Politics: 'हमारी अपनी विदेश नीति के पतन की दुखद कहानी', पाकिस्तान के UNSC समिति की अध्यक्षता करने पर कांग्रेस
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पाकिस्तान को इतनी अहम जिम्मेदारी मिलना हमारी विदेश नीति की विफलता को दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि दुनिया आतंक को बढ़ावा देने वाले देश को इतनी अहम जिम्मेदारी कैसे दे सकती है।
विस्तार
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक प्रमुख समिति की अध्यक्षता करने और एक अन्य समिति का उपाध्यक्ष बनने पर चिंता जताई। साथ ही पार्टी ने इसे भारत की विदेश नीति के पतन की दुखद कहानी बताया। हालांकि, कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया कि वैश्विक समुदाय आतंकवाद समर्थक पाकिस्तान को इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे सौंप सकता है।
पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। गुयाना और रूस इस समिति के उपाध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे। यह समिति उन व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं की आर्थिक संपत्ति फ्रीज करने, यात्रा और हथियारों पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले लेती है, जो अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा माने जाते हैं। यह जिम्मेदारी मिलने के बाद पाकिस्तान अब तालिबान प्रतिबंध समिति से जुड़ी बैठकों की अध्यक्षता करेगा, सिफारिशें तैयार करेगा और सदस्यों के बीच सहमति बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा पाकिस्तान को आतंकवाद रोधी समिति (1373 काउंटर टेररिज्म कमेटी) का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है।
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पवन खेड़ा ने वैश्विक समुदाय से पूछा सवाल
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 9 मई को पाकिस्तान को 1 बिलियन अमेरीकी डॉलर दिए। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इसके बाद विश्व बैंक ने पाकिस्तान को 40 बिलियन डॉलर देने का फैसला किया और तीन जून को एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने पाकिस्तान को 800 मिलियन डॉलर दे दिए। उन्होंने कहा कि इसके तुरंत बाद चार जून को पाकिस्तान को यूएनएससी तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष और यूएनएससी आतंकवाद निरोधक समिति का उपाध्यक्ष चुना गया। खेड़ा ने कहा, 'बेशक, यह हमारी अपनी विदेश नीति के पतन की दुखद कहानी है, लेकिन वैश्विक समुदाय पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के प्रायोजन को लगातार वैध बनाने की अनुमति कैसे दे सकता है?'
'1988 समिति' के तौर पर भी जानी जाती है तालिबान प्रतिबंध समिति
तालिबान प्रतिबंध समिति को '1988 समिति' के तौर पर भी जाना जाता है। पहले यह समिति आईएसआईएल और अल-कायदा से जुड़े आतंकियों की निगरानी करती थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को तालिबान पर प्रतिबंध लगाने वाली समिति की कमान मिलने के बाद अगर वह तालिबान के खिलाफ सख्त एक्शन लेता है तो इससे उसके संबंधों पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब वह तालिबान से संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है।
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भारत 2021-22 के कार्यकाल के दौरान UNSC में एक अस्थायी सदस्य के रूप में आतंकवाद विरोधी समिति का अध्यक्ष रहा है। भारत ने बार-बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया है कि पाकिस्तान एक ऐसा देश हैं, जहां सबसे ज्यादा संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी और प्रतिबंधित संगठन मौजूद हैं। यह भी याद दिलाया गया कि अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन भी पाकिस्तान में छिपा था और 2011 में अमेरिका ने उसे वहीं मारा था।
फिलहाल UNSC में पांच देश स्थायी सदस्य
फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच देश स्थायी सदस्य हैं। इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इसके अलावा, 10 अस्थायी सदस्य हैं, जिनमें अल्जीरिया, डेनमार्क, ग्रीस, गुयाना, पाकिस्तान, पनामा, दक्षिण कोरिया, सिएरा लियोन, स्लोवेनिया और सोमालिया शामिल हैं।
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