फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Congress raises question on 9000 horsepower locomotive engine plant

Congress: इस लोकोमोटिव इंजन प्लांट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, पूछा- मैन्युफैक्चरिंग होगी या सिर्फ असेंबली?

Mon, 23 Jun 2025 05:23 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 23 Jun 2025 05:23 PM IST
सार

गत 26 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के दाहोद में 9,000 हॉर्स पावर का लोकोमोटिव इंजन के प्लांट का उद्घाटन किया था। यह प्लांट, सीमेंस के साथ एक समझौते के तहत बनाया गया है। कांग्रेस पार्टी को इस करार के बारे में और इस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ चिंताएं हैं।

विज्ञापन
Congress raises question on 9000 horsepower locomotive engine plant
कांग्रेस नेता ब्रिजेंद्र सिंह - फोटो : एक्स- कांग्रेस

विस्तार

कांग्रेस पार्टी के नेता एवं पूर्व लोकसभा सांसद ब्रिजेन्द्र सिंह ने गुजरात के दाहोद में 9,000 हॉर्स पावर वाले लोकोमोटिव इंजन के प्लांट पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सोमवार को कांग्रेस हेडक्वार्टर में आयोजित एक प्रेसवार्ता में कहा, यह प्लांट, सीमेंस के साथ एक समझौते के तहत बनाया गया है। इसमें सिमंस के साथ जो कॉन्ट्रैक्ट हुआ है, वह करीब 26,000 करोड़ रुपये का है। इसे डॉलर टर्म्स में कहें तो 3.2 बिलियन डॉलर्स का है।  इसकी मियाद करीब 11 साल की है। इसमें 1,200 यूनिट्स लोकोमोटिव इंजन का निर्माण किया जाएगा। ब्रिजेन्द्र सिंह ने कहा, यहां पर 26,000 करोड़ रुपये में लोकोमोटिव इंजन की मैन्युफैक्चरिंग होगी या सिर्फ असेंबली। जो मैन्युफैक्चरिंग ऑफ क्रिटिकल पार्ट्स हैं, वे सीमेंस की अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में तैयार होंगे, उनकी अपनी फैक्ट्रीज में होंगे। 
विज्ञापन


बतौर कांग्रेस नेता ब्रिजेंद्र सिंह, गत 26 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के दाहोद में 9,000 हॉर्स पावर का लोकोमोटिव इंजन के प्लांट का उद्घाटन किया था। यह प्लांट, सीमेंस के साथ एक समझौते के तहत बनाया गया है। कांग्रेस पार्टी को इस करार के बारे में और इस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ चिंताएं हैं। यह मामला बिडिंग प्रोसेस से जुड़ा हुआ है। इसके अंदर जिस प्रकार की ट्रांसपेरेंसी, पारदर्शिता है, उसमें कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट, प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। बड़ी पिक्चर यदि देखें तो पूरा 'मेक इन इंडिया' का जो एक ध्येय है भारत सरकार का, उसके ऊपर कुछ सवालिया निशान लगते हैं। 
विज्ञापन


दिसंबर 2022 में भारत सरकार द्वारा एक विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया था कि 26,000 करोड़ का लेटर ऑफ अवार्ड सीमेंस के साथ हुआ है। इसमें टेक्नोलॉजिकल पार्टनर होंगे और उसमें यह बताया गया था कि लोकोमोटिव इंजंस का जो पूरा मैन्युफैक्चरिंग है, वो दाहोद में होगा। 1,200 यूनिट्स जो बनने थे, उनकी दाहोद में मैन्युफैक्चरिंग होगी। उसका उत्पादन दाहोद में होगा। दाहोद का प्लांट, दो-ढाई साल में बनकर तैयार हो जाएगा। रेलवे का स्टाफ, उसके जो इंजीनियर्स हैं, अधिकारी हैं, कर्मचारी हैं, खासतौर पर जो इंजन मैन्युफैक्चरिंग है, उसकी ट्रेनिंग वगैरह और उसका मेंटेनेंस वो इंडियन रेलवेज के जो चार मेंटेनेंस डिपो हैं, विशाखापट्टनम, रायगढ़, पुणे और खड़गपुर में, वहां पर किया जाएगा। दाहोद एक एडवांस्ड इंजीनियरिंग हब के रूप में उभर के सामने आएगा। वजह, सारी मैन्युफैक्चरिंग वहां पर होगी। स्वाभाविक सी चीज है कि इतना बड़ा प्लांट यदि लगेगा तो हजारों नौकरियां उसके साथ आएंगी। उसके साथ एक स्पिन ऑफ इफेक्ट है, एंसिलरी यूनिट्स वगैरह जो हैं, वो भी उसके माध्यम से जुड़ेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्रिजेंद्र सिंह ने कहा, अब जो तस्वीर सामने आई है, वह कुछ और दर्शा रही है। तस्वीर यह आई है कि जिस मेक इन इंडिया या मेक इन गुजरात का यहां पर लोगों को आश्वासन दिया गया था, वैसा कुछ नहीं है। दाहोद के प्लांट में मैन्युफैक्चरिंग के नाम पर सिर्फ असेंबली है। मतलब, बने बनाए पुर्जे या मशीनरी जो है, उसको इकट्ठा करके उनको जोड़ने का काम है। उसकी टेस्टिंग है और कमीशनिंग है। कमीशनिंग मतलब, जब बनकर तैयार हो जाएगा, तो वहां से वो कमीशन हो जाएगा। जो असली मैन्युफैक्चरिंग है क्रिटिकल कंपोनेंट्स की, चाहे वो इंजन सिस्टम्स हो या पावर कन्वर्टर्स हो या और जो इस तरह की चीजें, जो इन लोकोमोटिव्स में जाती हैं, वो सारी की सारी सीमेंस के अपने प्लांट में तैयार होंगी। ये प्लांट नासिक, औरंगाबाद और मुंबई में हैं। मैन्युफैक्चरिंग ऑफ क्रिटिकल पार्ट्स, सीमेंस की अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में तैयार होंगे। रेलवे के इंजीनियर्स को जो ट्रेनिंग दी जानी थी, इंजन मैन्युफैक्चरिंग के अंदर जो इनको इन्वॉल्व किया जाना था, वो अब किस हिसाब से होगा या नहीं होगा, उसके ऊपर भी एक पूरा सवालिया निशान इस माध्यम से लग जाता है। 

इसे स्क्रू ड्राइवर टेक्नोलॉजी भी कह सकते हैं। उन्होंने एपल के बारे में बताते हुए कहा कि एपल के प्लांट लग गए हैं। अब जो मोबाइल फोन्स हैं, हमारे यहां उनकी मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। इस केस में भी सिर्फ असेंबली हो रही है, मैन्युफैक्चरिंग नहीं। दाहोद में सरकार की खुद की विज्ञप्ति थी, उसमें जो क्लेम किया गया था, दावा किया गया था, वैसा न होकर यहां पर भी सिर्फ असेंबली और टेस्टिंग के लिए यह प्लांट बनाया गया है। 26,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया जाना, आज तक यह स्पष्टता नहीं है कि इसके बिडिंग प्रोसेस में कौन-कौन शामिल हुए थे। इस क्षेत्र में जो बड़े-बड़े प्लेयर्स हैं, वो इसमें इनवॉल्वड थे या नहीं। यदि मैं जिक्र करूं तो बॉम्बार्डियर है या आल्सटॉम है। क्या वे भी इसके अंदर पार्टिसिपेंट थे। उन्होंने भी क्या अपनी बिड दी थी। आल्सटॉम का इंडियन रेलवे के साथ करीब 100 साल का संबंध है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स हैं, जो उन्होंने इंडियन रेलवे के साथ हिंदुस्तान में इंप्लीमेंट किए हैं। 

क्या इस तरह की कंपनी, वो भी इस बिडिंग प्रोसेस का हिस्सा थीं या नहीं थीं। भारत सरकार ने दिसंबर 2022 में अपनी विज्ञप्ति में जो बातें कहीं थीं, क्या उनमें बदलाव कर सीमेंस के बेनिफिट के लिए काम किया गया है। क्या टर्म्स एंड कंडीशंस में बदलाव किया गया है। 

भारत की तरफ से इंडियन रेलवे ही है, जो इस कॉन्ट्रैक्ट में सीधे-सीधे इन्वॉल्व है, लेकिन उनकी सहमति थी, नहीं थी और थी तो किस कारण की वजह से थी। इन सब से जुड़ा हुआ प्रश्न जो आगे आता है, वो है कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का। ब्रिजेंद्र सिंह ने कहा, मौजूदा रेल मंत्री, राजनीति में आने से पहले कुछ साल कॉर्पोरेट सेक्टर में रहे हैं। उनका एक काम जो उन्होंने प्राइवेट सेक्टर किया, वो बहुत बड़े स्तर पर उच्च अधिकारी के तौर पर रहा है। वे सीमेंस लोकोमोटिव इन इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट डेजिग्नेशन थे। यह सिर्फ संयोग है या कुछ और कि सीमेंस को भारतीय रेल का आज तक के इतिहास का सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट 26,000 करोड़ रुपये का, उस समय में मिलता है, जिस समय देश के रेल मंत्री एक ऐसे व्यक्ति हैं जो सीमेंस लोकोमोटिव्स इन इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट रहे हों। बड़ा सीधा-सीधा प्रथम दृष्ट्या एक कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट इसके अंदर कहीं नजर आता है। मेक इन इंडिया, का जो एक कांसेप्ट है, उसे 'असेंबल इन इंडिया' तक सीमित कर दिया गया है। कांग्रेस पार्टी की मांग है कि इस पूरे मुद्दे पर स्पष्टता आनी चाहिए। केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में एक पार्लियामेंट्री इंक्वायरी इंस्टीट्यूट की जाए। इससे निष्पक्ष जांच हो सकेगी। एवरेज मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ की बात करें तो देश में 2004 से 2014 के दशक में वो 7.4 प्रतिशत थी, अब वह घट कर मात्र 3.1 प्रतिशत रह गई है। यह डाटा आरबीआई का है। सरकार का ध्येय था कि 2030 तक मैन्युफैक्चरिंग का कंट्रीब्यूशन, हमारी जीडीपी में करीब 25 प्रतिशत के आसपास होनी चाहिए। 

सच्चाई यह है कि 2014 के आसपास मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जो जीडीपी में योगदान था, वह 17 प्रतिशत के आसपास था। अब घट गया है। 2014-15 में यह 16.3 प्रतिशत था, 2020-21 में घटकर 14.3 प्रतिशत हो गया। 2023-24 में 14.1 और शायद अब 13.9 पर आ गया है। सरकार का दावा रहता है कि हम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बहुत तरक्की कर रहे हैं। बहुत बड़ी-बड़ी चीजें यहां पर आ रही हैं। कुछ हो सकता है, उसमें सत्य हो, लेकिन जो लार्जर पिक्चर है, पूरे देश की यदि तस्वीर आपके सामने आंकड़ों के साथ रखी जाए तो वह तस्वीर वो है, जो आपके सामने मैंने यहां पर पेश की है। कांग्रेस नेता ने कहा, यह शंका सरकारी दस्तावेजों से ही है। दिसम्बर, 2022 को सरकार ने जो विज्ञप्ति जारी की थी, उसके अंदर पूरे देश को ये बताया गया था, खासतौर पर गुजरात के लोगों को ये बताया गया था कि पूरी लोकोमोटिव इंजन्स की मैन्युफैक्चरिंग दाहोद के प्लांट में होगी। उसके एम्प्लॉयज की जो ट्रेनिंग है, उसके साथ-साथ जो मैंटेनेंस का काम है, वो भी इंडियन रेलवे के डिपो में कराया जाएगा। तथ्य ये है कि दाहोद में मैन्युफैक्चरिंग नहीं हैं, सिर्फ उसकी जो असेंबली है और टेस्टिंग है। सारा टेक्नोलॉजिकल कंट्रोल और मैन्युफैक्चरिंग, वो अभी भी सीमेंस के पास है और उनके प्लांट्स में होगा। 


ये भी पढ़ें: Raftaar vs True Blue: कनाडाई रैपर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप; अश्लील डांस देखकर भड़के रफ्तार

ब्रिजेन्द्र सिंह ने कहा- इस मामले में कंफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट देखना चाहिए कि आप देश के रेलमंत्री हैं, आपकी देखरेख में 26 हजार करोड़ रुपए का एक कॉन्ट्रैक्ट ऐसी कंपनी को दिया जा रहा है, जिसके साथ आपका सीधा-सीधा संबंध रहा है। तो बड़ी स्वभाविक सी चीज है, प्रश्न बहुत वाजिब है और हर व्यक्ति इसका जवाब जरूर चाहेगा, उनसे, क्योंकि सिर्फ ये कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता कि मैं कुछ समय के लिए वहां था, उसके बाद मैंने छोड़ दिया, वो सारी चीजें हैं, लेकिन इस चीज को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि इसका लिंक बिडिंग प्रोसेस से भी है। बिडिंग प्रोसेस में भी ये स्पष्टता नहीं है कि और कौन सी कंपनियां थीं, जिन्होंने उसमें पार्टिसिपेट किया था। क्या कारण था कि सीमेंस उनसे बेहतर थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed