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खतरा: हिंद महासागर तेजी से हो रहा गर्म, भारत को झेलना पड़ेगी तीव्र ग्रीष्म लहर व बाढ़

Mon, 09 Aug 2021 06:48 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 09 Aug 2021 06:48 PM IST
सार

जलवायु परिवर्तन पर सोमवार को आई एक अंतर सरकारी समिति की ताजा रिपोर्ट के अनुसार हिंद महासागर अन्य महासागरों की तुलना में ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। भारत को इसका खतरा झेलना पड़ेगा। 
 

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Danger: Indian Ocean warming at faster pace, India will have to face intense heat wave and floods
जलवायु परिवर्तन के कारण बदल रहे हैं हालात.... - फोटो : facebook

विस्तार

देश के कई भागों में भारी बाढ़ के हालात हैं तो कई क्षेत्रों में अल्प वर्षा के हालात हैं। ऐसे में सोमवार को एक अंतर सरकारी समिति की रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन को लेकर चेताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य महासागरों की तुलना में हिंद महासागर ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। इसके कारण भारत को तीव्र ग्रीष्म लहर व बाढ़ का खतरा झेलना पड़ेगा। यह जलवायु परिवर्तन का ऐसा खतरा होगा, जिसे टाला नहीं जा सकेगा। 

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तटीय क्षेत्रों में ज्यादा बाढ़ आएगी
जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी समिति (IPCC) की छठी आकलन रिपोर्ट (एआर-6) 'क्लाइमेट चेंज 2021: द फिजिकल साइंस बेसिस' के लेखकों ने कहा कि महासागर के गर्म होने से समुद्र के स्तर में वृद्धि होगी। इससे तटीय क्षेत्रों में और ज्यादा बाढ़ आएगी व समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। 
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रिपोर्ट के लेखकों में से एक फ्रेडरिक ओट्टो ने कहा कि भारत जैसे देश में ग्रीष्म लहर में कुछ वृद्धि एयरोसोल उत्सर्जन के कारण होती है। वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए इस उत्सर्जन को कम करना महत्वपूर्ण है। महासागर का तापमान बढ़ने के कारण ग्रीष्म लहर वृद्धि, भारी वर्षा और ग्लेशियरों हिमनदों के पिघलने की घटनाएं भी होंगी। इनका भारत पर असर होगा। समुद्र के स्तर में वृद्धि से अधिक मिश्रित घटनाएं, जिसका मतलब चक्रवातों के आने पर बाढ़ का खतरा हो सकता है। ये कुछ ऐसे प्रभाव हैं, जिन्हें टाला नहीं जा सकेगा। 
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रिपोर्ट के एक अन्य लेखक स्वप्ना पनिकल ने कहा कि समुद्री जलस्तर बढ़ने की 50 फीसदी वजह गर्मी बढ़ना होगी। पनिकल भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान यानी आईआईटीएम की वैज्ञानिक हैं। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र ज्यादा तेज गति से गर्म हो रहा है, इसका मतलब है कि समुद्र का जलस्तर भी बढ़ सकता है। स्वप्ना पनिकल ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में 21 वीं सदी में समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी दिखाई देगी। इसके कारण कई तटीय इलाकों में बाढ़ और तटीय कटाव होगा। इतना ही नहीं समुद्री स्तर बढ़ने की गंभीर घटनाएं, जो पहले 100 साल में एक बार होती थीं, वह सदी के अंत तक हर साल हो सकती हैं। 

इंसानी गतिविधियां जिम्मेदार
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निर्विवाद रूप से सही है कि इंसानी गतिविधियों के कारण ही जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इसी कारण जलवायु में बदलाव की विकट घटनाएं हो रही हैं, जैसे कि ग्रीष्म लहर, भारी बारिश, सूखा। इनका बार-बार व और अधिक गंभीर रूप लेना की भी यही वजह है। महासागर का तापमान बढ़ने का सिलसिला 1970 के दशक से शुरू हुआ। महासागर का अम्लीकरण शुरू हुआ और पृथ्वी के बर्फीले क्षेत्रों में बदलाव होने लगा। 1990 के दशक से आर्कटिक महासागर की बर्फ में 40 प्रतिशत की कमी आई है और 1950 के दशक से बसंत काल में बर्फ का आवरण घटने लगा। 


लेखकों का कहना है कि अगले 20-30 सालों में भारत में बारिश में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन 21 वीं सदी के अंत से सालाना और ग्रीष्मकालीन मानसून की बारिश बढ़ने लगेगी। 21 वीं सदी में जहां गर्मी बढ़ेगी वहीं ठंड कम होना शुरू हो जाएगी। यदि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी पैमाने पर कमी नहीं आई तो ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना नामुमकिन होगा।

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