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CSS: पदोन्नति पर केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों में नाराजगी, नॉर्थ ब्लॉक में हल्लाबोल तो संसद में सवाल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 10 Dec 2022 10:09 PM IST
सार

पदोन्नति के लिए सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) लगातार आवाज बुलंद कर रही है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी इस संबंध में कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से आग्रह कर चुके हैं।

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CSS: Resentment among Central Secretariat Service officers on promotion questions in North Block to Parliament
CSS पदोन्नति मामला - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्र सरकार की 'रीढ़' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' में बड़े पैमाने पर खाली पड़े सेक्शन अफसर यानी 'एसओ' की रिक्तियों को पदोन्नति के जरिए नहीं भरा जा रहा है। इस बात पर शुक्रवार को अधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। डीओपीटी सचिव के समक्ष अपनी बात रखने के लिए सैंकड़ों सीएसएस अधिकारी, नॉर्थ ब्लॉक में पहुंचे। 2013 बैच के लगभग 1100 एएसओ, 'सेक्शन अफसर' बनने का इंतजार कर रहे हैं। 900 से ज्यादा 'एएसओ' तो 'एसओ' बनने की सभी शर्तें पूरी करते हैं। पदोन्नति के लिए सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) लगातार आवाज बुलंद कर रही है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी इस संबंध में कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से आग्रह कर चुके हैं। राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला और सुशील कुमार गुप्ता ने मौजूदा संसद सत्र में 'एएसओ' को पदोन्नति न दिए जाने का मुद्दा उठाया है। 

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पदोन्नति की राह देखते-देखते रिटायर हो गए अधिकारी  
बता दें कि इससे पहले भी सीएसएस फोरम को पदोन्नति के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था। करीब 15 सौ सीएसएस अधिकारियों ने नॉर्थ ब्लॉक में हल्लाबोल किया था। वे पदोन्नति की मांग को लेकर नॉर्थ ब्लॉक की गैलरी में बैठ गए थे। बाद में उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होगा। गत जुलाई में उन्हें पदोन्नति दे दी गई। केंद्रीय सचिवालय सेवा के 3640 पदों में से 1624 पद (लगभग 45 प्रतिशत) खाली पड़े हैं। सीएसएस फोरम के बढ़ते विरोध को देखकर डीओपीटी ने एक दिसंबर को एडहॉक पदोन्नति देने का एक आदेश निकाला था। महज 288 एएसओ को  तदर्थ पदोन्नति देने की बात कही गई। सीएसएस फोरम के मुताबिक, इसमें भी से पचास से ज्यादा अधिकारी तो पदोन्नति की राह देखते-देखते रिटायर हो चुके हैं। कुछ अधिकारियों ने नौकरी को ही अलविदा बोल दिया। तदर्थ पदोन्नति के आदेश में यह भी लिखा है कि जो नए 'एसओ' बनेंगे, वे डेस्क पैटर्न पर काम करेंगे। यानी उन्हें कोई सहायक स्टाफ नहीं मिलेगा। सुबह से लेकर देर रात तक उन्हें ही सारा काम करना होगा। 
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900 से ज्यादा 'एएसओ', एडहॉक पदोन्नति केवल 288 को
सीएसएस फोरम का कहना है कि जब विभाग को स्थायी पदोन्नति न देकर, अस्थायी यानी एडहॉक पदोन्नति ही देनी थी तो उसमें सभी योग्य 'एएसओ' को शामिल किया जाना था। एडहॉक पदोन्नति की गाइड लाइन में लिखा है कि यह पदोन्नति किसी ग्रेड में कुल वैकेंसी के अगेंस्ट होती है। उसमें कोटा नहीं देखा जाता कि वह पदोन्नति एग्जाम कोटे से है या वरिष्ठता आधार पर मिल रही है। सभी योग्य लोगों को परमोशन देनी चाहिए थी। फोरम ने डीओपीटी से भी आग्रह किया था कि लगभग 900 एएसओ, 'एसओ' बनने के पात्र हैं, उन्हें पदोन्नत किया जाए। अब सरकार ने केवल 288 को तदर्थ पदोन्नति देने की बात कही है। ये सभी अधिकारी आठ साल से एक ही पद पर काम कर रहे हैं। पदोन्नति देने की मांग को लेकर हर सप्ताह करीब 50 हजार ट्वीट हो रहे हैं। सरकार ने आरटीआई के जवाब में कुल 1624 पद रिक्त होने की बात कही है। इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद अब केवल 288 लोगों को ही पदोन्नति दी जा रही है। 
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पदोन्नति होगी तो बेरोजगार युवाओं को मिलेगी नौकरी
डीओपीटी द्वारा जिन एएसओ को तदर्थ आधार पर एसओ बनाया जाएगा, वे डेस्क पैटर्न पर काम करेंगे। यानी उन्हें किसी सहायक की मदद नहीं मिलेगी। 'एसओ' को ही सारा काम करना होगा। सामान्य तौर पर 'एसओ' के पास स्पोर्ट स्टाफ रहता है। इसमें दो-तीन 'एएसओ', एलडीसी, यूडीसी व एमटीएस शामिल होते हैं। सीएसएस फोरम के पदाधिकारी बताते हैं कि अगर नीचे सहायक स्टाफ नहीं है तो सरकार को तेज गति से पदोन्नति करनी चाहिए। वजह, जब निचला स्टाफ पदोन्नत होगा तो उसका पद खाली हो जाएगा। ऐसे में नई भर्ती की संभावना बनेगी। बेरोजगार युवाओं को नौकरी में आने का मौका मिलेगा। जब सभी योग्य एएसओ, एसओ बनेंगे तो एएसओ के पद रिक्त हो जाएंगे। वहां नए पद सृजित हो सकेंगे। एसएससी के जरिए उन पदों को भरा जा सकेगा। अब जिन 288 लोगों को तदर्थ पदोन्नति देने का आदेश निकाला है, उसमें करीब 220 वैकेंसी ही बचती हैं। पदोन्नति की राह देखते-देखते अनेक अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। पदोन्नति में देरी होते देख, कई ऐसे अधिकारी जो सीधी भर्ती के द्वारा सेवा में आए थे, उन्होंने नौकरी छोड़ दी। 



9 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिली पदोन्नति
2013 बैच के एएसओ को अभी तक पदोन्नति नहीं मिल सकी है। डीओपीटी मंत्री कह देते हैं कि फीडर ग्रेड में कोर्ट केस होने के कारण 'एसओ' के पद पर नियमित पदोन्नति नहीं दी जा सकती है। डीओपीटी की गाइडलाइन कहती है कि ऐसे मामले में एडहॉक पदोन्नति दी जा सकती है। पहले भी दी गई हैं। पिछले दिनों विभागीय परीक्षा 2018 का एक नोटिफिकेशन निकला था। डीओपीटी ने इस मामले में कोर्ट केस का सहारा लेकर फीडर ग्रेड में एग्जाम करने का शेड्यूल तैयार कर दिया। जब इस मामले में कोर्ट केस का सहारा लेकर परीक्षा का शेड्यूल जारी हो सकता है तो उसी आधार पर पदोन्नति भी दी जा सकती है। कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, इस साल जुलाई में सीएसएस, सीएसएसएस और सीएससीएस के करीब आठ हजार अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी। 2013 बैच का न्यायाधीन मामला है।   

केंद्रीय मंत्रालयों में खाली पड़े हैं 'एसओ' के इतने पद
रक्षा मंत्रालय में सेक्शन अफसर (अनुभाग अधिकारी) के कुल 232 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 141 पद खाली पड़े हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के 41 पद हैं, जिनमें से 27 पद रिक्त हैं। एमओएसटी में 51 पद हैं। मौजूदा समय में 40 पद खाली पड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सेक्शन अफसर के कुल 296 पद हैं। इनमें से 112 पद खाली पड़े हैं। केमिकल मिनिस्ट्री में सेक्शन अफसर के कुल पद 12 हैं, इनमें से 10 पद खाली हैं। फार्मा में सेक्शन अफसर के कुल 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 पद रिक्त हैं। शिपिंग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के लिए स्वीकृत 37 पदों में से 26 पद खाली पड़े हैं। जल संसाधन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 69 पद हैं। इनमें से 20 पद रिक्त हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 39 पद हैं, जिनमें से 24 पद खाली हैं। इसी तरह श्रम मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के कुल 79 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 35 पद खाली हैं। 


इन विभागों में भी हैं अनुभाग अधिकारी के खाली पद
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 184 पदों में से 46 पद रिक्त हैं। कोल मिनिस्ट्री में अनुभाग अधिकारी के 24 पद हैं, जिनमें 15 पद रिक्त हैं। दूर संचार मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए स्वीकृत 39 पदों में से 27 पद खाली पड़े हैं। लीगल अफेयर में सेक्शन अफसर के 31 पदों में से 13 पद रिक्त हैं। डाक विभाग में 49 पद हैं, जिनमें से 9 पद खाली हैं। नीति आयोग में अनुभाग अधिकारी के 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 10 पद खाली पड़े हैं। डीएफएस में अनुभाग अधिकारी के कुल 29 पद हैं। इसमें से 13 पद रिक्त हैं। शिक्षा मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए 127 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 41 पद खाली पड़े हैं। डीजीएचएस, एमओएचएफडब्लू में अनुभाग अधिकारी के 28 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 20 पद रिक्त हैं। ट्राइबल अफेयर में अनुभाग अधिकारी के लिए 19 पद मंजूर किए गए हैं, जिनमें से आठ पद खाली हैं। 

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