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छात्रावास में आदिवासी लड़की गर्भवती, ओडिशा विधानसभा में मचा हंगामा
Wed, 03 Jul 2019 11:25 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 03 Jul 2019 11:25 AM IST
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ओडिशा विधानसभा (फाइल फोटो)
- फोटो : odishaassembly.nic.in
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राज्य सरकार द्वारा संचालित एक छात्रवास में चार आदिवासी लड़कियों के कथित तौर पर गर्भवती होने को लेकर मंगलवार को ओडिशा विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस और भाजपा विपक्षी दलों ने सरकार से इस मामले पर बयान की मांग की।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि आदिवासी लड़कियों के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित छात्रावास अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं और उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। इस मुद्दे को कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने शून्यकाल के दौरान उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से कहा कि ‘ऐसा संदेह है कि इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है क्योंकि राज्य द्वारा संचालित छात्रावास के अधिकारियों ने लड़कियों को वापस उनके घर भेज दिया है।
हालांकि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्टों में कहा गया था कि चार लड़कियां गर्भवती पाई गईं, बाद में उनमें से तीन की रिपोर्ट नकारात्मक आई। इस मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।’ कांग्रेस और भाजपा पार्टियों के नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस घटना को गंभीरता से लेने और इसमें शामिल लोगों को दंडित करने की मांग करते हुए 12 जुलाई को विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा चरण शुरू होने पर जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने को कहा।
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विपक्ष ने आरोप लगाया कि आदिवासी लड़कियों के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित छात्रावास अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं और उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। इस मुद्दे को कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने शून्यकाल के दौरान उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से कहा कि ‘ऐसा संदेह है कि इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है क्योंकि राज्य द्वारा संचालित छात्रावास के अधिकारियों ने लड़कियों को वापस उनके घर भेज दिया है।
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हालांकि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्टों में कहा गया था कि चार लड़कियां गर्भवती पाई गईं, बाद में उनमें से तीन की रिपोर्ट नकारात्मक आई। इस मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।’ कांग्रेस और भाजपा पार्टियों के नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस घटना को गंभीरता से लेने और इसमें शामिल लोगों को दंडित करने की मांग करते हुए 12 जुलाई को विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा चरण शुरू होने पर जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने को कहा।
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