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महंगाई भत्ता सरकार की दया पर निर्भर नहीं, कर्मचारी का कानूनी अधिकार: हाईकोर्ट

Sat, 01 Sep 2018 12:21 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला Updated Sat, 01 Sep 2018 12:21 PM IST
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dearness allowance not depended on mercy of govt,its legal right: calcutta high court
कलकत्ता उच्च न्यायालय

सरकारी कर्मचारियों के लिए मंहगाई भत्ते की मांग को लेकर अच्छी खबर है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियोें के महंगाई भत्ते (डीए) से जुड़ा राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का एक फैसला खारिज कर दिया। महंगाई भत्ते पर राज्य प्रशासन ट्रिब्यूनल ने कहा था कि महंगाई भत्ता सरकारी र्कामचारियों का कानूनी अधिकार नहीं है।

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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि महंगाई भत्ता सरकार की दया पर निर्भर नहीं इसलिए आदेश दिया कि सरकार मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत दो महीने में यह मामला निपटाये। जस्टिस देबाशीष कारगुप्ता की बेंच ने कहा कि रिवीजन ऑफ पे एंड अलॉउंस रूल, 2009 लागू होने के बाद से महंगाई भत्ता प्राप्त करना सरकारी कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है।

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इससे पहले राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने 2016 में कहा था कि महंगाई भत्ता कानूनी अधिकार नहीं है। यह राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिया जाने वाला एक तरह का दान है। यह राज्य सरकार अपनी मर्जी से ही कर्मचारियों को देती है।
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सरकारी वकील और सरकारी कर्मचारी संघ के वकील के बीच हुई बहस के बाद कोर्ट ने कहा कि महंगाई भत्ता (डीए) सरकार की दया पर निर्भर नहीं है। यह सरकारी कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सैट) के फैसले को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। हालांकि न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता एवं न्यायाधीश शेखर बॉबी सराफ की खंडपीठ ने डीए की दर तय करने का फैसला सैट पर ही छोड़ा है।
 

इस मामले में न्यायाधीशों ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों जितना डीए दिया जाना चाहिए अथवा नहीं, यह सैट ही निर्धारित करेगा। सैट यह भी तय करेगा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दिल्ली और चेन्नई में कार्यरत अपने कर्मचरियों को भिन्न दर पर डीए दिए जाने की जरूरत है या नहीं।

हाई कोर्ट ने इस असमानता को दूर करने के लिए सैट को दो महीने के अंदर मामले का निपटारा करने को कहा है। खंडपीठ ने कहा कि सैट ने जो दावा किया था, उस बाबत राज्य सरकार से हलफनामा नहीं मांगा था। राज्य सरकार को तीन हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।

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