CJI Gavai: 'धारा 370 हटाने का फैसला स्वीकार किया ताकि देश में एक संविधान रहे', नागपुर में बोले सीजेआई गवई
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने संविधान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान के केंद्रीकृत होने को लेकर बाबा साहब आंबेडकर की खूब आलोचना की गई थी। आज हम अपनी 75 साल की यात्रा में देख रहे हैं कि जब भी भारत ने किसी संकट का सामना किया है, तो देश एकजुट रहा है। यह संविधान से ही संभव हुआ है।
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उन्होंने कहा कि संविधान के केंद्रीकृत होने को लेकर बाबा साहब आंबेडकर की खूब आलोचना की गई थी। बाबा साहब ने उस आलोचना का जवाब देते हुए कहा था कि हम देश को सभी चुनौतियों के लिए उपयुक्त संविधान दे रहे हैं और मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि यह युद्ध और शांति के समय में देश को एकजुट रखेगा। आज हम अपनी 75 साल की यात्रा में देख रहे हैं कि हमारे आसपास क्या स्थिति है? जब भी भारत ने किसी संकट का सामना किया है, तो देश एकजुट रहा है। यह संविधान से ही संभव हुआ है।Nagpur | Chief Justice of India BR Gavai says, "... If the country wants to remain united, the country needs only one constitution. A separate constitution for a state was not in line with Babasaheb Ambedkar's ideology, so we unanimously accepted the decision (of abrogation of… pic.twitter.com/YBY7srfOua
— ANI (@ANI) June 28, 2025विज्ञापन
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इससे पहले मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि संविधान ने सरकार के तीन अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की सीमाएं तय की हैं। कानून बनाना विधायिका और राज्य विधानसभाओं की जिम्मेदारी है, जबकि कार्यपालिका संविधान और कानून के ढांचे के भीतर काम करती है। उन्होंने कहा कि संविधान और नागरिकों के अधिकारों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
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सीजेआई ने कहा कि अगर न्यायपालिका हर मामले में कार्यपालिका और विधायिका के क्षेत्रों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती है, तो मैं हमेशा कहता हूं हालांकि न्यायिक सक्रियता बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक दुस्साहस और न्यायिक आतंकवाद में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब कोई कानून संसद या राज्य विधानसभा के अधिकार से परे बनाया जाता है और यह सांविधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, तो न्यायपालिका के लिए हस्तक्षेप करना अनिवार्य है।
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