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Cough syrups controversy: कफ सिरप विवाद में सक्रिय हुईं सभी राज्य सरकारें, दवाओं के नमूने लेने में जुटी टीमें

Thu, 13 Oct 2022 03:25 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 13 Oct 2022 03:25 PM IST
सार

Cough syrups controversy: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक ने स्थानीय जांच के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में उत्पादन संबंधी गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है...

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Cough syrups controversy: state governments teams engaged in taking samples of medicines
Cough syrups controversy - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश में कफ सिरप विवाद के गहराने पर राष्ट्रीय औषधि नियामक और हरियाणा राज्य औषधि नियंत्रक ने मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में विनिर्माण संबंधी सभी गतिविधियों पर बुधवार को रोक लगा दी। इसी बीच कफ सिरप के कारण गांबिया में मौत की खबर के बाद कई राज्यों के खाद्य एवं औषधि आयुक्तों की कार्रवाई में भी तेजी दिखने लगी है। वे राज्यों में मौजूद विभिन्न ब्रांडों के कफ सिरप का नमूना बाजार से एकत्रित कर उनकी जांच में जुट गए हैं। मामले की गंभीरता देख दक्षिण भारत के राज्य भी इसमें सक्रिय हो गए हैं। टीमें स्टॉक में मौजूद दवाओं के नमूने लेंगी। जांच के नतीजों के बाद कार्रवाई की जाएगी।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक ने स्थानीय जांच के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में उत्पादन संबंधी गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस बीच कफ सिरप के कारण मौत की खबर फैलने के बाद कई राज्यों के खाद्य एवं औषधि आयुक्तों की कार्रवाई में भी तेजी दिखने लगी है। वे विभिन्न ब्रांडों के कफ सिरप के नमूने बाजार से एकत्रित कर उनकी जांच कर रहे हैं।
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दरअसल, पिछले सप्ताह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गाम्बिया में हुई 66 बच्चों की मौत का संबंध मेडन फार्मा के सोनीपत संयंत्र में बने कफ सिरप से होने की बात कही थी। उसके बाद से ही मेडन फार्मा सुर्खियों में आ गई और उसकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक सह लाइसेंसिंग अधिकारी ने 7 अक्तूबर को औषधि विनियम, 1945 के नियम 85 (2) के तहत एक कारण बताओ नोटिस जारी कर कंपनी से पूछा है कि उसके विनिर्माण लाइसेंस को क्यों न निलंबित अथवा रद्द कर दिया जाए। कंपनी को सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है और यदि ऐसा नहीं किया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कफ सिरप में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री प्रोपिलीन ग्लाइकोल के इनवॉइस से बैच संख्या, मियादी एवं विनिर्माण की तारीख, विनिर्माता के नाम आदि गायब थे।

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विशेषज्ञ समिति गठित

निरीक्षण में अधिकारियों ने पाया कि मेडेन फार्मा ने डाई एथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल के लिए प्रोपिलीन ग्लाइकोल की गुणवत्ता जांच भी नहीं कराई थी। कंपनी दवाओं के विनिर्माण एवं जांच से संबंधित उपकरणों की कार्यपुस्तिका को प्रस्तुत करने में भी विफल रही। इधर, केंद्र सरकार ने डब्ल्यूएचओ द्वारा दी गई जानकारी के संबंध में खामियों की जांच एवं विश्लेषण करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। इमसें स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन के वाइस चेयरपर्सन डॉ. वाईके गुप्ता, पुणे के आईसीएमआर के एनआईवी डॉ. प्रयाग डी यादव, नई दिल्ली के एनसीडीसी के महामारी विज्ञान विभाग की डॉ. आरती बहल और सीडीएससीओ के संयुक्त औषधि नियंत्रक एके प्रधान शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि यही समिति सीडीएससीओ को आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह देगी।


एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मेडन फार्मा के कफ सिरप के 23 नमूनों का परीक्षण किया गया जिसमें से चार नमूनों में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा पाई गई। 'डब्ल्यूएचओ ने अभी विश्लेषण प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है। उसने कहा है कि जल्द ही उसे उपलब्ध कराया जाएगा।' उन्होंने कहा कि सीडीएससीओ द्वारा इस संबंध में दो बार आग्रह किए जाने के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने बच्चों की मौत का एक-एक कर सटीक कारण उपलब्ध नहीं कराया है।

राज्यों के एफडीए सक्रिय

कफ सिरप में विषैले पदार्थों का डर फैलने के साथ ही राज्यों के एफडीए की सक्रियता बढ़ गई है। कफ सिरप में जहरीले अथवा दूषित पदार्थों की मौजूदगी की जांच के लिए उन्होंने बाजार से सभी ब्रांडों के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। मेडन फार्मा को चार कफ सिरप के केवल निर्यात के लिए लाइसेंस दिए गए थे। कंपनी का कहना है कि उन दवाओं को भारत में नहीं बेचा गया है।



राज्य सरकारों ने सभी अपने फील्ड अफसरों को कफ सिरप के नमूने जुटाने के लिए कहा है। एहतियात के तौर पर सभी ने मेडन फार्मा की दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। स्टॉक में मौजूद दवाओं के नमूने लिए जा जाएंगे और जांच के नतीजों के बाद कार्रवाई की जाएगी। पिछले नौ महीनों में कम से कम 5 ऐसे मौके थे, जब कंपनी की बनाई टाइप-2 मधुमेह की दवा और दुकान पर बेची जाने वाली दर्द निवारक दवाओं को जांच के दौरान घटिया पाया गया। इनमें मेटोमिन टैबलेट के नमूने शामिल थे।

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