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DY Chandrachud: CJI बोले- हड़ताल से सिर्फ न्याय पाने वाले होते हैं परेशान; जमानत देने से डरने की वजह भी बताई

Sun, 20 Nov 2022 10:04 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 20 Nov 2022 10:04 AM IST
सार

डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा क्यों कि हम एक-दूसरे के खिलाफ हड़ताल करते हैं और जब वकील हड़ताल करते हैं तो इससे कौन प्रभावित होता है? इससे न्याय पाने वाला प्रभावित होता है न कि जज और वकील।

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CJI DY Chandrachud said Those who get justice are troubled by the strike not the judges and lawyers
CJI DY Chandrachud - फोटो : ANI

विस्तार

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भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि हमें वकीलों या नागरिकों से अदालतों तक पहुंचने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए इसके बजाय, अदालतों को उन तक पहुंचना चाहिए। साथ ही कहा कि उन्होंने वकीलों की बातों को हमेशा सुना है। अगर वकील हड़ताल करता है तो इससे न्याय पाने वाले परेशान होते है।

मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद डी वाई चंद्रचूड़ को सम्मानित करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने एक समारोह आयोजित किया था। इस दौरान डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जब वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे, तो वे हमेशा वकीलों को उनके पास आने और उनकी समस्याओं के बारे में बात करने के लिए कहते थे।

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जब वकील हड़ताल करते हैं तो इससे कौन प्रभावित होता है?
उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों कि हम एक-दूसरे के खिलाफ हड़ताल करते हैं और जब वकील हड़ताल करते हैं तो इससे कौन प्रभावित होता है? इससे न्याय पाने वाला प्रभावित होता है न कि जज और वकील। आगे उन्होंने कहा कि बहुत लंबे समय से हम अपने पेशे में युवा वकीलों को गुलाम श्रमिक मानते हैं। क्यों? क्योंकि हम इसी तरह बड़े हुए हैं। अब हम युवा वकीलों को यह नहीं बता सकते हैं कि हम ऐसे ही बड़े हुए हैं और यह बदलना चाहिए। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने आश्वासन दिया कि वह जो कुछ भी करेंगे वह न्याय की संस्था के संरक्षण के हित में होगा।
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जिला न्यायपालिका पर भरोसा करना सीखना होगा
50वें सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिला न्यायपालिका देश की न्यायिक प्रणाली के मामलों में उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में न्याय की तलाश करने वाले आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करेगी। साथ ही कहा कि एक स्वतंत्र बार न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ अटूट रूप से जुड़ा हुआ है और  इसके कारण न्यायाधीशों के रूप में हमारे पास खुद की रक्षा करने के लिए कोई मंच नहीं है।

उच्च न्यायपालिका में जमानत के मामलों की बाढ़ इसलिए आई हुई है 
मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में तकनीक इस्तेमाल, जिला स्तरीय न्यायपालिका, न्यायिक अवसंरचना, विधिक शिक्षा और न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं की स्थिति के बारे में अपने विचार रखे।

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक स्वतंत्र बार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जटिलता से जुड़ा है और इसकी वजह यह है कि जजों के रूप में हमारे पास निजी बचाव का कोई तरीका या मंच उपलब्ध नहीं है। सीजेआई ने कहा कि उच्च न्यायपालिका में जमानत के मामलों की बाढ़ इसलिए आई हुई है क्योंकि निचली अदालतों में जमानत देने को लेकर अनिच्छा रहती है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आखिर जज जमानत देने से क्यों हिचकते हैं? जमानत देने में किस बात का डर है? उन्होंने आगे कहा कि जमीनी स्तर पर न्यायाधीश निशाना बनाए जाने के डर से जमानत देने से हिचकते हैं।  जघन्य मामलों में जमानत देने के लिए निशाना बनाए जाने के डर की भावना के कारण जमीनी स्तर पर न्यायाधीश जमानत देने से हिचकते हैं।

बहुत सारी चीजें बातचीत से हल की जा सकती हैं
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बहुत सारी चीजें बातचीत से हल की जा सकती हैं और बार के सदस्यों के लिए यह महसूस करना महत्वपूर्ण है। यही वह शांति और सामाजिक स्थिरता है, जिसके बारे में मैं बात करता हूं। साथ ही कहा कि अगर कोलेजियम द्वारा लिए गए हर निर्णय के लिए बार-बार हड़तालें होंगी तो यह हमें कहां तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि वकीलों को ऐसा नहीं करना चाहिए।

राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में निर्णय लेता है कॉलेजियम 
सीजेआई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि कॉलेजियम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक निर्णय लेता है। उन्होंने कहा, बार के सदस्यों को यह समझना महत्वपूर्ण है कि जब हम प्रशासनिक क्षमता के बारे में निर्णय लेते हैं, तो हम चीजों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। दरअसल, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने 16 नवंबर को पहली कॉलेजियम बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक के बाद उन्होंने मद्रास, गुजरात और तेलंगाना उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश को स्थानांतरित करने का फैसला किया। इस फैसले के बाद वकीलों का विरोध शुरू हो गया और काम बहिष्कार कर दिया गया। इसके बाद शनिवार को सीजेआई ने कहा कि बातचीत से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।



रिजिजू ने वकीलों के प्रदर्शन से असहमति जताई
कानून मंत्री किरण रिजिजू ने हाईकोर्ट के कुछ न्यायाधीशों की स्थानांतरण संबंधी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के विरुद्ध कुछ वकील निकायों के प्रदर्शन से असहमति जताई। रिजिजू ने कहा कि यदि कॉलेजियम के हर फैसले के लिए हड़ताल आए दिन की परिघटना बन जाती है तो यह कहां जाएगी। इसका क्या असर होगा?

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