फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   cm yogi recalls Razakar violence in Hyderabad Kharge lost his family members news in hindi

Razakar: रजाकार हिंसा क्या थी, जिसमें खरगे ने मां-चाची-बहन को खोया; 76 साल पुरानी घटना फिर क्यों चर्चा में?

Wed, 13 Nov 2024 04:27 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 13 Nov 2024 04:27 PM IST
विज्ञापन
सार
Razakar Violence: सीएस योगी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच जुबानी जंग जारी है। सीएम ने मंगलवार को महाराष्ट्र में कहा कि खरगे को हैदराबाद के निजाम के रजाकारों की सच्चाई बतानी चाहिए जिन्होंने उनके परिवार के सदस्यों को मार डाला था। उनके इस बयान के बाद 76 साल पुरानी रजाकार हिंसा भी चर्चा में आ गई है। 
loader
cm yogi recalls Razakar violence in Hyderabad Kharge lost his family members news in hindi
सीएम योगी VS खरगे - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। प्रचार के अंतिम दिनों में पार्टियों के स्टार प्रचारक भी चुनावी कार्यक्रम कर रहे हैं। इसी बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच जारी बयानबाजी भी चर्चा में है। सीएम योगी ने मंगलवार को महाराष्ट्र की एक रैली में कहा कि खरगे को हैदराबाद के निजाम के रजाकारों की सच्चाई बतानी चाहिए जिन्होंने उनके परिवार के सदस्यों को जिंदा जलाकर मार डाला था। 


यह आरोप-प्रत्यारोप सीएम योगी के 'बंटोगे तो कटोगे' वाले बयान के बाद शुरू हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सीएम योगी को लेकर कहा था कि एक तरफ वो 'गेरुआ' कपड़े पहनते हैं और दूसरी तरफ कहते हैं 'बंटोगे तो कटोगे'... वे लोगों के बीच नफरत फैला रहे हैं और उन्हें बांटने की कोशिश कर रहे हैं।


आइये जानते हैं कि सीएम योगी और कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के बीच जारी विवाद क्या है? मल्लिकार्जुन खरगे ने सीएम योगी को लेकर क्या कहा था? योगी ने पलटवार में क्या कहा? आखिर मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार के साथ क्या हुआ था? 

क्या है 'बंटोगे तो कटोगे का नारा'?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाल के दिनों में अपनी चुनावी सभाओं में 'बंटोगे तो कटोगे' नारे का जिक्र करते आए हैं। दरअसल, 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देने और देश छोड़कर भाग जाने के बाद बांग्लादेश राजनीतिक संकट में फंस गया था। इसके बाद यहां हिंसा हुई जिसमें हिन्दुओं को भी निशाना बनाया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अगस्त को बांग्लादेश में चल रही अशांति का जिक्र करते हुए एकता का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने आगरा में एक जनसभा में कहा, 'राष्ट्र से ऊपर कुछ भी नहीं हो सकता। और राष्ट्र तभी सशक्त होगा जब हम एकजुट होंगे। ‘बटेंगे तो कटेंगे’। आप देख रहे हैं कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है। वे गलतियां यहां नहीं दोहराई जानी चाहिए... ‘बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे।'

सीएम का आगरा में दिया गया बयान गया यहीं तक सीमित नहीं रहा और इसे उन्होंने हरियाणा और जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनावों में भी जिक्र किया। अब जब झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं तो योगी यहां भी चुनावी सभाओं में 'बटेंगे तो कटेंगे', एक रहेंगे तो नेक रहेंगे' और 'एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे' जैसे नारे गढ़े हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे - फोटो : संवाद
सीएम योगी और कांग्रेस खरगे के बीच विवाद क्या है? 
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर लोगों के बीच नफरत फैलाने और 'बटोगे तो काटोगे' जैसे बयानों से लोगों को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। 

10 नवंबर को मुंबई में संविधान बचाओ सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'कई नेता साधुओं के वेश में रहते हैं और अब राजनेता बन गए हैं। कुछ तो मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। वे 'गेरुआ' कपड़े पहनते हैं। मैं भाजपा से कहूंगा कि या तो सफेद कपड़े पहनो या अगर आप संन्यासी हैं या 'गेरुआ' कपड़े पहनते हैं, तो राजनीति से बाहर निकल जाओ।'

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'एक तरफ आप 'गेरुआ' कपड़े पहनते हैं और दूसरी तरफ आप कहते हैं 'बटोगे तो कटोगे'... वे लोगों के बीच नफरत फैला रहे हैं और उन्हें बांटने की कोशिश कर रहे हैं।'
 

सीएम योगी ने किया खरगे पर हमला।
सीएम योगी ने किया खरगे पर हमला। - फोटो : अमर उजाला।
सीएम योगी ने खरगे के पलटवार में क्या कहा? 
सीएम आदित्यनाथ ने मंगलवार (12 नवंबर) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधा। चुनावी राज्य महाराष्ट्र में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष को करारा जवाब दिया। इसी रैली में भाजपा के स्टार प्रचारक ने हैदराबाद रियासत का हिस्सा रहे वरबट्टी गांव का भी जिक्र किया जिसे 1947 में हिंसा में जला दिया गया था। 

कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी ने चुनावी रैली के दौरान कहा, 'आजकल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मुझ पर बेवजह गुस्सा कर रहे हैं, लाल-पीले हो रहे हैं। खरगे जी, मुझ पर गुस्सा मत कीजिए, मैं आपकी उम्र का सम्मान करता हूं। अगर गुस्सा करना है तो हैदराबाद निजाम पर गुस्सा कीजिए। हैदराबाद निजाम के रजाकारों ने आपका गांव जलाया, हिंदुओं की बर्बर हत्या की, आपकी पूज्य माता जी, बहन और परिवार के सदस्यों को जलाया। देश के सामने यह सच्चाई रखिए कि जब भी बंटेंगे तो निर्ममता से इसी तरह कटेंगे। लेकिन खरगे जी इस सच्चाई को स्वीकार करने में हिचकिचा रहे हैं क्योंकि उन्हें मुस्लिम वोटबैंक का डर है।'
 

...तो मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार के साथ क्या हुआ था? 
देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे मल्लिकार्जुन खरगे ने बचपन से ही अपने जीवन में उनके उतार-चढ़ाव देखे हैं। कांग्रेस नेता के जीवन में उनका संघर्ष महज सात साल की छोटी उम्र से ही शुरू हो गया था। खरगे ने अपनी मां और बहन को हैदराबाद के निजाम की निजी सेना या रजाकारों द्वारा की गई हिंसा में खो दिया, जबकि वह खुद बाल-बाल बच गए। इस बात की जानकारी 
अक्तूबर 2022 में पिता मल्लिकार्जुन खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने के बाद उनके बेटे प्रियांक खरगे ने दी थी। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में 1948 में हुई इस दुखद घटना के बारे में बताया था। 

मल्लिकार्जुन खरगे का जन्म 21 जुलाई 1942 को कर्नाटक के बीदर जिले के भालकी तालुका में पड़ने वाले वरबट्टी गांव में हुआ था। उनके पिता मपन्ना खरगे थे और मां साईबववा थीं। रजाकारों ने तब के हैदराबाद राज्य में भालकी इलाके में पूरे इलाके में उत्पात मचाया, लूटपाट की और घरों पर हमला किया, जिसकी जद में मल्लिकार्जुन खरगे का परिवार भी आ गया। 

प्रियांक ने 2022 में साक्षात्कार में बताया था, 'मेरे दादा खेतों में काम कर रहे थे, तभी एक पड़ोसी ने उन्हें बताया कि रजाकारों ने उनके टिन की छत वाले घर में आग लगा दी है। रजाकार हर गांव पर हमला कर रहे थे। उनकी सेना में चार लाख लोग थे और वे अकेले ही काम कर रहे थे, क्योंकि उनका कोई नेता नहीं था। मेरे दादा घर की ओर भागे, लेकिन वे केवल मेरे पिता को बचा पाए, जो उनकी पहुंच के भीतर थे। मेरी दादी और चाची को बचाने के लिए बहुत देर हो चुकी थी, जिनकी इस घटना में जान चली गई।'

घटना के बाद वे और उनके पिता परिवार में अकेले रह गए और रजाकारों के डर से आस-पास के गांवों में उन्हें शरण देने के लिए कोई आगे नहीं आया। फिर वे गुलबर्गा में शरण लेने चले गए क्योंकि उनके चाचा गुलबर्गा में सिपाही के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें अपने चाचा का पता नहीं मिल पाया। उसके बाद वे गुलबर्गा में ही बस गए और उनके पिता एक फैक्ट्री में काम करने लगे।
 

कौन थे रजाकार?
15 अगस्त 1947 को भारत ने ब्रिटिश हुकूमत से आजादी पाई। हालांकि, हैदराबाद राज्य में निजाम की निरंकुशता कायम रही। अमृत महोत्सव की वेबसाइट के अनुसार, रजाकार के नाम से जानी जाने वाली  निजाम की सेना ने लोगों को यातना, जबरदस्ती, अत्याचार, लूटपाट, आगजनी और अन्य प्रकार के उत्पीड़न का शिकार बनाया था। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed