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CoronaVirus से मुकाबले के लिए इन तीन वॉर रूम्स में बन रही रणनीति, धुरी है पीएमओ

Thu, 26 Mar 2020 08:22 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 26 Mar 2020 08:22 PM IST
सार

  • तालमेल के साथ रात-दिन हो रहा है काम
  • पी के मिश्रा, अजय भल्ला और प्रीति सूदन संभाले हैं कमान
  • राज्यों को भी भेजी जाती है तीनों वॉर रूम की सलाह
  • लॉकडाउन उल्लंघन पर दो तरह से ली जाती है रिपोर्ट
  •  डब्लूएचओ की रिपोर्ट की समीक्षा अलग से होती है

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coronavirus india live update: PMO, home and health ministry working together to control infection
Social Distancing in Union Cabinet meeting - फोटो : PTI (File)

विस्तार

कोरोना को हराने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृहमंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय समेत करीब दर्जन भर सरकारी विभाग इस अभियान में जी जान से जुटे हैं। तीन कार्यालय विशेष वॉर रूम के तौर पर काम कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री कार्यालय प्रतिदिन कोरोना पर अपडेट, संभावित तैयारी, खतरे की समीक्षा कर रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सभी राज्यों में सुरक्षा और स्थिति का जायजा ले रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन की टीम स्वास्थ्य विभाग तथा एजेंसियों से लगातार अपडेट लेने में व्यस्त है।

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वायरस की चैन तोड़कर ही पाया जा सकता है काबू

विशेषज्ञ लगातार दोहरा रहे रहे हैं वायरस की मानव-संपर्क चेन तोड़कर ही इसके संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यही वजह है कि भारत समेत दुनिया के तमाम देश लॉकडाउन जैसी पद्धति को अपना रहे हैं।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय इस लॉकडाउन को सफल बनाने के हर स्तर के प्रयास में जुटा है। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय इसके साथ-साथ लॉकडाउन के कारण जनता को होने वाली परेशानियों की समीक्षा तथा इसके उपायों पर जोर दे रहा है।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने खुद इसकी कमान संभाल रखी है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय समेत अन्य को भी इसके बाबत आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके लिए यहां रात-दिन काम हो रहा है।

इस तरह एक दूसरे से जुड़े रहते हैं ये वार रूम...

प्रधानमंत्री कार्यालय के वॉर रूम की कमान पीएम के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा के हाथ में है। वे ही प्रधानमंत्री को हर अपडेट देते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के वॉर रूम हेड की जिम्मेदारी गृहसचिव अजय भल्ला निभा रहे हैं। तीसरा वॉर रूम स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव प्रीति सूदन की देखरेख में काम कर रहा है।

संयुक्त सचिव लव अग्रवाल प्रेस से बात कर रहे हैं और वही लगातार स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कर रहे हैं। मंत्रालय के निदेशक रवींद्रन भी लगातार लव अग्रवाल के साथ सक्रिय हैं। देश में अगर कोरोना का एक भी नया केस सामने आता है तो उसकी केस हिस्ट्री जरूर पूछी जाती है।

वहां के इलाके या किसी एक विशेष परिसर को कैसे सैनिटाइज करना है, इस बाबत दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं। हालांकि ये निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय का वॉर रूम जारी करता है, लेकिन बाकी के दोनों वॉर रूम तक उसी वक्त वह जानकारी पहुंचाई जाती है।
 
पीएमओ में बने वॉर रूम और बाकी के दोनों वॉर रूम में यह फर्क होता है कि पीएमओ अपने स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सेवाएं ले लेता है। जैसे कोई वैज्ञानिक स्वास्थ्य क्षेत्र में, खासतौर पर महामारी जैसे विषय पर काम कर रहा है तो उसकी सलाह लेकर योजना बनाई जाती है।

दवा, मास्क और दूसरे उपकरण, जिनकी मदद से कोरोना को मात दी जा रही है, उसके लिए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों से कुछ नया करने के लिए कहा जाता है। जैसे मास्क और दूसरे उत्पाद, जिनके रेट अचानक बढ़ने लगते हैं, इनका विकल्प तलाशा जाता है। सोशल मीडिया पर लोगों के कैसे सुझाव आ रहे हैं, उनकी कोई परेशानी है, इस पर भी पीएमओ का वॉर रूम बराबर नजर रखता है।

तीनों वॉर रूम की सलाह राज्यों को भेजी जाती है

लॉकडाउन का उल्लंघन, मास्क और सुरक्षा बल, इस पर तीनों वॉर रूम की सलाह राज्यों को भेजी जाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का वॉर रूम भी हर समय काम करता रहता है। विभिन्न राज्यों में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, उस बाबत रोजाना किसी न किसी राज्य के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होती है।

लॉकडाउन के उल्लंघन  बाबत दो तरह से रिपोर्ट ली जाती है। एक तो संबंधित राज्य अपनी रिपोर्ट भेजता है और दूसरा, गृह मंत्रालय आईबी के जरिए हर इलाके की विशेष रिपोर्ट तैयार कराता है। देश में कोरोना का संक्रमण कहां पर सबसे ज्यादा बढ़ सकता है, स्वास्थ्य मंत्रालय से यह रिपोर्ट हासिल उसे संबंधित राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेज दिया जाता है।

अगर लॉकडाउन उल्लंघन के मामले ज्यादा आ रहे हैं तो ऐसी स्थिति में गृह सचिव उस राज्य के मुख्य सचिव के साथ फोन पर बातचीत करते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि कहां पर कितने क्वारंटीन सेंटर बनाने हैं।
 
पीएमओ की तरफ से कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, स्वास्थ्य सचिव, विदेश सचिव, एनडीएमए, सुरक्षा बल एवं वित्तीय विभाग से जुड़े अधिकारियों से लगातार रिपोर्ट मांगी जाती है। इस रिपोर्ट को पीएमओ अपने विशेषज्ञों की मदद से क्रॉस चैक करता है।

इसमें कई तरह के सवाल होते हैं जैसे कोरोना का संक्रमण कब तक कितना फैल सकता है, संबंधित इलाके में लॉकडाउन पीडियड का कितना पालन हो रहा है। वहां पर स्वास्थ्य सेवाओं का ग्राफ कैसा है।

WHO की रिपोर्ट का अलग से अध्ययन

डब्लूएचओ की तरफ से कोरोना को लेकर भारत के संदर्भ में जारी की गई रिपोर्ट की अपने विशेषज्ञों से पड़ताल कराई जा रही है। वहां से क्या एडवायजरी जारी हुई है और देश में स्वास्थ्य मंत्रालय उसे लेकर क्या कहता है, इन सब बातों पर पीएमओ के वॉर रूम में चर्चा की जाती है।

अगर किसी राज्य में कोरोना का संक्रमण बढ़ने की कोई खास वजह है तो उस पर तीनों वॉर रूम एक साथ चर्चा करते हैं। इसमें संबंधित राज्य के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को भी शामिल किया जाता है।

जैसे डब्लूएचओ द्वारा कोरोना को लेकर यह बयान जारी किया गया कि इसे खत्म करने के लिए लॉकडाउन ही काफी नहीं है। इसके बाद तीनों वॉर रूम में चर्चा की गई। इस तरह की बातचीत में स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों की भूमिका ज्यादा रहती है।



हालांकि इसमें बाहर से भी विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाता है। कोरोना की स्थिति पर गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी रोजाना विभिन्न राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हैं। यहां की हर रिपोर्ट पीएमओ को भेजी जाती है। वहां से किसी भी विभाग के लिए जो इनपुट आता है, उसे उक्त दोनों वॉर रूम के साथ साझा किया जाता है।

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