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SIR: बूथ स्तर के अधिकारियों की मौत के बाद कांग्रेस ने EC- BJP को घेरा, राहुल बोले- यह नाकामी नहीं, षड़यंत्र है

Sun, 23 Nov 2025 06:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 23 Nov 2025 06:10 PM IST
सार

SIR: कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों की मौत को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर हमला किया और इसे जानबूझकर उत्पीड़न और नागरिकों को परेशान करने की साजिश करार दिया। पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कहा कि 16 बीएलओ की मौत एसआईआर के दबाव का नतीजा है और यह सुधार नहीं बल्कि थोपा गया ज़ुल्म है।

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SIR not reform but imposed oppression: Congress after death of some booth-level officers
राहुल गांधी, नेता, कांग्रेस - फोटो : ANI

विस्तार

कांग्रेस ने रविवार को विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे कुछ बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की मौत को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर हमला किया। पार्टी ने इसे जानबूझकर दमन और नागरिकों को परेशान करने की साजिश करार दिया। विपक्षी पार्टी ने कहा कि अतिरिक्त दबाव के कारण इन अधिकारियों की मौतों को सामान्य नुकसान मानकर नजरअंदाज किया जा रहा है। 
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पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर के नाम पर देश भर में अफरा-तफरी मचा रखी है- नतीजा? तीन हफ्तों में 16 बीएलओ की जान चली गई। दिल का दौरा, तनाव, आत्महत्या.. एसआईआर कोई सुधार नहीं, थोपा गया ज़ुल्म है। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग ने ऐसी प्रणाली बनाई है, जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची में हजारों स्कैन पन्ने उलटने पड़े। मकसद साफ है- ही मतदाता थककर हार जाए और वोट चोरी बिना रोक-टोक जारी रहे। 
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उन्होंने आगे कहा, भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है। मगर भारत का चुनाव आयोग आज भी कागजों का जंगल खड़ा करने पर ही अड़ा है। अगर नीयत साफ होती तो सूची डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती और चुनाव आयोग तीस दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम ठेलने के बजाय उचित समय लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देता।कांग्रेस नेता ने कहा, एसआईआर एक सोची-समझी चाल है, जहां नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और बीएलओ की अनावश्यक दबाव से मौतों को सामान्य नुकसान मानकर अनदेखा कर दिया गया है। यह नाकामी नहीं, षड़यंत्र है। सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि है। 

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बीजेपी पर हमला किया और कहा कि भाजपा की वोट चोरी अब जानलेवा रूप ले चुकी है। काम के भार से बीएलओ और चुनाव अधिकारी आत्महत्या करने पर मजबूर है। मेरी हर एक परिवार, जिसने अपनों को खोया है, उनको गहरी संवेदनाएं। जमीनी हकीकत के मुताबिक ये संख्या रिपोर्ट से कहीं अधिक है, जो बेहद चिंताजनक है। इन परिवारों को न्याय कौन दिलाएगा? उन्होंने कहा, भाजपा चोरी की सत्ता की मलाई खाने में व्यस्त है और चुनाव आयोग मूकदर्शक बने तमाशा देख रहा है। हड़बड़ी में… बिना योजना के जबरन एसआईआर लागू करना नोटबंदी और कोरोना लॉकडाउन की याद दिलाता है। 

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सत्ता का दुरुपयोग कर संस्थानों से आत्महत्या करवाना, संविधान की धज्जियाँ उड़ाना और लोकतंत्र को दुर्बल बनाना भाजपा की सत्ता की भूख का नतीजा है। अब बस! अगर अभी भी हम नहीं जागे तो लोकतंत्र के आखरी स्तंभों को गिरने से कोई नहीं बचा सकता। जो लोग एसआईआर और वोट चोरी पर चुप हैं वो इन निर्दोष बीएलओ की मृत्यु के कसूरवार है। आवाज उठाइए, लोकतंत्र बचाइए।

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक महिला बीएलओ अपने घर में पंखे से लटकी मिली। उनके परिवार ने बताया कि वह एसआईआर से जुड़े काम के कारण तनाव में थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मौत पर आश्चर्य जताया और कहा कि यह अब 'सच में चिंताजनक' हो गया है। महिला के सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया गया।

हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा ने दावा किया कि सुसाइड नोट फर्जी है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के रायसेन और दमोह जिलों में एसआईआर के लिए काम करने वाले दो शिक्षकों की बीमारियों के कारण मौत हुई। 

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