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कोरोना महामारी: देश में आधिकारिक तौर पर सिर्फ आंध्र प्रदेश ने माना, ऑक्सीजन की कमी से हुईं मौतें
Thu, 12 Aug 2021 06:41 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 12 Aug 2021 06:41 AM IST
सार
- आधिकारिक तौर पर पहली बार किसी राज्य ने दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन संकट के चलते मौतें कुबूली
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ऑक्सीजन सिलेंडर (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में पहली बार किसी राज्य ने मरीजों की मौतें स्वीकार की हैं। आंध्र प्रदेश ने बीते नौ अगस्त को जानकारी दी है कि उनके यहां एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई है।
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राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि आंध्र प्रदेश के वेंकटेश्वर रामानारायण रूइया अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि ऑक्सीजन की कमी के चलते इसका प्रेशर कम करना पड़ा जिसके चलते गंभीर मरीजों की मौत हो गई। इससे पहले अमर उजाला ने 11 अगस्त को खुलासा किया था कि 12 राज्यों ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत होने की बात से साफ इनकार कर दिया था।
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जबकि पंजाब सरकार ने चार संदिग्ध मौतें बताई थीं। अब आंध्र प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जिसने आधिकारिक तौर पर उन मौतों को स्वीकारा है जो अप्रैल से मई माह के दौरान दूसरी लहर में हुई थीं। इतना ही नहीं देश की दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार अब तक इन मौतों की सच्चाई पता कराने और एलजी द्वारा समिति को भंग किए जाने का दावा कर रही थी लेकिन बीते मंगलवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यहां तक कह दिया कि उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
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दिल्ली के दो निजी अस्पतालों ने हाईकोर्ट में 50 से अधिक मौतों की दी जानकारी
दिल्ली के ही दो बड़े अस्पताल बत्रा और जयपुर गोल्डन में 50 से अधिक मरीजों की मौत ऑक्सीजन कम होने से हुई थी। इस बारे में अस्पताल ने न सिर्फ सरकार बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट में भी लिखित जानकारी दी थी। दोनों ही अस्पताल के मुख्य अधिकारी बयान दे चुके हैं कि जब उनके यहां ऑक्सीजन की कमी हुई तो बार बार जिला प्रशासन और सरकार की ओर से गठित ऑक्सीजन सेल की ओर से टैंकर पहुंचने की बात कही जा रही थी लेकिन कई घंटों तक जब टैंकर अस्पताल नहीं पहुंचा तो कई मरीजों ने आईसीयू में ही दम तोड़ दिया।
राज्यों ने नहीं रखा मौताें का हिसाब, सही आंकड़ा मिले कैसे
नई दिल्ली। कोरोना महामारी को लेकर सरकारी आंकड़े शुरुआत से ही सवालों के कठघरे में हैं। दावे और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर रहता है। राज्यों ने मौतों का हिसाब-किताब ही नहीं रखा, तो सही जानकारी मिलेगी कहां से। केंद्र सरकार की 168 टीमों ने सभी राज्यों के लेखा-जोखा में खामियां बताई हैं, जिनमें न सिर्फ संक्रमित मामले बल्कि कोरोना से हुईं मौतों की जानकारी न दर्ज करना भी शामिल है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात 168 टीमों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि इन प्रदेशों में कोविड-19 से जुड़े सरकारी दस्तावेजों में सुधार की आवश्यकता है। यहां संक्रमण से हुईं मौतों का सही ऑडिट होना जरूरी है। साथ ही होम आइसोलेशन में मरने वालों को लेकर भी स्पष्टीकरण जरूरी है। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय ने भी सभी राज्याें को पत्र लिख डेथ ऑडिट पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया।
72 घंटे में हुई मौतों का ब्याेरा भेजना जरूरी : होम आइसोलेशन और अस्पताल में भर्ती होने के 72 घंटे के दौरान हुई मौतों का ब्यौरा जिलेवार भेजने का नियम है, लेकिन सभी राज्य सिर्फ दिन भर में हुई मौतों का आंकड़ा ही केंद्र के साथ साझा कर रहे हैं। ये मौतें कहां और कैसे हुई? इसकी अधिकांश जानकारी मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है। ब्यूरो