फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Daughters never burdened in this village of Bihar, tradition- planting 10 trees on the birth.

बेटी के जन्म पर 10 पेड़ लगाने वाले बिहार के इस गांव में बेटियां कभी बोझ नहीं रहीं

Thu, 11 Jul 2019 04:49 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार
Updated Thu, 11 Jul 2019 04:49 PM IST
सार

  • बेटियों के जन्म पर गांव में 10 पेड़ लगाने की परंपरा, दुनिया भर में नाम
  • 2012 में गणतंत्र दिवस पर बिहार की झांकी में दिखी थी धरहरा की परंपरा
  • विदेशों से फिल्म निर्माता गांव पहुंचकर बना चुके हैं डॉक्यूमेंट्री व शॉर्ट फिल्म

विज्ञापन
Daughters never burdened in this village of Bihar, tradition- planting 10 trees on the birth.
साल 2012 में गणतंत्र दिवस उत्सव के दौरान दिल्ली के राजपथ पर बिहार की झांकी में धरहरा गांव की परंपरा का दृश्य(File Photo) - फोटो : Rishav Mishra Krishna

विस्तार

बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया का एक छोटा सा गांव है- धरहरा। साल 2012 में गणतंत्र दिवस उत्सव के दौरान दिल्ली के राजपथ पर बिहार की झांकी में इस छोटे से गांव का दृश्य था, जो विश्व पटल पर छाता चला गया। कारण इस गांव की एक ऐसी परंपरा, जो बेटियों के जन्म केे बहाने मानव और पर्यावरण के संबंध को और ज्यादा मजबूत बनाती है।

विज्ञापन


''बिटिया जनम पर पेड़ लगाभो, संग-संग मंगल गाभो नि....''  बेटी के जनम पर पेड़ लगाने की सदियों पुरानी परंपरा वाले जिले के एक छोटे से गांव से निकल कर यह अंगिका गीत दुनिया भर में पहुंच चुका है। बीते कुछ वर्षों में पूरी दुनिया का ध्यान खींचने वाले इस आदर्श ग्राम धरहरा को अब पहचान का संकट नहीं। 
विज्ञापन


गीत के रचनाकार संगीत प्रशिक्षक राजकिशोर सिंह कहते हैं कि इस गांव मेंं बेटियां कभी बोझ नहीं रही। यही कारण है कि लगातार कम होते महिला-पुरुष अनुपात के बीच यहां की स्थिति सुखद आश्चर्य का अनुभव कराती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

आंकड़ें भी देते हैं गवाही

  • नवगछिया के इस धरहरा गांव में महिला-पुरुष अनुपात लगभग 930-1000 है। 
  • गांव में 10 साल से कम उम्र के बच्चों में 525 लड़कियां है, जबकि 256 लड़के हैं।
  • यहां के हाई स्कूल में नौंवीं कक्षा में नामांकित छात्राओं की संख्या, छात्रों से ज्यादा है।

 



बीते दिनों जब अमर उजाला की टीम इस गांव के एसबीसी इंटर स्तरीय स्कूल पहुंची थी तो यहां स्कूल परिसर में लड़कियों के साईकिल की संख्या बता रही थी कि लड़कों के मुकाबले उनकी उपस्थिति 100 फीसदी रहती है। नौवीं और 10वीं कक्षा में जाने पर इसका प्रमाण भी मिला। 

सुकन्या ग्राम के तौर पर भी है पहचान

प्रखंड मुख्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार चार गांवों के इस मकंदपुर पंचायत में 5186 पुरुष के मुकाबले 4556 महिलाएं हैं, लेकिन केवल धरहरा गांव की बात करें, तो यहां प्रति एक हजार पुरुषों पर 930 महिलाएं हैं।

डाक विभाग के सर्वे के हवाले से विभागीय अधिकारी शशिभूषण व राहुल कुमार ने बताया कि गांव में 10 साल से कम उम्र की करीब 525 लड़कियां हैं, जबकि लड़कों का अनुपात इस मुकाबले लगभग आधा है। इस कारण सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाते खोल कर डाक विभाग इसे सुकन्या ग्राम घोषित कर चुका है। 

2010 में खिंचे चले आए थे सीएम, परंपरा बनी विकास का द्योतक

सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गांव की परंपरा मालूम हुई तो विश्व पर्यावरण दिवस पर पहली बार 2010 में यहां पहुंचे और गांव की बेटी लवी कुमारी के नाम पर पेड़ लगाया। दूसरी बार पहुंचे, तो किलकारी केंद्र मिला।

यहां के जनप्रतिनिधि विजय सिंह बताते हैं कि कई बार सीएम का यहां पहुंचना गांव के विकास का एक कारण बना। सड़कें, स्कूल, उप स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाएं चकाचक है। गोपालपुर बीडीओ डॉ रत्ना श्रीवास्तव कहती हैं कि गांव के लोग इतने जागरूक हैं कि सरकारी योजनाओं के लिए बहुत ज्यादा प्रचार-प्रसार की आवश्यकता महसूस नहीं करती।

जरुरी नहीं कि बेटा ही चाहिए, बेटियां काफी हैं

गांव में कई ऐसे घर मिलें, जहां बेटियां ही बेटियां हैं। लद्दाख से सेवानिवृत्त हुए बिहार रेजीमेंट के कैप्टन पीके सिंह घायल रास्ते में मिले, तो बताया कि बेटे राजेश कुमार सिंह ने तीन बेटियों के बाद परिवार नियोजन करा लिया। राजेश कहते हैं कि बेटियां, बेटे से कम थोड़े ही है।

पड़ोस के सुमित कुमार को भी केवल दो बेटियां है। जयकृष्ण सिंह व अन्य कई ऐसे ही परिवार हैं। बगल के गांव पचगछिया के पीयूष सिंह, गुलशन वगैरह बताते हैं कि धरहरा गांव की यह परंपरा आसपास के गांवों में भी अपना ली गई है। 

इंटर तक की पढ़ाई के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ता

धरहरा में शिक्षा के विकास में किसी तरह की खास बाधाएं नजर नहीं आती। गांव में दो प्राथमिक विद्यालय, दो मध्य विद्यालय और एक इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय है। यहां कक्ष नौवीं की छात्राएं ज्योति, प्रीति, पूजा कहती हैं कि साईकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति स्कूल से मिल जाती है, इसलिए पिता पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।

इसके अलावे गोपालपुर प्रखंड का कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी इसी गांव के उत्कृष्ठ विद्यालय का तमगा ले चुके आदर्श मध्य विद्यालय परिसर में संचालित है। 

सरकारी योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग: एसडीएम

नवगछिया के एसडीएम मुकेश कुमार कहते हैं कि धरहरा गांव, भागलपुर जिले की शान है, जो न केवल देश भर में, बल्कि विश्व स्तर पर जिले का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि गांव में लोग भी जागरूक हैं और प्रशासनिक स्तर से सरकारी योजनाओं की भी अनुमंडल प्रशासन मॉनिटरिंग करता रहता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यहां के विकास के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध रहा है औ आगे भी रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed