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Bengal SIR: 'मुख्यमंत्री के दावे की हो गहन जांच...', बीएलओ आत्महत्या विवाद पर बोले राज्यपाल सीवी आनंद बोस
Sun, 23 Nov 2025 06:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 23 Nov 2025 06:54 PM IST
सार
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों की मौत को लेकर विवाद बढ़ गया है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से किए गए दावे की गहन जांच होनी चाहिए।
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सीवी आनंद बोस, राज्यपाल, पश्चिम बंगाल
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की मौत को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बीच, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने रविवार को कहा कि तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए और मुख्यमंत्री ममता बनर्जीकी ओर से उठाए गए मुद्दों की विस्तार से जांच होनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर होता है। जो बातें मुख्यमंत्री ने उठाई हैं, उन्हें विस्तार और गहराई से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग (ईसी) के पास संतुलित दृष्टिकोण है और सभी मुद्दों की उचित जांच कर सही समाधान निकाले जा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया कि चार नवंबर से चल रहे एसआईआर अभ्यास के दौरान 30 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें बीएलओ भी शामिल हैं। टीएमसी ने इन मौतों के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया।
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ये भी पढ़ें: SIR: बूथ स्तर के अधिकारियों की मौत के बाद कांग्रेस ने EC- BJP को घेरा, राहुल बोले- यह नाकामी नहीं, षड़यंत्र है
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट में कहा था कि आज कृष्णानगर में एक महिला सहायक शिक्षिका, जो बीएलओ के रूप में कार्यरत थी, ने आत्महत्या कर ली। एसी 82 चापड़ा के भाग संख्या-2 की बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपनी आत्महत्या से पहले चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने 19 नवंबर को भी दावा किया था कि जलपाईगुड़ी के माल इलाके की बूथ-स्तर के अधिकारी शांति मुणी ने जारी एसआईआर के काम के कारण असहनीय दबाव की वजह से आत्महत्या की।
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राज्यपाल ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर होता है। जो बातें मुख्यमंत्री ने उठाई हैं, उन्हें विस्तार और गहराई से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग (ईसी) के पास संतुलित दृष्टिकोण है और सभी मुद्दों की उचित जांच कर सही समाधान निकाले जा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया कि चार नवंबर से चल रहे एसआईआर अभ्यास के दौरान 30 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें बीएलओ भी शामिल हैं। टीएमसी ने इन मौतों के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया।
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट में कहा था कि आज कृष्णानगर में एक महिला सहायक शिक्षिका, जो बीएलओ के रूप में कार्यरत थी, ने आत्महत्या कर ली। एसी 82 चापड़ा के भाग संख्या-2 की बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपनी आत्महत्या से पहले चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने 19 नवंबर को भी दावा किया था कि जलपाईगुड़ी के माल इलाके की बूथ-स्तर के अधिकारी शांति मुणी ने जारी एसआईआर के काम के कारण असहनीय दबाव की वजह से आत्महत्या की।
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