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'हमारे जंतर-मंतर से दूर रहें': दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी पर CJP की प्रतिक्रिया; क्या है पूरा मामला?
Fri, 07 Aug 2026 10:09 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 07 Aug 2026 10:09 PM IST
सार
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद विरोध के अधिकार पर बहस छिड़ गई है। नीट आंदोलन का चेहरा बनी सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर ही नागरिकों के पास अपनी आवाज उठाने का आखिरी जरिया बचा है। इसे छीनने का कोई भी प्रयास देश के युवाओं और आम नागरिकों को स्वीकार्य नहीं होगा।
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सौरव दास, सीजेपी प्रवक्ता
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई है। अदालत का मानना है कि शहर के बीचों-बीच प्रदर्शन होने से पूरी दिल्ली बेवजह बंधक बन जाती है। इस टिप्पणी पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने ऐतराज जताया है।
क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पूरी दिल्ली ठप हो जाती है?
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। यह याचिका 'ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी' की थी। वे 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर तीन घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि शहर के अंदर ऐसे प्रदर्शन नहीं होने चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम फैसला सरकार और पुलिस का ही होगा।
क्या युवाओं का शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार खतरे में है?
उच्च अदालत की इस टिप्पणी के तुरंत बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, 'हमारे जंतर-मंतर से दूर रहिए! हमारी विरोध करने की जगह छीनने की कोशिश करने से पहले, हमें बताया जाए कि क्या आप इंडिया गेट को ऐसी जगह के तौर पर तय करेंगे जहां हम शांतिपूर्ण विरोध करने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें। आपने इंडिया गेट तो छीन ही लिया। हम अपना जंतर-मंतर भी छीने जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे!'
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यह भी पढ़ें: 'लाठी खाने वालों से क्यों नहीं मिले भागवत?': सामना में उद्धव का तंज; मुंबई में संघ-Gen Z संवाद पर उठाए सवाल
सीजेपी और जंतर-मंतर से जुड़े सात बड़ी बातें
छात्र आंदोलन की अगुवाई: सीजेपी ने हाल ही में नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर विशाल छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: इस बड़े छात्र आंदोलन और भारी जनदबाव के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा था।
20 जुलाई का हिंसक लाठीचार्ज: 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठियां भांजी थीं और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
इंडिया गेट पर पाबंदी: दिल्ली पुलिस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इंडिया गेट पर प्रदर्शन पूरी तरह बैन है क्योंकि वह एक राष्ट्रीय स्मारक है।
पुलिस की पूर्व अनुमति आवश्यक: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहले से मंजूरी लेना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित: दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है।
केस वापस लेने की गारंटी नहीं: सीजेपी नेता सौरभ दास के अनुसार, सरकार ने बातचीत तो की है, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की कोई लिखित गारंटी अभी तक नहीं दी है।
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क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पूरी दिल्ली ठप हो जाती है?
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। यह याचिका 'ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी' की थी। वे 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर तीन घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि शहर के अंदर ऐसे प्रदर्शन नहीं होने चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम फैसला सरकार और पुलिस का ही होगा।
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क्या युवाओं का शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार खतरे में है?
उच्च अदालत की इस टिप्पणी के तुरंत बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, 'हमारे जंतर-मंतर से दूर रहिए! हमारी विरोध करने की जगह छीनने की कोशिश करने से पहले, हमें बताया जाए कि क्या आप इंडिया गेट को ऐसी जगह के तौर पर तय करेंगे जहां हम शांतिपूर्ण विरोध करने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें। आपने इंडिया गेट तो छीन ही लिया। हम अपना जंतर-मंतर भी छीने जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे!'
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सीजेपी और जंतर-मंतर से जुड़े सात बड़ी बातें
छात्र आंदोलन की अगुवाई: सीजेपी ने हाल ही में नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर विशाल छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: इस बड़े छात्र आंदोलन और भारी जनदबाव के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा था।
20 जुलाई का हिंसक लाठीचार्ज: 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठियां भांजी थीं और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
इंडिया गेट पर पाबंदी: दिल्ली पुलिस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इंडिया गेट पर प्रदर्शन पूरी तरह बैन है क्योंकि वह एक राष्ट्रीय स्मारक है।
पुलिस की पूर्व अनुमति आवश्यक: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहले से मंजूरी लेना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित: दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है।
केस वापस लेने की गारंटी नहीं: सीजेपी नेता सौरभ दास के अनुसार, सरकार ने बातचीत तो की है, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की कोई लिखित गारंटी अभी तक नहीं दी है।