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SC: राज्यों का अनियंत्रित कर्ज देश की क्रेडिट रेटिंग को नीचे लाता है, केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जवाब

Wed, 07 Feb 2024 01:20 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 07 Feb 2024 01:20 PM IST
सार

राज्यों द्वारा उधार लेने पर लगाई सीमा के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र ने नोट प्रस्तुत किया है। जिसमें कहा गया कि राज्यों द्वारा लिया जा रहा बेतरतीब ढंग से कर्ज सामाजिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। राज्यों पर कर्ज का बोझ देश की क्रेडिट रेटिंग को प्रभावित करता हैं।

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Debts of states affect credit rating of country: Centre to Supreme Court on curbs imposed on Kerala borrowing
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि राज्यों के अनियंत्रित उधार लेने से समूचे देश की ‘क्रेडिट रेटिंग’ और वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी। कर्ज सीमा तय करने के खिलाफ केरल की याचिका पर केंद्र ने यह भी कहा कि राज्य की राजकोषीय स्थिति में कई खामियां पाई गई हैं। शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन एक राष्ट्रीय मुद्दा है। केरल सरकार ने आरोप लगाया गया है कि राज्य की ऋण सीमा तय कर केंद्र ने वित्त को विनियमित करने की उसकी विशेष, स्वायत्त और पूर्ण शक्तियों के प्रयोग में हस्तक्षेप किया है।

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केंद्र ने हलफनामे में कहा, अगर कोई राज्य कर्ज चुकाने में विफल रहता है तो प्रतिष्ठा संबंधी समस्याएं पैदी होंगी। इससे पूरे भारत की वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ेगी। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अनियंत्रित ऋण से निजी उद्योगों की ऋण लागत बढ़ेगी। इससे बाजार में वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हलफनामे में यह भी कहा गया कि अधिक ऋण लेने के परिणामस्वरूप राज्य की ऋण भुगतान देनदारियों में वृद्धि होगी। विकास कार्यों के लिए धन की उपलब्धता कम हो जाएगी। जिससे लोगों का विकास बाधित होगा और राज्य की आय को हानि पहुंचेगी। इससे राष्ट्रीय आय को भी नुकसान पहुंचेगा। साथ ही विभिन्न सामाजिक और अन्य समस्याएं भी पैदा हो सकती है। शीर्ष अदालत ने 12 जनवरी को केरल सरकार की याचिका पर केंद्र से दो हफ्ते में जवाब मांगा था।
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राज्यों को किसी भी जरिये से उधार लेने से पहले केंद्र से मंजूरी लेने की आवश्यकता
अटॉर्नी जनरल ने हलफनामे में कहा कि सभी राज्यों को किसी भी जरिये से उधार लेने से पहले केंद्र सरकार से मंजूरी लेने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार अनुमति देते समय पूरे देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता के समग्र उद्देश्यों को ध्यान में रखती है। साथ ही अनुच्छेद 293(4) के तहत इसकी अनुमति मांगने वाले राज्य के लिए उधार लेने की सीमा तय करती है। राज्यों की उधार सीमा वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी तरीके से तय की जाती है।
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केरल की आर्थिक सेहत सर्वाधिक कमजोर
अटॉर्नी जनरल ने कहा, केरल की आर्थिक सेहत देश में सबसे कमजोर है। लगातार 12वें, 14वें और 15वें वित्त आयोगों और भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इस पर प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं। राज्य की राजकोषीय इमारत में कई दरारें पाई गई हैं। हलफनामे में वित्त आयोगों, सीएजी और आरबीआई की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। केंद्र ने कहा, केरल सरकार ने खुद अपने जून 2016 में जारी श्वेत पत्र में उसके आर्थिक संकट का जिक्र किया है। इसमें बताया गया था कि उसकी पूरी उधारी रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी। पूंजीगत व्यय के लिए कोई धन नहीं बचा था और बजट में योजनाओं के वित्तपोषण के लिए कोई संसाधन नहीं थे।

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