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Politics: 'मनुवाद-जातिवाद खत्म करने से ही होगा देश का विकास', कर्नाटक में खरगे बोले- अंबेडकर के रास्ते पर चलें

Wed, 22 Apr 2026 06:17 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Wed, 22 Apr 2026 06:17 PM IST
सार

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बीदर में कहा कि धर्म इंसानों के कल्याण के लिए बनाए गए हैं, न कि इंसान धर्म के लिए। उन्होंने मनुवाद और जातिवाद का विरोध किया। खरगे ने समाज में बढ़ते अंधविश्वास पर चिंता जताई और कहा कि बुद्ध, अंबेडकर और कबीर जैसे महापुरुषों के दिखाए रास्ते पर चलकर ही समाज का भला हो सकता है।

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countrys development achieved only by eradicating Manuvad casteism Kharge says Follow path of Ambedkar
मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक के बीदर जिले में आयोजित एक भव्य धार्मिक और सामाजिक समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने धर्म और मानवता के रिश्तों पर बड़ी बात कही है। उन्होंने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि धर्म का अस्तित्व इंसान की भलाई के लिए है, न कि इंसान का जन्म धर्म की सेवा के लिए हुआ है। खरगे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धर्म और आस्था को लेकर कई तरह की बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने समाज में एकता और भाईचारे पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि जब तक हम एक मानव समुदाय के रूप में एकजुट नहीं होंगे, तब तक प्रगति संभव नहीं है।
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धर्म और मानवता पर क्या बोले खरगे?
बीदर जिले के भालकी में हिरेमठ संस्थान के डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के 75वें जन्मोत्सव (अमृत महोत्सव) के अवसर पर बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि धर्म की आवश्यकता मानवता के उत्थान के लिए होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर किसी को एक मानव समुदाय के रूप में एकजुट होना चाहिए। इंसान धर्म के लिए पैदा नहीं हुआ है; बल्कि धर्मों का निर्माण मानव जाति के कल्याण के लिए किया गया है। खरगे ने आगाह किया कि जब तक समाज इस बुनियादी सच्चाई को नहीं समझेगा, तब तक हम वास्तविक विकास के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ पाएंगे। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और राज्यपाल थावरचंद गहलोत भी मौजूद थे।
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समाज सुधारक बसवण्णा के योगदान पर भी बोले
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में 12वीं सदी के महान समाज सुधारक बसवण्णा के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि बसवण्णा ने उस दौर की सामाजिक बुराइयों जैसे 'मनुवाद' और 'चातुर्वर्ण्य' व्यवस्था को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। खरगे ने कहा कि बसवण्णा ने सभी जातियों के लोगों को एकजुट करके एक "नई सामाजिक व्यवस्था" की नींव रखी थी। उन्होंने 'अनुभव मंटप' की स्थापना की थी, जिसे दुनिया की पहली आध्यात्मिक संसद माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि बसवण्णा ने एक पिछड़े समुदाय से आने वाले अल्लामा प्रभु को इस संसद का प्रमुख बनाया था, जो सामाजिक समानता का सबसे बड़ा उदाहरण है।


बुद्ध की शिक्षाओं को लेकर खरगे ने क्या चिंता जताई?
कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत में बौद्ध धर्म के इतिहास का उदाहरण देते हुए एक महत्वपूर्ण चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म कभी भारत और इसकी सीमाओं के बाहर व्यापक रूप से प्रचलित था, लेकिन समय के साथ इसे अपने ही जन्म स्थान (भारत) में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खरगे ने कहा, "बसवण्णा की शिक्षाओं के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें उनकी विचारधारा और दर्शन को लगातार बढ़ावा देना चाहिए ताकि समाज में समानता बनी रहे।" उन्होंने खुद को बुद्ध, बसवण्णा, अंबेडकर, नारायण गुरु और कबीर का अनुयायी बताते हुए कहा कि ये सभी मानवतावादी विद्वान थे जिन्होंने समाज कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

समाज की कुरीतियों पर बोलना मुश्किल- खरगे
भाषण के दौरान खरगे ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास पर भी अपनी बात रखी, लेकिन एक राजनेता की सीमाओं का जिक्र करना भी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि समाज में अंधविश्वास बहुत फैला हुआ है, लेकिन एक राजनेता होने के नाते वे कुछ बातों को खुलकर नहीं कह सकते। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "अगर मैं कुछ कहता हूँ, तो वह खबर बन जाती है। अक्सर मैं जो कहता हूं और जो अखबारों या टीवी पर दिखाया जाता है, वह अलग होता है। इसलिए मैं इस विषय पर ज्यादा नहीं बोलूंगा।" उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे राजनीति और सामाजिक सुधारों के बीच एक महीन रेखा होती है।


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