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CRPF: शौर्य चक्र विजेता को हरियाणा सरकार नहीं दे रही पूरी सम्मान राशि, देने थे 31 लाख, मिले मात्र 7 लाख रुपये

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 17 Nov 2022 03:41 PM IST
सार

CRPF: जिले सिंह ने 2017 में अपनी टीम के साथ लेथपोरा के सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। अपने 12 साथियों की रक्षा करने के लिए उन्हें 'शौर्य' चक्र प्रदान किया गया था। सम्मान राशि के लिए सीआरपीएफ की ओर से हरियाणा सरकार को पत्र लिखा गया, लेकिन मामला अधर में लटका है...

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CRPF: Haryana government is not giving full amount to Shaurya Chakra awardee
CRPF Assistant Commandant Zile Singh - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ', जिसके ग्राउंड कमांडरों का खौफ 'आतंकियों और माओवादियों' में साफ देखा जा सकता है, उसी के एक शौर्य चक्र विजेता को हरियाणा सरकार से तय सम्मान राशि नहीं मिल रही है। हरियाणा सरकार, शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपये देती है। हालांकि सरकार इस पॉलिसी को केवल सैनिक के लिए लागू कर रही है। गुरुग्राम जिला निवासी, सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए। जिले सिंह ने 2017 में अपनी टीम के साथ लेथपोरा के सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। दहशतगर्दों का खात्मा और अपने 12 साथियों की रक्षा करने के लिए उन्हें 'शौर्य' चक्र प्रदान किया गया था। जिले सिंह की सम्मान राशि के लिए सीआरपीएफ की ओर से हरियाणा सरकार को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक मामला अधर में लटका है। बताया जा रहा है कि पिछले छह माह से सहायक कमांडेंट जिले सिंह की सम्मान राशि से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी है।

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ऑपरेशन में मारे गए 'जैश ए मोहम्मद' के तीन आतंकी

सहायक कमांडेंट जिले सिंह ने दक्षिण कश्मीर रेंज में बतौर क्यूएटी ऑप्स कमांडर, पांच साल तक ड्यूटी की है। दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया गया। उन्होंने आतंकियों का खात्मा करने वाले कई बड़े अभियानों में हिस्सा लिया है। 2017 में सीआरपीएफ के लेथपोरा कैंप पर जब आतंकियों ने हमला किया, तो जिले सिंह और उनकी टीम ने बहादुरी से उनका मुकाबला किया। वहां पर सीआरपीएफ के दर्जनभर जवान, आतंकियों के निशाने पर थे। लगभग 36 घंटे तक चले ऑपरेशन में जैश के तीन आतंकी मारे गए। वहां मौजूद सीआरपीएफ जवानों की हिफाजत के लिए जिले सिंह ने रूम इंटरवेंशन किया। उन्होंने चौथी मंजिल पर पहुंचकर एक आतंकी को मार गिराया। बाकी बचे दो दहशतगर्दों को भी इसी तरह ठिकाने लगाया गया। दक्षिण कश्मीर के अवंतीपुरा के गांव बेईघबोरा में, सुरक्षा बलों की जिस टीम ने मोस्ट वांटेड आतंकी रियाज नायकू को मार गिराया था, उस ऑपरेशन में भी सहायक कमांडेंट जिले सिंह की खास भूमिका रही। इस ऑपरेशन में आर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस व सीआरपीएफ शामिल थी। इसके अतिरिक्त सहायक कमांडेंट जिले सिंह ने ऐसे ही दर्जनों ऑपरेशन में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया था।

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शौर्य चक्र एक है तो सम्मान राशि में भेदभाव क्यों

आर्मी या सीएपीएफ में शौर्य चक्र विजेता को संबंधित राज्य की सरकार भी निर्धारित सम्मान राशि प्रदान करती है। जिले सिंह बताते हैं, यह राशि सभी प्रांतों में एक जैसी नहीं होती। राजस्थान में ऐसे बहादुरों को 25 बीघा जमीन तक दी जाती रही है। बाद में उस जमीन की कीमत के हिसाब से पैसे मिलने लगे। हरियाणा सरकार, शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपये देती है। इस मामले में सरकार ने सात लाख रुपये देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। अगर सेना के किसी जवान को यह सम्मान मिलता है, तो उसे तुरंत 31 लाख रुपये की राशि प्रदान कर दी जाती है। अगर सीएपीएफ में शौर्य चक्र मिलता है, तो उसे सात लाख रुपये दे देते हैं। सम्मान राशि में भेदभाव का यह केस स्थानीय नेताओं से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक भी पहुंचा है, लेकिन अभी तक मामला नहीं निपट सका। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने भरोसा दिया था कि जिले सिंह को उनका पूरा हक मिलेगा। सीआरपीएफ के डीआईजी बीएस नेगी ने 2020 में इस संबंध में तत्कालीन मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा को पत्र लिखा था। इसके अलावा भी कई बार पत्राचार हो चुका है। कई बार रिमाइंडर भेजा गया है। बतौर जिले सिंह, मौजूदा मुख्य सचिव के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया है। अब बताया जा रहा है कि छह माह से सम्मान राशि की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी है।

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