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CRPF: बॉस की विदाई परेड पर क्यों याद आए पूर्व DG दुर्गा प्रसाद, जिन्होंने फेयरवेल न लेकर बचाए थे करोड़ों रुपए

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 25 Dec 2024 07:35 PM IST
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सार
CRPF:  'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव के मुताबिक, एक तरफ सीआरपीएफ डीजी की विदाई परेड पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वार्षिक मेले आयोजन की मंजूरी नहीं दी जा रही।
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CRPF former DG Durga Prasad saved crores of rupees by not taking a farewell
सीआरपीएफ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीआरपीएफ डीजी अनीश दयाल सिंह, 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। उन्हें भव्य विदाई देने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। गुरुग्राम में स्थित सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर पर डीजी की फेयरवेल परेड के लिए बल की विभिन्न इकाइयों से जवान और अधिकारी गुरुग्राम पहुंच चुके हैं। तीन सप्ताह से बल कार्मिक, डीजी की विदाई परेड की तैयारी कर रहे हैं। फुल ड्रेस रिहर्सल 29 दिसंबर को होगी। 'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, इस प्रकार के आयोजनों में करोड़ों रुपए का खर्चा आता है, जो केंद्र सरकार की नीति के एकदम विपरीत है। ऐसे आयोजनों से बचा जा सकता है। इसे चलते जवानों की छुट्टियों की प्लानिंग पर असर पड़ता है। इस अनावश्यक खर्च को दूसरे कल्याणकारी कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जा सकता है। रणबीर सिंह ने पूर्व डीजी के. दुर्गाप्रसाद का जिक्र करते हुए बताया, 2017 में उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में आयोजित विदाई सम्मान परेड में शामिल होने से मना कर दिया था। उन्होंने 'बल की सुविधा को ध्यान में रखते हुए' विदाई सम्मान परेड के आयोजन में जाना उचित नहीं समझा। 


'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव के मुताबिक, एक तरफ सीआरपीएफ डीजी की विदाई परेड पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वार्षिक मेले आयोजन की मंजूरी नहीं दी जा रही। सीआरपीएफ डीजी अनीश दयाल सिंह, जो 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनके सम्मान में विदाई परेड समारोह का भव्य आयोजन किया जाएगा। रणबीर सिंह ने कहा, इस प्रकार के आयोजनों में करोड़ों रुपए का खर्चा आता है। इससे किसी का फायदा नहीं होता। ये केंद्र सरकार की खर्च घटाओ नीति के खिलाफ है। 'सीआरपीएफ' के महानिदेशक के. दुर्गा प्रसाद ने 28 फरवरी 2017 को अपनी सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में की जा रही विदाई सम्मान परेड में शामिल होने से मना कर दिया था। उनका कहना था, सीआरपीएफ जवान, चुनावी ड्यूटी, प्राकृतिक आपदा, नक्सलवाद, आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों व दूसरी तरह की ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं, ये मेरे लिए सम्भव नहीं है कि मैं विदाई परेड में हिस्सा लूं।  


बतौर रणबीर सिंह, के. दुर्गा प्रसाद ने खुद अपने शब्दों में कहा था कि उन्होंने 'बल की सुविधा को ध्यान में रखते हुए' विदाई सम्मान परेड में जाना उचित नहीं समझा। पूर्व डीजी ने एक मिसाल कायम की थी। इस साल 20 अक्टूबर को डीजी सीआरपीएफ व अन्य फोर्सेस हेडक्वार्टर को ईमेल कर हर साल आयोजित किए जाने वाले वाले वार्षिक मेले को फिर से शुरू करने के लिए निवेदन किया गया था। एसोसिएशन के पत्राचार के जवाब में डीजी सीआरपीएफ द्वारा मेले के आयोजन पर असहमति जताते हुए कहा गया कि इससे जवानों की परिचालन व्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त जवानों के आवागमन के कारण बल पर वित्तीय भार बढ़ता है। 

एसोसिएशन के अनुसार, कोविड महामारी के चलते इस तरह के वार्षिक मेले के आयोजनों को सुरक्षा बलों द्वारा रद्द कर दिया गया था। वार्षिक मेले आयोजनों के सम्बन्ध में सीआरपीएफ के 
पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, आम पब्लिक में इस प्रकार के आयोजनों से फोर्स की छवि में इजाफा होता है। साथ ही बल की विभिन्न यूनिटों द्वारा लाए गए अलग-अलग राज्यों के उत्पादों की खरीदारी से बटालियन कैंटीन फंड में इजाफा होता है। मेले के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पैरामिलिट्री परिवार आनंद ले सकते थे। दूसरी तरफ डीजी की भव्य विदाई समारोह परेड पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। महानिदेशालय प्रांगण में विदाई समारोह का आयोजन कर अनावश्यक खर्चों से बचा जा सकता है। पहले भी इस प्रकार के आयोजन महानिदेशालय प्रांगण में आयोजित किए जाते रहे हैं। उसमें चायपान के अलावा कोई खास खर्चा नहीं होता। 

मौजूदा डीजी अनीश दयाल सिंह की फेयरवेल परेड की तैयारी एक माह पहले प्रारंभ कर दी गई थी। इस बार फेयरवेल परेड में 6 कन्टिन्जन्ट 7/7 ब्लॉक फोरमेशन में हिस्सा लेंगे। परेड में कुल 12 सहायक कमांडेंट, 36 एसओ और 408 अन्य रैंक के कार्मिक रहेंगे। इस तरह से सीआरपीएफ डीजी की विदाई परेड में कुल 456 अधिकारी व जवान हिस्सा ले रहे हैं। बल के पूर्व अफसरों का कहना है, ऐसी फेयरवेल परेड का खर्च करोड़ों रुपया आता है। डीजी की फेयरवेल परेड के लिए सभी जवानों और अफसरों को दो दिसंबर से पहले जीसी गुरुग्राम में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। सीआरपीएफ अधिकारी, एसओ और अन्य रैंक वाले कर्मी, जिनकी लंबाई 180 सैंटीमीटर होगी, वे ही फेयरवेल परेड में शामिल होंगे। 

परेड में हिस्सा लेने वाले सहायक कमांडेंट, एसओ और सिपाही, इनकी आयु 30 वर्ष से कम आयु होनी चाहिए। हवलदार की आयु चालीस वर्ष से कम हो। इनका वजन, हाइट के मुताबिक रहे। जो भी महिला अधिकारी, एसओ और अन्य रैंक में शामिल महिलाएं, फेयरवेल परेड में हिस्सा लेंगी, उनकी हाइट 162 सैंटीमीटर होनी चाहिए। परेड में हिस्सा लेने वाली महिला सहायक कमांडेंट, एसओ और सिपाही, इनकी आयु 30 वर्ष से कम आयु होनी चाहिए। इनके अलावा परेड में हिस्सा लेने वाले हवलदार की आयु 40 वर्ष से अधिक न हो। शरीर का वजन, उनकी हाइट के अनुसार रहे। 
नवंबर 2023 में सीआरपीएफ के महानिदेशक सुजॉय एल. थाउसेन की फेयरवेल परेड की तैयारी शुरु हो गई थी। फेयरवेल परेड 30 नवंबर को गुरुग्राम में स्थित ग्रुप सेंटर पर आयोजित हुई थी।

सीआरपीएफ में जंगल वॉरफेयर के एक्सपर्ट 'कोबरा' कमांडो को डीजी की फेयरवेल परेड में शामिल होने के लिए कहा गया। खास बात है कि उस वक्त वे कमांडो छुट्टी पर थे। मुख्यालय द्वारा कहा गया कि उन्हें छुट्टी से वापस बुलाया जाए। तब कोबरा सेक्टर हेडक्वार्टर के अधिकारी ने आईजी ट्रेनिंग 'मुख्यालय' से आग्रह किया था है कि कोबरा कमांडो को उनके तय लीव शेड्यूल से बीच में बुला लेना ठीक नहीं होगा। इससे उनके मनोबल पर बुरा असर पड़ सकता है। कोबरा विंग के अधिकारी ने आईजी ट्रेनिंग से पूछा था, क्या कमांडो को 15 अक्तूबर की बजाए, 25 अक्तूबर तक बुलाया जा सकता है। सीआरपीएफ के ट्रेनिंग मुख्यालय ने आदेश दिया था कि 15 अक्तूबर तक कोबरा दस्ते को एकत्रित करें, ताकि वे डीजी को सलामी दे सकें। 

सीआरपीएफ कुलदीप सिंह की फेयरवेल के लिए भी गुरुग्राम में जोरशोर से तैयारी की गई थी। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2022 को खत्म हुआ था। गुरुग्राम स्थित बल के ग्रुप सेंटर पर फेयरवेल परेड के लिए विभिन्न हिस्सों से लगभग 900 जवानों और अधिकारियों ने एक सितंबर से पहले ही गुरुग्राम में रिपोर्ट किया था। फेयरवेल परेड में कुल आठ कंटिंजेंट ने '9/9 ब्लॉक फॉरमेशन में हिस्सा लिया था। बल के सैंकड़ों अधिकारी भी ग्रुप सेंटर पर पहुंचे थे। सीआरपीएफ के पूर्व अफसर कहते हैं, ये आयोजन मोदी सरकार की खर्च घटाओं नीति को झटका देता है। डीजी की विदाई पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। ये पैसा किसी रचनात्मक कार्य पर खर्च नहीं हो रहा। फेयरवेल परेड में बल के अफसरों और जवानों का समय व्यर्थ होता है। सीआरपीएफ, देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात है और ऑपरेशनल ड्यूटी पर जवानों की कमी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में डीजी विदाई परेड का आयोजन समझ से परे है। इतने अफसरों और जवानों के आवागमन व अन्य व्यवस्थाओं पर आने वाले करोड़ों के व्यय का भार सीआरपीएफ द्वारा ही वहन किया जाएगा। ये खर्च, बल की किसी न किसी मद में गलत तरीके से ही जुड़ेगा। 
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