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मुझे आतंकवादी समझते हैं चीन के अधिकारी: दलाई लामा
amarujala.com- Written By: रीता तिवारी
Updated Fri, 07 Apr 2017 02:01 PM IST
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तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला
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तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे को लेकर भारत व चीन के बीच बढ़ती तनातनी के बीच उन्होंने कहा है कि चीन के कुछ सरकारी अधिकारी उनको आतंकवादी मानते हैं। उन्होंने कहा कि हम चीन से आजादी नहीं बल्कि स्वायत्तता चाहते हैं।
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अपने अरुणाचल दौरे के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को दिरांग में स्थानीय लोगों और बौद्ध भिक्षुओं से बातचीत में दलाई लामा ने बीफ पर पाबंदी के देशव्यापी अभियान के बीच मांसाहार का तो समर्थन किया। लेकिन इसके लिए जीवों की हत्या करने को गलत ठहराया।
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तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रवक्ता सोनम दाग्पो ने कहा है कि दलाई लामा का यह दौरा धार्मिक है, राजनीतिक नहीं। इसलिए चीन को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चहिए। भारत में संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए दलाई लामा ने कहा कि भारतीयों को प्राचीन ज्ञान व संस्कृत की धनी विरासत पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने तिब्बती भाषा को संस्कृत के करीब बताते हुए कहा कि यह दोनों भाषाएं दर्शन और आध्यात्म की व्याख्या करने के लिए आदर्श हैं। भारत जैसी पुरानी सभ्यता को संस्कृत की परंपरा को बढ़ावा देना चाहिए।
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दलाई लामा ने कहा कि मृत जानवरों का मांस खाने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन सिर्फ मांस खाने के लिए उनकी हत्या गलत है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म को मानने वाले कई लोग शाकाहारी हैं क्योंकि वे इसके लिए जीव हत्या को गलत मानते हैं। राज्य के तवांग और पूर्वी कामेंग जिले के कई बौद्ध भिक्षु भी याक का मांस खाते हैं। लेकिन वे इसके लिए खुद याक की हत्या नहीं करते। तिब्बती धर्म गुरु ने कहा कि वे धर्म के नाम पर बढ़ने वाले आतंकवाद से चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय मुस्लिम आतंकवादियों और बौद्ध आतंकवादियों (म्यांमार में) के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है। लेकिन जिस क्षण कोई भी व्यक्ति आतंकवाद की राह चुन लेता है, वह मुस्लिम या बौद्ध नहीं रह जाता। इसी संदर्भ में उनका कहना था कि चीनी अधिकारी तो उनको भी आतंकवादी मानते हैं।