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Karnataka: 'मुदा घोटाला से ध्यान हटाने के लिए जाति जनगणना का मुद्दा उठाया', कुमारस्वामी का सिद्धारमैया पर आरोप
Mon, 07 Oct 2024 06:02 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: श्वेता महतो
Updated Mon, 07 Oct 2024 06:02 PM IST
सार
वरिष्ठ कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें जाति जनगणना के मुद्दे पर चुनाव में जाने दें। उन्हें विधानसभा भंग करने दीजिए और फिर एक बार जाति जनगणना का वादा करके चुनाव में जाने दीजिए।
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कुमारस्वामी
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर मुदा घोटाले से जनता का ध्यान भटकाने के लिए जाति जनगणना का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कर्नाटक सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी गलतियों को छिपाने के लिए इस मुद्दे के जरिए जनता को गुमराह कर रही है। कुमारस्वामी ने 10 साल पहले तैयार की गई रिपोर्ट की प्रसांगिकता पर भी सवाल उठाए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया ने आज पछड़े वर्ग के समुदाय के मंत्रियों और विधायकों के साथ बैठक की। उन्होंने सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट पर विचार-विमर्श किया, जिसे जाति जनगणना के रूप में जाना जाता है।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने रविवार को बताया कि सरकार ने कैबिनेट के सामने जाति जनगणना रिपोर्ट रखने का फैसला किया है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि 18 अक्तूबर को चर्चा के लिए इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुमारस्वामी ने कहा, "अगर वैज्ञानिक तौर पर बात करें तो कांथाराजू समिति का गठन कब हुआ था? इसका गठन 2014 में हुआ था, इसे दस साल हो गए। जाति जनगणना 10 साल पहले हो चुकी है। इन 10 वर्षों में कई विकास और बदलाव किए गए। पुरानी जनगणना रिपोर्ट को बिना जारी किए रखा गया था।" पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षो पहले हुए जाति जनगणना से किसी भी समुदाय को लाभ नहीं हुआ।
कुमारस्वामी ने कहा, "मुझ पर (कांग्रेस द्वारा) आरोप लगाया गया कि मैंने रिपोर्ट जारी होने नहीं दी। सिद्धारमैया को रिपोर्ट सौंपे हुए कितना समय हो गया? यह संसद चुनाव से पहले दिया गया था। उसके बाद से इसे लेकर कोई बात नहीं की गई। और अब मुडा घोटाले से जनता का ध्यान भटकाने के लिए राज्य सरकार जाति जनगणना का मुद्दा लेकर आई।" के. जयप्रकाश हेगड़े की अध्यक्षता में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 29 फरवरी को सीएम सिद्धारमैया को ताजा रिपोर्ट सौंपी थी। कर्नाटक के दो प्रमुख समुदाय लिंगायत और वोक्कालियाग ने सर्वेक्षण को लेकर आपत्ति जताई और इसे अवैज्ञानिक बताया। उन्होंने इसे खारिज करने की मांग की। तत्कालीन सिद्धारमैया की सरकार ने 2015 में 170 करोड़ की अनुमानित लागत से सर्वेक्षण शुरू किया। तत्कालीन अध्यक्ष कंथाराजू के नेतृत्व में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को जाति जनगणना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया था।
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सर्वे का काम 2018 मं समाप्त हुआ, लेकिन न तो इसे स्वीकार किया गया और न ही इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा था कि जाति जनगणना रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए, भले ही इसके कारण सरकार चली जाए। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने कहा, "उन्हें जाति जनगणना के मुद्दे पर चुनाव में जाने दें। उन्हें विधानसभा भंग करने दीजिए और फिर एक बार जाति जनगणना का वादा करके चुनाव में जाने दीजिए।"
बता दें कि 27 सितंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती और अन्य लोगों के खिलाफ मुडा (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में ईडी ने 30 सितंबर को मुडा द्वारा पार्वती बीएम को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ पुलिस की एफआईआर के समान प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी।
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कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने रविवार को बताया कि सरकार ने कैबिनेट के सामने जाति जनगणना रिपोर्ट रखने का फैसला किया है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि 18 अक्तूबर को चर्चा के लिए इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुमारस्वामी ने कहा, "अगर वैज्ञानिक तौर पर बात करें तो कांथाराजू समिति का गठन कब हुआ था? इसका गठन 2014 में हुआ था, इसे दस साल हो गए। जाति जनगणना 10 साल पहले हो चुकी है। इन 10 वर्षों में कई विकास और बदलाव किए गए। पुरानी जनगणना रिपोर्ट को बिना जारी किए रखा गया था।" पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षो पहले हुए जाति जनगणना से किसी भी समुदाय को लाभ नहीं हुआ।
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कुमारस्वामी ने कहा, "मुझ पर (कांग्रेस द्वारा) आरोप लगाया गया कि मैंने रिपोर्ट जारी होने नहीं दी। सिद्धारमैया को रिपोर्ट सौंपे हुए कितना समय हो गया? यह संसद चुनाव से पहले दिया गया था। उसके बाद से इसे लेकर कोई बात नहीं की गई। और अब मुडा घोटाले से जनता का ध्यान भटकाने के लिए राज्य सरकार जाति जनगणना का मुद्दा लेकर आई।" के. जयप्रकाश हेगड़े की अध्यक्षता में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 29 फरवरी को सीएम सिद्धारमैया को ताजा रिपोर्ट सौंपी थी। कर्नाटक के दो प्रमुख समुदाय लिंगायत और वोक्कालियाग ने सर्वेक्षण को लेकर आपत्ति जताई और इसे अवैज्ञानिक बताया। उन्होंने इसे खारिज करने की मांग की। तत्कालीन सिद्धारमैया की सरकार ने 2015 में 170 करोड़ की अनुमानित लागत से सर्वेक्षण शुरू किया। तत्कालीन अध्यक्ष कंथाराजू के नेतृत्व में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को जाति जनगणना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया था।
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सर्वे का काम 2018 मं समाप्त हुआ, लेकिन न तो इसे स्वीकार किया गया और न ही इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा था कि जाति जनगणना रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए, भले ही इसके कारण सरकार चली जाए। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने कहा, "उन्हें जाति जनगणना के मुद्दे पर चुनाव में जाने दें। उन्हें विधानसभा भंग करने दीजिए और फिर एक बार जाति जनगणना का वादा करके चुनाव में जाने दीजिए।"
बता दें कि 27 सितंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती और अन्य लोगों के खिलाफ मुडा (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में ईडी ने 30 सितंबर को मुडा द्वारा पार्वती बीएम को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ पुलिस की एफआईआर के समान प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी।