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डील पर सवाल: राहुल को उम्मीद 'राफेल' मामले में उनकी मेहनत नहीं जाएगी बेकार, कौन बताएगा '126 से 36' कैसे हुए लड़ाकू जहाज

Tue, 06 Jul 2021 03:54 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 06 Jul 2021 03:54 PM IST
सार

पवन खेड़ा कहते हैं, देश को रुचि है कि 570 करोड़ की चीज 1,670 करोड़ रुपये में क्यों खरीदी गई? 126 विमान आने थे, सिर्फ 36 क्यों खरीदे गए...

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congress leader rahul gandhi asked JPC probe in Rafale fighter jet deal
राहुल गांधी - फोटो : for reference only

विस्तार

'राफेल' डील को लेकर एक बार फिर से राजनीति गर्मा गई है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी 'मोदी सरकार' को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। बतौर कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी को उम्मीद है कि 'राफेल' के मामले में उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी। धीरे-धीरे ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिसके बाद मौजूदा केंद्र सरकार यह बताने को मजबूर हो जाएगी कि लड़ाकू जहाजों की संख्या 126 से 36 कैसे हो गई। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी कहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी 10 अप्रैल, 2015 को पेरिस गए। बिना किसी निविदा प्रक्रिया से गुजरे और 'रक्षा खरीद प्रक्रिया' का पूर्ण उल्लंघन करते हुए एकतरफा 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा कर दी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, राहुल गांधी अगर कुछ ठान लेते हैं तो उसके पीछे पूरी तरह से लगे रहते हैं जब तक कुछ परिणाम न निकल आए। राहुल गांधी को छोड़कर विपक्ष का एक नेता मुझे बता दीजिए, जो राफेल पर अपनी आवाज बुलंद करता रहा हो।

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दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने राफेल के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया था। कांग्रेस पार्टी तो चुनाव प्रचार में इसे प्रमुख मुद्दे के तौर पर सामने लेकर आई थी। चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राफेल मामले में दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'हमें नहीं लगता कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की कोई जरूरत है। इसके बाद भाजपा ही कांग्रेस पर हमलावर हो चली थी।
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हाल ही में फ्रांस के एनजीओ शेरपा, जो वित्तीय अपराध में विशेषज्ञता रखती है, उसने राफेल के मामले में अन्य आरोपों के बीच 'भ्रष्टाचार' और 'पद के दुरुपयोग' से जुड़ी एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। फ्रांस में राफेल सौदे की जांच के लिए एक जज को नामित किया गया है। कांग्रेस पार्टी ने इसी आधार पर एक बार फिर भाजपा और केंद्र पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के अनुसार, इस मुद्दे को उठाने की एवज में राहुल गांधी पर तमाम हमले किए गए, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। राहुल गांधी एक ऐसा व्यक्ति है, जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है।

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राफेल सौदे में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार स्पष्ट है: एके एंटनी  

फ्रेंच पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज ने अब 36 एयरक्राफ्ट 'राफेल' सौदे में भ्रष्टाचार, प्रभाव पैडलिंग और पक्षपात की जांच के लिए एक न्यायाधीश की नियुक्ति की है। राफेल सौदे में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार स्पष्ट है। मोदी सरकार की पेचीदा चुप्पी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की साजिश की ओर इशारा करती है। भाजपा सरकार द्वारा दोषियों की जांच करने और उन्हें दंडित करने से इनकार करना और भी ज्यादा आश्चर्यजनक है। बतौर पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, प्रधानमंत्री मोदी ने निविदा प्रक्रिया को किनारे कर एकतरफा 36 राफेल खरीदने की घोषणा कर दी। उनकी इस घोषणा पर हर रक्षा विशेषज्ञ हैरान रह गया।

भारत के सबसे बड़े रक्षा सौदे के तहत, अंतरराष्ट्रीय निविदा के अनुसरण में 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए बातचीत चल रही थी, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा भारत में बनाए जाने वाले 108 विमान और उड़ान भरने की स्थिति में 18 विमान खरीदे जाने की परिकल्पना की गई थी। 126 विमानों के लिए इस अंतरराष्ट्रीय निविदा में भारत को सभी महत्वपूर्ण 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' की भी परिकल्पना की गई थी। आज तक न तो प्रधानमंत्री और न ही भाजपा सरकार ने विमानों की संख्या 126 से घटाकर 36 करने के पीछे का कोई कारण नहीं बताया है।

प्रधानमंत्री एकतरफा समझौता कैसे कर सकते थे

पवन खेड़ा कहते हैं, भाजपा सरकार ने 36 विमानों की कीमत बढ़ाने या सरकार के सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को ऑफसेट अनुबंध से इनकार करने का आधार या कारण भी नहीं बताया है। भाजपा सरकार ने इस तथ्य का कारण भी नहीं बताया है कि जब 'रक्षा अधिग्रहण परिषद' से मंजूरी दे दी गई थी और एक निविदा चल रही थी जिसके लिए बातचीत को अंतिम रूप दिया जा रहा था, तो प्रधानमंत्री एकतरफा एक और समझौता कैसे कर सकते थे। देश को रुचि है कि 570 करोड़ की चीज 1,670 करोड़ रुपये में क्यों खरीदी गई? 126 विमान आने थे, सिर्फ 36 क्यों खरीदे गए? भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए, दलाल नहीं होने चाहिए, ये क्लॉजेज क्यों हटा दिए? देश के सवाल स्पष्ट हैं। क्यों आपने पुराने एग्रीमेंट में जिसमें ये सारे क्लॉजेज थे, उन सबको हटा दिया? राफेल सौदे में भ्रष्टाचार की जांच के चौंकाने वाले और सनसनीखेज विकास पर प्रतिक्रिया के लिए प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री आगे क्यों नहीं आए हैं? क्या मोदी सरकार अपनी पेचीदा चुप्पी से भ्रष्टाचार के आरोपों की जवाबदेही से बच सकती है? क्या यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह सामने आए और सच्चाई को स्वीकार करे।

निष्पक्ष जेपीसी जांच का आदेश दे मोदी सरकार

पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटोनी के अनुसार, मोदी सरकार द्वारा 'अंतर-सरकारी समझौते' के तहत 36 विमान खरीदे जा रहे हैं। इसमें भ्रष्टाचार के आरोप हैं। समझौते का एक पक्ष यानी फ्रांस सरकार ने न्यायाधीश के माध्यम से जांच का आदेश दे दिया है। इस मामले में एकमात्र रास्ता जवाबदेही स्वीकार करना है। राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के सभी तथ्यों, सबूतों और आरोपों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच के लिए जेपीसी का गठन करना चाहिए। जब फ्रांस ने जांच घोषित कर दी है, तो भारत क्या कर रहा है। देश को 21-22 हजार करोड़ का नुकसान हो गया है। आखिर कहां गया वह पैसा? राफेल सौदे में मनमर्जी के एकाएक निर्णय क्यों लिए गए। क्यों रातों रात एचएएल को बाहर कर दिया गया। एक निजी कंपनी को बीच में ले आए, जिसके पास कोई अनुभव भी नहीं था। देश इन सब सवालों का उत्तर मांग रहा है।

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय, जनता के समक्ष इसका ब्योरा देने से इनकार कर चुका है। उस वक्त रक्षा मंत्री ने संसद में कहा कि मोदी का सौदा पुराने सौदे से नौ फीसदी सस्ता था। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में इसे 2.9 फीसदी सस्ता बताया गया। प्रदर्शन मूल्य और वित्तीय गारंटी को लेकर कई बातें स्पष्ट नहीं थीं। बतौर पवन खेड़ा, 570 करोड़ की चीज 1,670 करोड़ में खरीदी है। सरकार को बताना पड़ेगा कि सच क्या है। इस सौदे में बिचौलिए कौन हैं।

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