि यह मौलिक अधिकार से जुड़ा मसला है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक अथॉरिटी द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। मामले की सुनवाई अगले सोमवार को निर्धारित की गई है।
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शीर्ष अदालत ने झुग्गीवासियों की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। झुग्गीवासियों ने अपनी याचिका में गुहार लगाई है कि बिना उचित राहत और पुनर्वास योजना के के किसी तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं होगी। सोमवार को अगली सुनवाई की जाएगी।
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सुनवाई की शुरुआत में झुग्गीवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि लगभग 1000 लोगों के पुनर्वास के लिए कोई योजना होनी चाहिए। इनमें स्कूल जाने वाले बच्चे भी शामिल हैं। सिंह ने कहा कि उन्हें हवा में गायब होने के लिए नहीं कहा जा सकता। केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने तर्क दिया कि किसी ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है और उसने मतदाता पहचान पत्र हासिल कर लिया हो तो उसे रहने का अधिकार नहीं मिल सकता है। वहीं दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि लोगों की रक्षा की जानी चाहिए।
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जस्टिस जोसेफ ने पाया कि सरकारी नोटिस में कहा गया है कि सरकार को जमीन सौंप दो। पीठ ने नटराज से कहा कि मसला यह है कि वे वहां रह रहे हैं। सरकार को लोगों के साथ मानवीय व्यवहार करना चाहिए। पीठ ने कहा कि जब आप एक मॉडल सरकार के रूप में उनके साथ व्यवहार करते हैं तो आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास कोई नीति नहीं है और बस उन्हें वहां से फेंक दें। आप परिवारों के साथ काम कर रहे हैं।
नटराज ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को राहत दी जा सकती है लेकिन वे एक जनहित याचिका की आड़ में सभी का समर्थन नहीं कर सकते। नटराज ने कहा कि खुद एक याचिकाकर्ता होने के नाते वह यह नहीं कह सकता कि वह दूसरों के लिए भी राहत मांग रहा है। पीठ ने कहा कि कुछ लोग 1995 से विवाद वाले जमीन पर रह रहे हैं। न्यायमूर्ति रॉय ने कहा कि इस मामले का सभी लोगों पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने नटराज से पूछा, क्या ऐसा होना चाहिए कि अदालत के समक्ष आने वाले केवल दो व्यक्ति सुरक्षित हैं और अन्य नहीं हैं?
शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक झुग्गी व्यक्ति का व्यक्तिगत अधिकार है। मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद पीठ ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका की प्रति एएसजी को दी जाए।