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कोरोना वायरस: रेड जोन में 33 और ऑरेंज में रहती है देश की 43 प्रतिशत आबादी

Sat, 02 May 2020 11:03 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 02 May 2020 11:03 AM IST
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coronavirus 130 districts in red 284 districts in orange 319 districts are in green zone home ministry containment
तापमान जांचते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

देश के 130 जिले जो रेड जोन में आते हैं वहां लगभग 33 प्रतिशत (2011 की जनगणना के अनुसार) आबादी रहती है। वहीं 284 जिले ऑरेंज जोन में हैं जहां 43 प्रतिशत आबादी रहती है और 319 जिले ग्रीन जोन में हैं। यहां 44 प्रतिशत की आबादी रहती है।

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महाराष्ट्र की 17 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश की 16 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल की 12 प्रतिशत आबादी रेड जोन में रहती है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रीन जोन ऐसे क्षेत्र हैं जहां पिछले 21 दिनों से एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। पहले यह समयसीमा 28 दिन थी। 
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रेड जोन को सक्रिय कोविड-19 मामलों की कुल संख्या, पुष्टि किए गए मामलों की दोहरीकरण दर, परीक्षण और निगरानी प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए परिभाषित किया गया है। नए वर्गीकरण का मतलब यह है कि कुछ जिले जहां 14 दिनों से एक भी मामला सामना नहीं आया है, उन्हें अभी भी रेड जोन की सूची में ही रखा गया है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि यह विचार मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि रोकने के लिए है। उन्होंने कहा, 'पहले हमारे पास इन वर्गीकरणों को लेकर केवल दो मानदंड थे, कुल मामले और दोहरीकरण दर। लेकिन जैसे ही मामले बढ़े, ठीक होने की दर में बदलाव आया, नमूने लेने की आवश्यकता बढ़ी हमने मानदंडों में बदलाव किया।'

उन्होंने कहा, 'मानदंड अधिक व्यापक, बहु-तथ्यात्मक होने चाहिए ताकि हस्तक्षेप के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की जाए। जिससे भविष्य में किसी भी जोन में कोई समस्या न आए। इस तरह से हमने रेड और ऑरेंज जोन की व्याख्या की है। ऐसे मामलों को कम करना जरूरी है जो कल किसी जिले के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।'


अग्रवाल ने कहा, 'सक्रिय और कठोर नियंत्रणों के जरिए वायरस के प्रसार की श्रृंखला को हर तरह से तोड़ना महत्वपूर्ण है ताकि यह जिले से बाहर न जा सके। हालांकि, कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहर यह संभव है कि कुछ रियायत दी जा सकती है जिसे कि गृह मंत्रालय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अधिसूचित कर सकता है।'

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