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समाजवादी परिवार के रिश्तों पर टिका कांग्रेस का गठबंधन
अनूप वाजपेयी/ नई दिल्ली
Updated Tue, 01 Nov 2016 04:09 AM IST
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अपने वर्तमान विधायकों का मन टटोलने के बाद कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी में राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेताओं खासकर महासचिवों से गठबंधन को लेकर रायशुमारी शुरू की है। कांग्रेस 27 साल की बेहाली को लेकर राज्य में अकेले लडने का राजनीतिक फायदा तो देख रही है लेकिन विधानसभा सीटों का गणित उसे सत्ता तक पहुंचा देगा इस सवाल को लेकर कांग्रेस में मंथन चल रहा है। दरअसल कांग्रेस का पूरा दारोमदार समाजवादी परिवार के आपसी रिश्तों पर टिका है। कांग्रेस परिवार की खींचतान के बीच में फंसकर खुद का वजूद नहीं खोना चाहती है।
कांग्रेस किसी भी तरह के गठबंधन में अपनी भूमिका और मजबूती को लेकर आश्वासत हो लेना चाहती है। कलह से जूझ रही समाजवादी पार्टी में अगर सुलह हो जाती है तो उस स्थित में कांग्रेस खुद को अधिक मजबूत और राजनीतिक लाभ में नहीं देख रही है। भविष्य के उस गठबंधन में कांग्रेस, सपा, रालोद के अलावा बिहार की पार्टियां भी कुछ सीटें मांगेगी। ऐसे में कांग्रेस की हिस्सेदारी कितनी होगी ये सवाल कांग्रेस को सबसे अधिक परेशान कर रहा है। जबकि परिवार में अगर बिखराव होता है और अखिलेश के साथ किसी प्रकार का गठबंधन होता है तो कांग्रेस उस मौके पर अधिक मजबूती के साथ अपना दावा रख सकेगी।
कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने यूपी मिशन का जो खाका खींचा है वो अकेले चलने का है। पार्टी अधिकारिक तौर पर अकेले सरकार बनाने की बात कह खुद में जोश भी भर रही है। बावजूद पार्टी के नौ विधायक सत्ता की खोज में हाल ही छोड़कर भाजपा, बसपा और सपा मे चले गए। राज्य में विषम परिस्थितयों में जीतकर आने वाले शेष विधायकों ने भी राहुल गांधी को बता दिया कि अब सत्ता से करीबी और भागीदारी चाह रहे हैं। यही कारण है 27 साल से सत्ता से दूर कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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कांग्रेस किसी भी तरह के गठबंधन में अपनी भूमिका और मजबूती को लेकर आश्वासत हो लेना चाहती है। कलह से जूझ रही समाजवादी पार्टी में अगर सुलह हो जाती है तो उस स्थित में कांग्रेस खुद को अधिक मजबूत और राजनीतिक लाभ में नहीं देख रही है। भविष्य के उस गठबंधन में कांग्रेस, सपा, रालोद के अलावा बिहार की पार्टियां भी कुछ सीटें मांगेगी। ऐसे में कांग्रेस की हिस्सेदारी कितनी होगी ये सवाल कांग्रेस को सबसे अधिक परेशान कर रहा है। जबकि परिवार में अगर बिखराव होता है और अखिलेश के साथ किसी प्रकार का गठबंधन होता है तो कांग्रेस उस मौके पर अधिक मजबूती के साथ अपना दावा रख सकेगी।
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कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने यूपी मिशन का जो खाका खींचा है वो अकेले चलने का है। पार्टी अधिकारिक तौर पर अकेले सरकार बनाने की बात कह खुद में जोश भी भर रही है। बावजूद पार्टी के नौ विधायक सत्ता की खोज में हाल ही छोड़कर भाजपा, बसपा और सपा मे चले गए। राज्य में विषम परिस्थितयों में जीतकर आने वाले शेष विधायकों ने भी राहुल गांधी को बता दिया कि अब सत्ता से करीबी और भागीदारी चाह रहे हैं। यही कारण है 27 साल से सत्ता से दूर कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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