Corona Alert: 24 घंटे के भीतर ओमिक्रॉन दूसरे लोगों को कर रहा संक्रमित, अल्फा-डेल्टा के मुकाबले नजर नहीं आ रहे लक्षण
विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन मुताबिक लक्षण रहित व्यक्ति से भी कोरोना फैलने का खतरा उतना ही रहता है, जितना कि किसी लक्षण वाले व्यक्ति से रहता है। ऐसे में लोगों को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद तुरंत टेस्ट करवाना चाहिए...
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देश और दुनिया में ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए दिखाई दे रहे है। ओमिक्रॉन कोरोना वायरस के पिछले वैरिएंट डेल्टा की तुलना में कई गुना तेजी से फैल रहा है और लोगों को संक्रमित कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति पिछले वैरिएंट्स की तुलना में जल्दी कोरोना स्प्रेडर बन रहे हैं। ऐसे संक्रमित लोगों को कोरोना फैलाने के लिए काफी कम समय लग रहा है। ओमिक्रॉन इन्फेक्टेड व्यक्ति 24 घंटे के अंदर ही वायरस फैलाने का काम कर रहे है। जबकि डेल्टा समेत अन्य वैरिएंट्स में कोरोना स्प्रेडर बनने में दो से चार दिन का समय लगता था।
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि अमेरिकी रिसर्च में सामने आया है कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति लक्षण उभरने से कुछ दिन पहले और समाप्त होने के कुछ दिन बाद तक कोरोना संक्रमण तेजी से फैलता था। जबकि नया वैरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति एक दिन के अंदर ही कोरोना संक्रमण फैलाने लगता है। ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति में लक्षण तीन दिन के अंदर ही उभरने लगते हैं जबकि इस वैरिएंट से संक्रमित होने के एक दिन के अंदर व्यक्ति अन्य लोगों को संक्रमित करने लगता है।
डॉक्टरों ने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के ज्यादा संक्रामक होने का कारण उसका इन्क्यूबेशन पीरियड है। किसी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित आदमी के संपर्क में आने और लक्षण पैदा होने के बीच के समय को इन्क्यूबेशन पीरियड कहा जाता है। डेल्टा वैरिएंट्स का इन्क्यूबेशन पीरियड चार दिन और अल्फा का पांच दिन था। वहीं माना जा रहा है कि ओमिक्रॉन का इन्क्यूबेशन पीरियड घटकर तीन दिन रह गया है। इसलिए यह तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है और लोग दूसरे दिन ही पॉजिटिव हो रहे हैं। जब किसी वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड छोटा होता है, तो उसके उतनी ही तेजी से संक्रामक बनने की संभावना बनी रहती है और वो वायरस उतनी ही तेजी से महामारी को फैलता है।
ओमिक्रॉन के अधिकांश मरीज लक्षण रहित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, रिसर्च में यह भी सामने आया है कि ओमिक्रॉन के अधिकतर मरीज लक्षण रहित हैं, यानी उनमें संक्रमण के बावजूद लक्षण पैदा नहीं हो रहे हैं। लक्षण रहित लोगों में वायरल लोड या उसका लेवल कम होता है। ऐसे में ये स्पष्ट नहीं है कि वे कितनी जल्दी कोरोना फैलाने वाले बनते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन मुताबिक लक्षण रहित व्यक्ति से भी कोरोना फैलने का खतरा उतना ही रहता है, जितना कि किसी लक्षण वाले व्यक्ति से रहता है। ऐसे में लोगों को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद तुरंत टेस्ट करवाना चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव आने वाले लक्षण रहित लोगों को भी खुद को सात दिन तक आइसोलेट करना चाहिए। तीन दिन लगातार बुखार नहीं आने पर ऐसे लोगों का आइसोलेशन खत्म माना जाएगा।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क के बाद तुरंत कराएं टेस्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से जुड़े लक्षण उभरने पर फौरन टेस्ट कराना चाहिए। इसके लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना ज्यादा सही है क्योंकि लैब में किए जाने वाले परीक्षण वायरस की पहचान करने में ज्यादा संवेदनशील होते हैं और इनमें वायरस को पहचानने की क्षमता अधिक होती है। अगर किसी व्यक्ति ने अपना एक टेस्ट करा लिया है तो आपको दूसरा टेस्ट कराने से पहले कम से कम पांच दिन तक इंतजार करना चाहिए।