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CRPF: संसद में उग्रवाद और सीआरपीएफ पर पूछा गया एक सवाल क्यों चर्चा में? सशस्त्र बलों पर मिला ये जवाब

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 10 Dec 2022 05:29 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई अवसरों पर कह चुके हैं कि देश में उग्रवाद और नक्सलवाद की घटनाएं तेजी से कम हो रही हैं। उन्होंने जम्मू में सीआरपीएफ के स्थापना दिवस पर कहा था कि हो सकता है, जम्मू-कश्मीर में कुछ वर्षों में सीआरपीएफ की जरूरत ना पड़े।

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CRPF: Why question was asked on extremism and CRPF in Parliament This answer was found on armed forces
crpf - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

संसद के मौजूदा सत्र में केंद्रीय सशस्त्र बलों को लेकर पूछा गया एक सवाल चर्चा में है। उग्रवाद विरोधी रणनीति की समीक्षा को लेकर राज्यसभा सदस्य केआर सुरेश ने यह सवाल पूछा है। क्या भारत की उग्रवाद विरोधी रणनीति की समीक्षा होनी चाहिए। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल 'सीआरपीएफ' को परिवर्तित किया जाना चाहिए और सशस्त्र बलों को उनके प्राथमिक कार्य करने के लिए मुक्त कर देना चाहिए। इस सवाल का जवाब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिया है। इससे पहले मार्च में सीआरपीएफ के 83वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि हो सकता है जम्मू-कश्मीर में कुछ वर्षों में सीआरपीएफ की जरूरत ना पड़े।

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राज्यसभा में 'सीआरपीएफ' को लेकर पूछा गया ये सवाल 
संसद सदस्य केआर सुरेश ने सात दिसंबर को राज्यसभा में जो सवाल पूछा है, उसमें तीन बातें शामिल हैं। उन्होंने पूछा, क्या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे, क्या सरकार इस विचार से सहमत है कि भारत की उग्रवाद विरोधी रणनीति की समग्र समीक्षा होनी चाहिए। सीआरपीएफ को परिवर्तित किया जाना चाहिए और सशस्त्र बलों को उनके प्राथमिक कार्य करने के लिए मुक्त कर देना चाहिए। दूसरा, यदि हां तो सरकार द्वारा इस दिशा में कौन कौन से कदम उठाए जाने का प्रस्ताव है। तीसरा, यदि नहीं तो इसके क्या कारण हैं। 
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गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिया ऐसा जवाब
नित्यानंद राय ने तीनों सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती हैं। सरकार, केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती समेत विभिन्न उपायों के माध्यम से कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने और विधिविरुद्ध क्रियाकलापों की रोकथाम करने में राज्य सरकारों के प्रयासों में सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। लोक व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और उग्रवाद की रोकथाम से संबंधित मामले में राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के अंतर्गत सिविल प्रशासन को सहायता प्रदान करने के लिए सीआरपीएफ की तैनाती की जाती है। 
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बलों को विशेष क्षेत्र से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है 
नित्यानंद राय ने कहा कि आंतरिक उपद्रवों वाले विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में सीआरपीएफ की तैनाती की जाती है, जिसके लिए नए भर्ती कार्मिकों को क्षेत्र विशेष से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए 'पूर्व समावेशन प्रशिक्षण विषय' निर्धारित किए गए हैं, ताकि उन्हें संबंधित क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करने के लिए शारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार किया जा सके। साथ ही उनकी ऑपरेशनल कार्य कुशलता को बढ़ाया जा सके। सीआरपीएफ सहित सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों 'सीएपीएफ' को मजबूत बनाना एक सतत प्रक्रिया है। सरकार विभिन्न उग्रवाद एवं कानून और व्यवस्था की स्थितियों से निपटने के लिए आश्यकतानुसार कदम उठाती है। 


कश्मीर में खत्म हो रहा आतंकवाद: अमित शाह   
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई अवसरों पर कह चुके हैं कि देश में उग्रवाद और नक्सलवाद की घटनाएं तेजी से कम हो रही हैं। उन्होंने जम्मू में सीआरपीएफ के स्थापना दिवस पर कहा था कि हो सकता है, जम्मू-कश्मीर में कुछ वर्षों में सीआरपीएफ की जरूरत ना पड़े। 1990 में पूर्वोत्तर में उग्रवाद और कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अपने चरम पर था। कश्मीर की स्थिति से हर कोई चिंतित था। पिछले दो दशकों में सीआरपीएफ ने कश्मीर में जो लड़ाई लड़ी है, वह आसान नहीं थी। कश्मीर में आतंकवाद अब खत्म होने जा रहा है। शांति बहाल करने में सीआरपीएफ जवानों की अहम भूमिका है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो, कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद हो या पूर्वोत्तर में उग्रवादी ताकतें, सीआरपीएफ ने ऐसे समूहों को खत्म कर शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश में कहीं भी दंगा होता है तो सीआरपीएफ को भेजा जाता है। राज्यों के मुख्यमंत्री ऐसे मामलों में उनसे सीआरपीएफ को भेजने का आग्रह करते हैं। 2009 में वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं की संख्या 2,258 थी। गत वर्ष यह संख्या घटकर 509 रह गई है। 2019 के बाद वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में तेजी से कमी आई है। ऐसी घटनाओं में 2009 के दौरान 1,005 लोग मारे गए थे, जबकि 2021 में 147 लोग मारे गए हैं।

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