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रैश ड्राइविंग से जान लेने पर सिर्फ दो साल सजा, गोहत्या पर 14 साल
अमर उजाला/ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Sun, 16 Jul 2017 09:50 AM IST
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गाय की हत्या करने पर पांच साल, सात साल या कई राज्यों में 14 साल तक की सजा का प्रावधान है लेकिन किसी इंसान की मौत अगर लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से हो जाती है तो कानून में केवल दो साल की सजा का प्रावधान है।
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दिल्ली की अदालत ने उत्सव भसीन मामले में शनिवार को तल्ख टिप्पणी करते हुए और मजबूरी जताते हुए कहा कि मानव जीवन बहुमूल्य है, कानून में संशोधन कर ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए।
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अदालत ने बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में हरियाणा के सोनीपत के व्यवसायी के पुत्र उत्सव भसीन को दो साल कैद की सजा सुनाई है। दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा मृतक के परिवार को 10 लाख और जख्मी हुए युवक मृग्यांक को दो लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
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मामला 2008 में दिल्ली के मूलचंद फ्लाईओवर के नजदीक हुए हादसे का है। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी जबकि, दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था। साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने उत्सव भसीन (30) को लापरवाही से वाहन चलाने, चोट पहुंचाने व लापरवाही से जान लेने की धाराओं में 26 मई को दोषी करार दिया था।
जबकि, गैर इरादतन हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया था।
और जमानत भी मिली
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अदालत ने उत्सव भसीन को फिलहाल सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए जमानत दे दी है। तय नियमों के तहत यदि सजा तीन वर्ष से कम हो तो दोषी को जमानत प्रदान की जाती है।
फैसले की प्रति पीएम को भेजें, ताकि सजा के प्रावधानों में हो बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2015 में मन की बात संबोधन का हवाला देते अदालत ने कहा कि पीएम ने भी चिंता जाहिर करते हुए उस सड़क हादसे का जिक्र किया था जिसमें राजधानी में एक शख्स सड़क पर 10 मिनट तक खून से लथपथ पड़ा रहा लेकिन कोई उसकी मदद करने आगे नहीं आया।
अदालत ने प्रधानमंत्री को फैसले की कॉपी भेजने का आदेश दिया है ताकि वह लापरवाही से जान लेने के मामले में कम सजा के प्रावधान पर जरूरी कदम उठा सकें। प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास के नारे का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि यह तभी ही होगा जब लोग सड़क हादसों में न मारे जाएं।
फैसले की प्रति पीएम को भेजें, ताकि सजा के प्रावधानों में हो बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2015 में मन की बात संबोधन का हवाला देते अदालत ने कहा कि पीएम ने भी चिंता जाहिर करते हुए उस सड़क हादसे का जिक्र किया था जिसमें राजधानी में एक शख्स सड़क पर 10 मिनट तक खून से लथपथ पड़ा रहा लेकिन कोई उसकी मदद करने आगे नहीं आया।
अदालत ने प्रधानमंत्री को फैसले की कॉपी भेजने का आदेश दिया है ताकि वह लापरवाही से जान लेने के मामले में कम सजा के प्रावधान पर जरूरी कदम उठा सकें। प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास के नारे का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि यह तभी ही होगा जब लोग सड़क हादसों में न मारे जाएं।