पीएम मोदी मर्द बनो और यूपीए की कामयाबी स्वीकार करो: जीडीपी ग्रोथ रेट पर दिग्विजय का ट्वीट
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उन्होंने आगे लिखा कि मर्द बनो और यूपीए की कामयाबी स्वीकार करो। कब तक भारत के लोगों को जुमला बाजी से गुमराह करते रहोगे? सच्चाई तो सामने आएगी।
मोदी जी UPA की GDP Growth Rate देख कर डर गये क्या? कब तक अपनी नाकामयाबी छिपाते रहोगे? जनता सब समझती है। मर्द बनो और UPA की कामयाबी स्वीकार करो। कब तक भारत के लोगों को जुमला बाज़ी से गुमराह करते रहोगे? सच्चाई तो सामने आयेगी। https://t.co/TTQTUFkkO0
— digvijaya singh (@digvijaya_28) August 22, 2018विज्ञापन
बता दें कि इससे पहले यूपीए सरकार में वित्तमंत्री रहे कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने वर्तमान सरकार पर आंकड़ों में हेरफेर कर मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की उपलब्धियों को कमतर करके दिखाने का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि हाल ही में सरकार ने कुछ आंकड़ों को जारी कर अपना प्रदर्शन पूर्व की सरकार से बेहतर दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन इस तथाकथित 'शानदार प्रदर्शन' का 'राज' काम में नहीं, बल्कि आंकड़ों के हेरफेर में छिपा हुआ है।
अर्थशास्त्र पर गहरी पकड़ रखने वाले पी चिदंबरम ने कहा कि एनडीए-2 सरकार की इस सफलता के पीछे सच्चाई यह है कि मोदी सरकार ने आंकड़ों की गणना करते समय आधार वर्ष को 2004-5 की बजाय 2011-12 कर दिया है। जबकि वर्ष 2004 से वर्ष 2009 तक मनमोहन सिंह अगुवाई में यूपीए-1 सरकार का कार्यकाल था।
पिछली चार सरकारों के प्रदर्शन को आंकड़ों के जरिेये सामने रखते हुए चिदंबरम ने कहा कि अटल बिहारी की अगुवाई में एनडीए-1 (1999-2004) सरकार में बाजार मू्ल्य पर जीडीपी में औसत वृद्धि दर 5.68 प्रतिशत थी। जबकि यूपीए-1 में मनमोहन सिंह की सरकार में देश ने इन्हीं मूल्यों पर 8.36 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर हासिल की थी जो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से बहुत ज्यादा थी।
चिदंबरम के मुताबिक मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में भी यानी यूपीए-2 में जीडीपी में 7.68 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की थी। सरकार ने यह वृद्धि दर उस प्रतिकूल परिस्थितियों में हासिल किया था जबकि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में मंदी छाई हुई थी। कांग्रेस नेता के मुताबिक यूपीए सरकार के समय सबसे अच्छी प्रगति 2005-6, 2006-7 और 2007-8 में दर्ज की गई थी।
क्यों गिरी मोदी सरकार में वृद्धि दर
चिदंबरम के मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार को एक बेहतर अर्थव्यवस्था के साथ देश की कमान मिली हुई थी। यही कारण है कि मोदी सरकार के शुरुआती दो सालों में प्रगति जारी रही, लेकिन जैसे ही सरकार ने नोटबंदी, जीएसटी और टैक्स की दरों की अव्यावहारिक नीतियां लागू की, देश विकास की दौड़ में पीछे होता चला गया।
उन्होंने कहा कि इस समय देश में विदेशी निवेश भी बेहद कम दर पर चला गया है जिसके कारण निर्माण दर में गिरावट दर्ज की जा रही है और देश में रोजगार का सृजन नहीं हो पा रहा है।