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केरल में कोरोना: कम से कम तीन नमूनों में मिला कोविड-19 का डेल्टा प्लस वेरिएंट
Tue, 22 Jun 2021 02:27 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 22 Jun 2021 02:27 AM IST
सार
केरल में पिछले 24 घंटे के दौरान 77,853 नमूनों की जांच की गई और राज्य में अब तक कुल दो करोड़ 20 लाख 39 हजार 227 नमूनों की जांच की जा चुकी है। इनमें से कम के कम तीन नमूनों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। राज्य में फिलहाल 99,693 मरीज उपचाराधीन हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
केरल में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमण के कम से कम तीन मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि राज्य के पलक्कड़ और पतनमतिट्टा जिले से जमा किए गए नमूनों में से कम से कम तीन नमूनों में डेल्टा प्लस वेरिएंट पाया गया है। बता दें कि राज्य में सोमवार को कोरोना वायरस के कुल 7499 नए मामले सामने आए। राज्य में कोरोना के कुल मामलों की संख्या अब 28 लाख 16 हजार 893 हो गई है।
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इसके साथ ही सोमवार को राज्य में कोरोना के चलते 94 और मरीजों की मौत हो गई। प्रदेश में कोरोना की वजह से अब तक कुल 12,154 लोग जान गंवा चुके हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बीमारी से एक दिन में ठीक होने वालों की संख्या संक्रमण के दैनिक नए मामलों से ज्यादा रही। सोमवार को 13,596 लोग बीमारी से ठीक हुए, जिसके बाद अब तक ठीक हो चुके मरीजों की संख्या अब 27 लाख चार हजार 554 हो गई है।
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डेल्टा स्वरूप अभी चिंताजनक नहीं: केंद्र
बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15 जून को कहा था कि कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस स्वरूप अभी तक चिंताजनक नहीं है और देश में इसकी मौजूदगी का पता लगाना होगा और उस पर नजर रखनी होगी। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने इसे लेकर कहा था कि डेल्टा प्लस नामक वायरस का नया स्वरूप सामने आया है और यह यूरोप में मार्च महीने से है। कुछ दिन पहले ही इसके बारे में जानकारी सार्वजनिक हुई।
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डॉ. पॉल ने कहा था, इसे अभी चिंताजनक प्रकार के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। चिंता वाला स्वरूप वह होता है जिसमें हमें पता चले कि इसके प्रसार में बढ़ोतरी से मानवता के लिए प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। डेल्टा प्लस के बारे में अब तक ऐसा कुछ ज्ञात नहीं है। लेकिन इसके प्रभाव और बदलाव के बारे में हमें वैज्ञानिक तरीके से नजर रखनी होगी। वायरस के इस प्रकार का पता लगाना होगा और देश में इसकी मौजूदगी देखनी होगी।