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Delhi: स्कूलों में फीस वृद्धि पर घमासान, फीस बढ़ाने के मामले की जांच के लिए कमेटी गठित
Mon, 07 Apr 2025 08:52 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 07 Apr 2025 08:52 PM IST
सार
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में भी कुछ स्कूल लगातार फीस बढ़ोतरी कर रहे थे, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार ने इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद
- फोटो : एएनआई
विस्तार
दिल्ली के स्कूलों में फीस वृद्धि के मामले में घमासान छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के स्कूलों में फीस वृद्धि की जा रही है और इसकी मार अभिभावकों-बच्चों पर पड़ रही है। वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में भी कुछ स्कूल लगातार फीस बढ़ोतरी कर रहे थे, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार ने इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि, वर्तमान मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है। फीस वृद्धि का मामला सही पाए जाने पर स्कूल पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आम आदमी पार्टी ने अपनी यह छवि बनाई थी कि उसके शासनकाल में दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को मनमानी नहीं करने दी गई। इस दौरान कोई स्कूल फीस नहीं बढ़ा पाया। आम आदमी पार्टी का यह मॉडल उसकी लोकप्रियता का बड़ा आधार बना था। लेकिन अप्रैल से दिल्ली के स्कूलों में नया सत्र शुरू हो गया है। मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया है कि दिल्ली के कुछ प्राइवेट स्कूल मनमानी तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं, लेकिन नई सरकार से सांठगांठ के कारण उन पर कोई लगाम नहीं लग रही है।
शिक्षा मंत्री ने बताया
आम आदमी पार्टी के इन आरोपों पर सोमवार को दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद स्वयं सामने आए। उन्होंने आम आदमी पार्टी के हर सवालों का जवाब दिया और कहा कि निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। जिस स्कूल में फीस वृद्धि की बात सामने आई है, उस पर जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। जांच में सही पाए जाने पर स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा 2025 तक के पिछले सत्रों की भी जानकारी मांगी जा रही है। जो स्कूल फीस बढ़ाने के दोषी पाए जाएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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आरोप
दिल्ली में 1677 प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें से 335 सरकारी जमीन पर बने हैं। 1973 के दिल्ली स्कूल एक्ट के अनुसार इन स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है। 114 स्कूल ही ऐसे हैं जिनको फीस बढ़ाने के लिए अनुमति लेने के लिए कोई बाध्यता नहीं हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले दिल्ली शिक्षा निदेशालय की मंजूरी लेना जरूरी है। लेकिन दिल्ली के शिक्षा मंत्री का आरोप है कि पिछले पांच सालों में दिल्ली का एक बड़ा निजी स्कूल लगातार फीस बढ़ोतरी करता रहा, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया। आशीष सूद ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के शासन में दिल्ली के 1677 प्राइवेट स्कूलों में से केवल 75 स्कूलों का ही हर साल ऑडिट किया गया। जबकि दिल्ली एजुकेशन एक्ट के तहत सभी स्कूलों का प्रतिवर्ष ऑडिट करवाना आवश्यक है। राजधानी के सबसे टॉप स्कूलों का नाम लेकर मंत्री ने आरोप लगाया कि किसी स्कूल में 13 प्रतिशत तो किसी में 35 फीसदी तक की फीस वृद्धि की गई, लेकिन तत्कालीन दिल्ली सरकार ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया। एक बड़े निजी स्कूल में करोड़ों की हेराफेरी का मामला सामने आया था, लेकिन इसके बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यदि कोई स्कूल फीस या एडमिशन फीस के नाम पर अभिभावकों से अवैध वसूली करता है, या वह नियमों का पालन नहीं करता है तो वे ईमेल आईडी ddeact1@gmail.com पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली शिक्षा निदेशालय के दफ्तर में जाकर भी शिकायत कर सकते हैं।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आम आदमी पार्टी ने अपनी यह छवि बनाई थी कि उसके शासनकाल में दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को मनमानी नहीं करने दी गई। इस दौरान कोई स्कूल फीस नहीं बढ़ा पाया। आम आदमी पार्टी का यह मॉडल उसकी लोकप्रियता का बड़ा आधार बना था। लेकिन अप्रैल से दिल्ली के स्कूलों में नया सत्र शुरू हो गया है। मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया है कि दिल्ली के कुछ प्राइवेट स्कूल मनमानी तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं, लेकिन नई सरकार से सांठगांठ के कारण उन पर कोई लगाम नहीं लग रही है।
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शिक्षा मंत्री ने बताया
आम आदमी पार्टी के इन आरोपों पर सोमवार को दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद स्वयं सामने आए। उन्होंने आम आदमी पार्टी के हर सवालों का जवाब दिया और कहा कि निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। जिस स्कूल में फीस वृद्धि की बात सामने आई है, उस पर जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। जांच में सही पाए जाने पर स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा 2025 तक के पिछले सत्रों की भी जानकारी मांगी जा रही है। जो स्कूल फीस बढ़ाने के दोषी पाए जाएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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आरोप
दिल्ली में 1677 प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें से 335 सरकारी जमीन पर बने हैं। 1973 के दिल्ली स्कूल एक्ट के अनुसार इन स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है। 114 स्कूल ही ऐसे हैं जिनको फीस बढ़ाने के लिए अनुमति लेने के लिए कोई बाध्यता नहीं हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले दिल्ली शिक्षा निदेशालय की मंजूरी लेना जरूरी है। लेकिन दिल्ली के शिक्षा मंत्री का आरोप है कि पिछले पांच सालों में दिल्ली का एक बड़ा निजी स्कूल लगातार फीस बढ़ोतरी करता रहा, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया। आशीष सूद ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के शासन में दिल्ली के 1677 प्राइवेट स्कूलों में से केवल 75 स्कूलों का ही हर साल ऑडिट किया गया। जबकि दिल्ली एजुकेशन एक्ट के तहत सभी स्कूलों का प्रतिवर्ष ऑडिट करवाना आवश्यक है। राजधानी के सबसे टॉप स्कूलों का नाम लेकर मंत्री ने आरोप लगाया कि किसी स्कूल में 13 प्रतिशत तो किसी में 35 फीसदी तक की फीस वृद्धि की गई, लेकिन तत्कालीन दिल्ली सरकार ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया। एक बड़े निजी स्कूल में करोड़ों की हेराफेरी का मामला सामने आया था, लेकिन इसके बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यदि कोई स्कूल फीस या एडमिशन फीस के नाम पर अभिभावकों से अवैध वसूली करता है, या वह नियमों का पालन नहीं करता है तो वे ईमेल आईडी ddeact1@gmail.com पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली शिक्षा निदेशालय के दफ्तर में जाकर भी शिकायत कर सकते हैं।