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कांग्रेस का संकट: भला इसी में कि अब राहुल को अध्यक्ष बनाने की जिद छोड़ दी जाए

Mon, 03 May 2021 06:40 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 03 May 2021 06:40 PM IST
सार

  • कांग्रेस के नेता फिर कांग्रेस अध्यक्ष को लिख सकते हैं पत्र
  • पांच राज्यों के चुनाव में आखिर कांग्रेस को क्या हासिल हुआ?
  • एक बार दूसरे नेताओं को फ्रंट पर रखने के प्रयोग में हर्ज क्या है?
  • भाजपा और संघ के दुष्प्रचार का सामना नहीं कर पा रही है कांग्रेस और राहुल की राजनीतिक शैली

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Congress Leadership Crisis: Party should move over making Rahul Gandhi President, complete analysis
सोनिया गांधी और राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

मई का महीना आ गया है। कांग्रेस पार्टी के सामने अपना पूर्णकालिक अध्यक्ष चुनने का सवाल फिर खड़ा होने वाला है। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता पांच राज्यों के चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। एक पूर्व महासचिव का भी कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष को कुछ बदलाव पर अमल करना चाहिए। कुछ जिद छोड़ देनी चाहिए। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि राहुल या फिर प्रियंका को हर बार मुख्य चेहरा बनाने के बजाय अन्य चेहरों को भी अजमा लेना चाहिए। सूत्र का कहना है कि पांच राज्यों के चुनाव में हमारे सहयोगी दलों के खाते में बहुत कुछ आया, लेकिन कांग्रेस तो घाटे में ही रही। इससे तो राजनीति में पार्टी पिछड़ती चली जाएगी।

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क्या वह अपनी बात कांग्रेस अध्यक्ष के सामने रखेंगे?  
इस सवाल के जवाब में एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि पार्टी के फोरम पर पार्टी के हित में लगातार अपनी बात रखी जा रही है। फिर रखी जाएगी। हम लोग जल्द इस पर आपस में चर्चा करेंगे। पार्टी भी पांच राज्यों के चुनाव नतीजों पर समीक्षा करेगी। पार्टी के एक अन्य राज्यसभा सदस्य का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सभी हालात से वाकिफ हैं। लेकिन जरूरत पड़ेगी तो उन्हें फिर चिट्ठी लिखी जाएगी। उत्तर प्रदेश से आने वाले एक कांग्रेस नेता का कहना है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी हों या पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, हमारे दोनों नेता बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह दुर्भाग्य है कि पार्टी के दोनों चेहरे संघ और भाजपा की दुष्प्रचार की राजनीति में फंस गए हैं। इन्हें जनता का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। सूत्र का कहना है कि राहुल और प्रियंका दोनों की राजनीतिक शैली न तो इस दुष्प्रचार का मुकाबला कर पा रही है और न ही पार्टी हित के रास्ते बन पा रहे हैं। इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा है।
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'2010-11 से मैं कह रहा हूं, नोट कर लीजिए'
यह कांग्रेस के एक पूर्व महासचिव और कभी पार्टी के रणनीतिकार रहे नेता की आवाज है। उन्होंने फोन पर अपनी 10 साल पहले कही गई लाइनों को याद कराया। दोहराते हुए बोले कि अभी भी जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रास्ते में आएगा, उसे राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। सूत्र ने याद दिलाया  2010-11 में भी उन्होंने यही कहा था। वह कहते हैं कि यदि राहुल गांधी के रास्ते में खुद प्रियंका गांधी भी आना चाहें तो उन्हें भी इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि वह मान रहे हैं कि कांग्रेस को बड़े पैमाने पर मंथन करना चाहिए। गुरुग्राम में रहने वाले गांधी परिवार के करीबी एक नेता का कहना है कि सब समय की बात है। चिंता की कोई बात नहीं जल्द ही सब ठीक हो जाएगा।
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'कांग्रेस के पास अपनी कोई लाइन-लेंथ नहीं है'
गुड़गांव के कांग्रेस नेता का कहना है कि 40 साल से अधिक के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई दौर देखे हैं। कांग्रेस ने इस देश में हमेशा अपने राजनीतिक लाइन और लेंथ पर राजनीतिक वर्चस्व बनाया है। लोकिन पिछले कुछ सालों से कांग्रेस के पास नया कुछ नहीं है। कांग्रेस दूसरे राजनीतिक दलों की लाइन-लेंथ के सहारे भविष्य तलाशने की कोशिश में है। उसे इसको छोड़ना होगा। तभी राजनीतिक दल अपनी मजबूती पा सकता है। वह कहते हैं कि हमें असल का कांग्रेसी बनकर पार्टी को चलाना होगा। कांग्रेस का मूल विचार ही भारत की राष्ट्रीयता को मजबूत बनाने वाली राजनीतिक सोच है और जनता भी इसके साथ ही कनेक्ट होती है।

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