सीआरपीएफ: कैडर अफसरों के लिए खुशी की खबर, डीजी कुलदीप सिंह बोले- बढ़ेंगे पद, अच्छा आएगा समीक्षा का रिजल्ट
डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, बल के पूर्व योद्धाओं के कल्याण के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू की गई हैं। शहीदों के परिवारों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए नोडल अधिकारी लगाए गए हैं। बल के अस्पतालों में पूर्व जवानों या अधिकारियों के आश्रित अपना प्राथमिक इलाज करा सकते हैं। बल के ऑफिसर मैस और हॉलिडे होम में पूर्व अधिकारी रह सकते हैं...
विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में कैडर अधिकारियों के लिए खुशी की खबर है। बल के डीजी कुलदीप सिंह ने कहा है कि इस बार की कैडर समीक्षा रिपोर्ट का रिजल्ट अच्छा आएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे गए फाइनल प्रपोजल में विभिन्न स्तरों पर पढ़ बढ़ाने की बात कही गई है। इसका फायदा ग्राउंड कमांडरों एवं दूसरे कैडर अधिकारियों को होगा। इससे उनके प्रमोशन संबंधी दिक्कतों का समाधान होने की उम्मीद है।
शुक्रवार को वसंत कुंज स्थित शौर्य सीआरपीएफ अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दूसरे 'सीआरपीएफ वेटरन डे' पर डीजी कुलदीप सिंह ने यह बात कही है। बल के पूर्व योद्धाओं ने अपनी अन्य मांगों के अलावा 'प्रमोशन' की मौजूदा व्यवस्था को लेकर जब अपनी नाराजगी जताई, तो डीजी कुलदीप सिंह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, कैडर रिव्यू प्रपोजल भेज दिया गया है। इसके लिए बल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंथन किया गया है। सीआरपीएफ में कैडर अधिकारियों के लिए एडीजी का एक पद स्वीकृत है। ग्राउंड कमांडरों से 'आईजी/एडीजी' रैंक दूर होता जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में हालत यह हो चली है कि कैडर अधिकारियों की पहली पदोन्नति में 12 से 15 साल लग रहे हैं। इससे उनके करियर पर विपरित असर पड़ रहा है। कैडर अफसरों को समय पर प्रमोशन न मिलने के कारण वे जॉब छोड़ रहे हैं, कोर्ट में भी इस तरह के केस पहुंचे हैं।
के. विजय कुमार ने बल के लिए दिए सुझाव
केंद्रीय गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के पद की जिम्मेदारी संभाल रहे के. विजय कुमार जो कि सीआरपीएफ के डीजी रहे हैं, ने वेटरन डे पर बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कहा, इस बल को 25-30 वर्ष में बहुत से नए बदलाव करने होंगे। सीआरपीएफ, दुनिया के बेहतरीन सुरक्षा बलों में शुमार है। इस बहुआयामी बल ने नक्सल, आतंक, कानून व्यवस्था और निष्पक्ष एवं शांतिपूर्व चुनाव सहित कई दूसरे मोर्चों पर खुद को साबित कर दिखाया है। कश्मीर और उत्तर-पूर्व में जहां पर ये बल तैनात है, वहां अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर लगने के कारण चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बल ने अति सराहनीय कार्य किया है। अभी बहुत कुछ सुधार की गुंजाइश है। आजकल की लड़ाई में तकनीक का अहम रोल है। दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग तरीके से इसका इस्तेमाल देखने को मिल रहा है। सीआरपीएफ को इस बारे में सोचना चाहिए। बल को 'आईटी' मोर्चे पर आगे ले जाना होगा।
ड्रोन, डिजिटल तकनीक और एआई पर काम करना जरुरी
पूर्व डीजी के. विजय कुमार ने कहा, वार जोन में आजकल कई सारी नई तकनीक आ गई हैं। आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), किसी भी सैन्य ऑपरेशन का मुख्य हिस्सा बन जाएगी। इसके अलावा ड्रोन और डिजिटल माध्यम भी सुरक्षा बलों की नियमित ट्रेनिंग का हिस्सा बनता जा रहा है। बल को डिजिलट तकनीक से जोड़ना होगा। हर जवान के स्वास्थ्य की जानकारी एक प्लेटफार्म पर रहे। ट्रेनिंग को भी इसी पैटर्न पर आगे बढ़ाना पड़ेगा। कोविड में बहुत कुछ सीखने को मिला है। जवानों को नए तौर तरीकों की ट्रेनिंग के लिए फिज़िकल व्यवस्था का इंतज़ार नहीं कराना चाहिए।
डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, बल के पूर्व योद्धाओं के कल्याण के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू की गई हैं। शहीदों के परिवारों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए नोडल अधिकारी लगाए गए हैं। बल के अस्पतालों में पूर्व जवानों या अधिकारियों के आश्रित अपना प्राथमिक इलाज करा सकते हैं। बल के ऑफिसर मैस और हॉलिडे होम में पूर्व अधिकारी रह सकते हैं। उन्हें वहां पर वाहन की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। पूर्व अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि बल की बेहतरी के लिए कई अहम कमेटियों में वेटरन को शामिल किया जाए।