SII: 'सीरम के खिलाफ पोस्ट अपमानजनक, तुरंत हटाएं', सोशल मीडिया पर किए दावे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के खिलाफ पोस्ट की गई सामग्री प्रथम दृष्टया अपमानजनक है।
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के खिलाफ पोस्ट की गई सामग्री प्रथम दृष्टया अपमानजनक है। कोर्ट ने इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। यह पोस्ट दो व्यक्तियों और उनके संगठनों की ओर से किया गया था। न्यायमूर्ति आरआई चागला की एकल पीठ ने भी अस्थायी रूप से कंपनी के खिलाफ कोई सामग्री पोस्ट करने से भी रोक दिया।
पोस्ट में क्या?
जानकारी के मुताबिक, योहान टेंगरा और उसके संगठन अनार्की फॉर फ्रीडम इंडिया और अंबर कोइरी और उसके संगठन अवेकन इंडिया मूवमेंट की तरफ से सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया था कि सीरम की कोरोना रोधी वैक्सीन कोविशील्ड लाखों लोगों की मौत का कारण बनी है। दोनों ने अपने पोस्ट में सीरम और उसके सीईओ और मालिक अदार पूनावाला को अपराधी और हत्यारा बताया था। यह भी कहा गया था कि कंपनी को बंद कर दिया चाहिए और पूनावाला को जेल में डाल देना चाहिए। दिसंबर 2022 में दायर मामले में सीरम ने 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि एसआईआई और उसके सीईओ व मालिक अदार पूनावाला को तो लाखों लोगों की जान बचाने वाला माना जाता है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि वादी के टीके ने भारत में 40 लाख लोगों को जान बचाई। पीठ ने कहा कि यह जरूरी था कि टेंगरा और कोइरी ने जो आरोप लगाए हैं उसके समर्थन में सबूत पेश करते।
बिना शर्त माफी मांगें प्रतिवादी
पीठ ने आगे कहा कि एसआईआई ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिवादियों की तरफ से लगाए गए आरोप मानहानिकारक हैं। इसलिए उन्हें सोशल मीडिया से संबंधित सामग्री हटाने और मानहानिकारक सामग्री को निराधार, गलत और अनुचित बताते हुए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया जाता है। पीठ ने यह भी कहा कि अदालत 100 करोड़ रुपये के कंपनी के मानहानि के दावे पर आगे सुनवाई करेगी।