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Gujarat: 'डंपिंग साइट पर मिले गायों के शव पशु बाड़े में रखे गए मवेशियों के नहीं,' नगर निकाय ने कोर्ट को बताया

Tue, 19 Dec 2023 07:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 19 Dec 2023 07:35 PM IST
सार

Gujarat: नडियाद नगर निकाय ने एक हलफनामे में कहा कि दो दिसंबर को डंपिंग साइट का निरीक्षण किया गया था। इसमें  जांच करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि मवेशियों के शव 20-22 दिन पुराने थे।

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Cow carcasses found at dumping site not of animals kept in cattle pound: Civic body tells Guj HC
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात उच्च न्यायालय को मंगलवार को बताया गया कि नडियाद जिले में एक डंपिंग साइट पर पाए गए तीस से ज्यादा गायों और अन्य जानवरों के शव कई दिन पुराने हैं। इन्हें आवारा मवेशियों की समस्या को रोकने की राज्य सरकार की नीति के तहत नहीं बरामद किया गया है। 

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न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री और न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मवेशियों की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिका में अदालत के आदेश की अवमानना के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को तीस गायों की मौत के बारे में बताया गया था। इन मृत गायों को कथित तौर पर बरामद किया गया था और एक पशु बाड़े में रखा गया था। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक सुविधा के लिए निर्दोष जानवरों की बलि नहीं दी जा सकती है। इसने स्थानीय प्रशासन से एक रिपोर्ट मांगी थी। 

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नगर निकाय ने दाखिल हलफनामा
नडियाद नगर निकाय के मुख्य अधिकारी रुद्रेश हुदाद ने एक हलफनामे में कहा कि दो दिसंबर को डंपिंग साइट का निरीक्षण किया गया था, जिस दिन अखबार में खबर प्रकाशित हुई थी। इसमें कहा गया है कि शारीरिक जांच करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि शव 20-22 दिन पुराने थे और घटनास्थल पर गाय, भैंस, गधे आदि सहित 35-40 जानवरों के कंकाल अवशेष थे। 

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'केवल सात मवेशियों की मौत हुई'
हलफनामे में कहा गया है, 'नडियाद शहर या आसपास के गांवों के पशुपालकों से किसी भी चोरी या किसी भी बीमारी के फैलने के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली, जिसके परिणामस्वरूप कम समय में बड़ी संख्या में जानवरों की अचानक मौत हो सकती थी।' इसमें कहा गया है कि अखबार की खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी। केवल सात मवेशियों की मौत हुई, जिन्हें जब्त किया गया और डंपिंग साइट पर पाए गए जानवरों कंकाल पशु बाड़े में रखे गए जानवरों के नहीं थे। पुलिस उपाधीक्षक विमल बाजपेयी ने एक अन्य हलफनामे में कहा कि पशु बाड़े में मरने वाली सात गायों का शवदाह नियमित प्रक्रिया के तहत किया गया।

अदालत ने दिया रिपोर्ट पेश करने का आदेश
अदालत ने अधिकारियों को जांच करने और नडियाद निवासी मौलिक श्रीमाली द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया था। इसके बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। जिसमें मवेशियों के खतरे को रोकने के लिए एक जनहित याचिका में अदालत के आदेश की अवमानना की मांग की गई थी। हलफनामे में श्रीमाली ने कहा था कि तीस गायों की मौत के बारे में एक खबर पढ़ने के बाद उन्होंने ने करीब 30 गायों के शवों को देखा, जिन्हें काटकर जमीने के खुले हिस्से में फेंक दिया गया है। यह नडियाद नगर निगम की जमीन है। 

अवमानना मामले पर 21 दिसंबर को सुनवाई
राज्य सरकार ने इससे पहले अदालत को बताया था कि उसने आठ नगर निगमों और 157 नगर पालिका क्षेत्रों में आवारा पशुओं के खतरे को रोकने के लिए 21 अगस्त 2023 को एक परिपत्र जारी किया है, जिसमें सभी शहरी निकायों को इसका पालन करने का निर्देश दिया गया है। मंगलवार को याचिकाकर्ता मुस्ताक हुसैन कादरी ने अहमदाबाद शहर में यातायात के मुद्दों को लेकर अपनी जनहित याचिका में एक और अवमानना याचिका दायर की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 दिसंबर की तारीख तय की है।

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