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West Asia: पश्चिम एशियाई कूटनीति के लिए रणनीतिक झटका, कांग्रेस ने चाबहार बंदरगाह को लेकर केंद्र को घेरा

Sun, 15 Mar 2026 12:46 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 15 Mar 2026 12:46 PM IST
सार

कांग्रेस ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि 2026-27 के बजट में इसके लिए कोई फंड नहीं रखा गया, जिससे यह प्रोजेक्ट भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं से बाहर होता दिख रहा है। कांग्रेस ने इसे भारत की कूटनीति के लिए झटका बताया।

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Congress  Jairam Ramesh Questions Modi Govt Over No Budget Allocation for Chabahar Project
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश - फोटो : एएनआई

विस्तार

कांग्रेस ने चाबहार बंदरगाह के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने रविवार को कहा कि चाबहार बंदरगाह अब भारत की पहुंच से दूर होता जा रहा है। पार्टी ने इसे मध्य एशिया में भारत की कूटनीति के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका बताया है। कांग्रेस के अनुसार, ताजिकिस्तान में ऐनी एयरफोर्स बेस बंद होने के बाद यह भारत के लिए दूसरा बड़ा नुकसान है।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पिछली सरकारों के कामों को कभी श्रेय नहीं देते। रमेश ने सोशल मीडिया पर बताया कि 1990 के दशक के अंत में भारत ने इस बंदरगाह में निवेश की संभावनाएं तलाशी थीं। यह भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच सहयोग की एक रणनीति थी।
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इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस योजना को नई गति दी। मई 2013 में केंद्रीय कैबिनेट ने चाबहार के लिए 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी थी। यह फैसला उस समय लिया गया था जब भारत अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था।
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जयराम रमेश का कहना है कि अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने डॉ. सिंह की इस पहल को नया नाम देकर अपना विजन बताया। उन्होंने बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि साल 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई पैसा नहीं रखा गया है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत इस प्रोजेक्ट से बाहर निकल गया है या फिर निवेश की सभी शर्तें पूरी हो चुकी हैं?

रमेश ने कहा, चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से करीब 170 किलोमीटर दूर है। ग्वादर को चीन ने तैयार किया है, इसलिए चाबहार भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत जरूरी था। लेकिन अब यह भारत की योजनाओं से गायब नजर आ रहा है। ताजिकिस्तान में भारत का एयरफोर्स बेस पहले ही बंद हो चुका है। अब चाबहार प्रोजेक्ट में फंड की कमी भारत की मध्य एशियाई कूटनीति के लिए एक और बड़ी हार साबित हो सकती है।

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