टीकाकरण : 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं, लेकिन गंभीर संक्रमण से होता है बचाव
- टीकाकरण से सेहत को किसी तरह का नुकसान मापने के लिए बनाई गई एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) समिति के अनुसार भारत में अब तक 180 लोगों की मौत टीकाकरण के बाद हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रो. पुरी और डॉ. धीमान की तरह ही सैकड़ों लोगों को टीका लगने के बाद संक्रमण हुआ है, लेकिन इसे टीकाकरण की विफलता की तरह देखने की जरूरत नहीं है।
विशेषज्ञों और खुद इन चिकित्सकों के अनुसार उन्हें टीके नहीं लगे होते तो बहुत संभव है कि वे भी गंभीर रूप से बीमार होते या फिर अस्पताल में भर्ती करवाए जाते। टीकाकरण के बाद हुआ संक्रमण बेहद हल्के किस्म का है, जिसे आसानी से ठीक किया जा रहा है।
केस स्टडी 1
केजीएमयू लखनऊ के वीसी प्रो. बिपिन पुरी को कोविड-19 टीके का दूसरा डोज लेने के 11 दिन बाद कोरोना हुआ। यह बहुत हल्के किस्म का था, प्रो. पुरी के अनुसार वे गंभीर रूप से संक्रमित होने से बच गए, क्योंकि टीका ले चुके थे।
केस स्टडी 2
एसजीपीजीआई लखनऊ के ही निदेशक डॉ. आरके धीमान और उनकी पत्नी टीके की दोनों डोज ले चुके थे। फिर भी मार्च के आखिरी सप्ताह में संक्रमित मिले। वे बताते हैं कि संक्रमण हल्का था, टीका लगने की वजह से अस्पताल में भर्ती होने से बच गए।
कोई भी टीका 100 फीसदी बचाव नहीं करता
कोई भी टीका बीमारी से 100 फीसदी बचाव नहीं करता, लेकिन यह बीमारी की चपेट में आने की आशंका 80 से 90 प्रतिशत तक कम करता है। बचे हुए लोग भी गंभीर संक्रमण के शिकार नहीं हो रहे। बेहद दुर्लभ या अपवाद छोड़ दें तो किसी को न अस्पताल जाने की जरूरत पड़ रही है न कोई और जटिलता पेश आ रही है।
- टीकाकरण से सेहत को किसी तरह का नुकसान मापने के लिए बनाई गई एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) समिति के अनुसार भारत में अब तक 180 लोगों की मौत टीकाकरण के बाद हुई है। 617 मामलों में गंभीर संक्रमण पाया गया। करीब 6 प्रतिशत आबादी को टीकाकरण के बाद मिले यह मामले बेहद दुर्लभ कहे जा सकते हैं।
विश्वभर में ‘ब्रेक-थ्रू’ मामले...अमेरिका के संक्रमण व एलर्जी रोग संस्थान के निदेशक एंथनी फौसी ने हाल में बयान दिया कि जब लाखों करोड़ों लोगों को टीका लगता है तो कुछ मामलों में फिर से संक्रमण होने की आशंका बनी रहती है। इन्हें ‘ब्रेक-थ्रू’ केस माना जाता है, जहां वायरस टीकाकरण को भी तोड़कर संक्रमित करने में कामयाब रहा। लेकिन, इनमें बेहद कम मामले ही गंभीर संक्रमण के होते हैं।
इसलिए होता है ब्रेक-थ्रू...पर, 90 फीसदी तक बचाव
वजह कई बार टीका ठीक ढंग से न लग पाना, टीके का उचित तापमान पर न होना, हाथ पर गलत हिस्से में लगना, आदि हो सकती हैं। कई बार टीके के डोज की मात्रा कम रहने जैसे मानवीय भूल भी हो सकती है, जैसा फरवरी में अमेरिका के मैसाचुसेट्स में हुआ।
- लंबे समय दवाओं पर जी रहे लोगों का रोग प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है, उनमें टीका देने के बाद मजबूत प्रतिरोधक क्षमता बनना मुश्किल होता है। अधिक उम्र व अानुवांशिक कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं। लेकिन यह सारी वजहें बेहद दुर्लभ मामलों में होती हैं। अमेरिका और यूरोप के अधिकतर विशेषज्ञ पुख्ता निष्कर्ष देते हैं कि टीका लगने के बाद 90 प्रतिशत तक लोगों को संक्रमण नहीं होगा।
जब तक बड़ा म्यूटेशन नहीं, पूरी सुरक्षा
विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस अपना रूप बदल रहा है, लेकिन फिलहाल इतना बदलाव नहीं हुआ कि पूरा टीकाकरण बेकार साबित हो। यह अपने स्पाइक प्रोटीन के जरिए फैल रहा है और मौजूदा टीके इसी को बेकार करने के लिए बनाए गए हैं। जब तक वायरस अपनी इस मूल संरचना में बदलाव नहीं कर लेता टीकाकरण से बने एंटीबॉडी उससे निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं।