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Congress: कांग्रेस नेता जयराम का दावा, 'स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स' रिपोर्ट चिंताजनक रुझानों की ओर इशारा करती है
Sun, 27 Aug 2023 10:21 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 27 Aug 2023 10:21 PM IST
सार
जयराम रमेश ने कहा कि रिपोर्ट से एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि हाल ही में संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में सूचीबद्ध अनुसूचियों, जिसका संसदीय स्थायी समिति ने विस्तार से अध्ययन किया, को नवीनतम वैज्ञानिक साक्ष्य और विशेषज्ञों के परामर्श के आधार पर समय-समय पर समीक्षा और अपडेट करने की आवश्यकता है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश (फाइल फोटो)।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि हाल ही में आए 'स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स' रिपोर्ट चिंताजनक रुझानों की ओर इशारा करती है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पक्षियों और कई अन्य प्रजातियों की सुरक्षा के लिए संपूर्ण परिदृश्य को शामिल करने वाले दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
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देश भर के लगभग 30,000 पक्षी प्रेमियों के डाटा पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में संख्या में बदलाव के लिए भारत में 338 पक्षी प्रजातियों का अध्ययन किया गया, जिनमें से 60 प्रतिशत में गिरावट देखी गई है। इसके अलावा, पिछले सात वर्षों में परिवर्तन के लिए मूल्यांकन की गई 359 प्रजातियों में से 40 प्रतिशत (142) में गिरावट देखी गई है।
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कांग्रेस महासचिव ने कहा कि रिपोर्ट से एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि हाल ही में संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में सूचीबद्ध अनुसूचियों, जिसका संसदीय स्थायी समिति ने विस्तार से अध्ययन किया, को नवीनतम वैज्ञानिक साक्ष्य और विशेषज्ञों के परामर्श के आधार पर समय-समय पर समीक्षा और अपडेट करने की आवश्यकता है।
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रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, परिश्रमपूर्वक तैयार और कुछ दिनों पहले जारी की गई 'स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स' की दूसरी रिपोर्ट हमें कुछ चिंताजनक रुझानों की ओर इशारा करती है, मूल्यांकन की गई 942 पक्षी प्रजातियों में से 204 प्रजातियां, यानी लगभग एक-चौथाई पिछले 30 वर्षों में घट गई हैं। उन्होंने कहा, कई प्रजातियां जो तेजी से घट रही हैं, उनमें संरक्षित क्षेत्रों के बाहर निवास स्थान की एक विस्तृत श्रृंखला है, इनमें विशेष रूप से घास के मैदान, नदियों और तटों जैसे निवास स्थान शामिल हैं।
रमेश ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पूरे भारत में पक्षियों को आमतौर पर तीन प्रमुख खतरों का सामना करना पड़ता है- वन क्षरण, शहरीकरण और ऊर्जा बुनियादी ढांचा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार और व्यापार महत्वपूर्ण खतरे बने हुए हैं। रमेश ने कहा, पक्षियों और कई अन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए पूरे परिदृश्य को शामिल करते हुए संरक्षित क्षेत्रों से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, संयोग से इसरो की शानदार उपलब्धियों के कारण खबरों में रहने वाले सतीश धवन एक उत्साही पक्षी-द्रष्टा भी थे और उन्होंने पक्षी कैसे उड़ते हैं, इस पर सबसे आकर्षक किताब लिखी थी।