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भारतीय जांबाजों के सामने बौखलाने लगे हैं चीनी सैनिक, नए इलाकों में ड्रैगन को भारी पड़ रहा दुस्साहस
Wed, 16 Sep 2020 06:26 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 16 Sep 2020 06:26 PM IST
सार
अब चीनी फौज भारत से लगती सीमा के दूसरे हिस्सों में विवाद पैदा करने का प्रयास कर रही है। चीनी सैनिकों ने अरुणाचल के असाफिला एरिया, तूतिंग एक्सिस और फिश टेल में हलचल बढ़ा दी है...
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Sukhoi Su-30MKI in Ladakh
- फोटो : PTI
विस्तार
लद्दाख में पैंगोंग के आसपास वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) वाले इलाके में घुसपैठ की कोशिश नाकाम होने के बाद चीनी सेना बौखला गई है। भारतीय सेना के जांबाजों ने इस इलाके में न केवल चीनी सैनिकों की घुसपैठ को नाकाम किया, बल्कि उन्हें करारा जवाब देकर पीछे खदेड़ दिया है। नतीजा, अब चीनी फौज भारत से लगती सीमा के दूसरे हिस्सों में विवाद पैदा करने का प्रयास कर रही है। चीनी सैनिकों ने अरुणाचल के असाफिला एरिया, तूतिंग एक्सिस और फिश टेल में हलचल बढ़ा दी है।
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इसके अलावा सिक्किम और हिमाचल प्रदेश से लगती सीमा के कुछ भागों से भी विवाद की खबरें आ सकती हैं। घुसपैठ की संभावना को देखते हुए लद्दाख से लेकर अरुणाचल सेक्टर तक चीन के साथ लगती सीमा पर अतिरिक्त भारतीय सैन्य बलों की तैनाती की गई है। पैंगोंग में फायरिंग की घटना होने के बाद अब दूसरे इलाकों में चीनी सैनिकों के दुस्साहस का जवाब गोली से ही दिया जा रहा है।
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सैन्य सूत्रों के मुताबिक चीनी फौज अभी लद्दाख में पैंगोंग झील के आसपास जमी हुई है। हालांकि वह एलएसी के पार है। पिछले दिनों चीन के सैनिकों ने इस इलाके में घुसपैठ की बड़ी योजना बनाई थी। भारतीय सैनिकों ने फायरिंग कर चीनी फौज को काफी पीछे तक खदेड़ दिया था। मौजूदा हालत यह है कि चीन ने इस इलाके में हुई किरकिरी के बावजूद अपनी सेना का भारी जमावड़ा कर रखा है।
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दूसरी ओर, भारतीय सैनिक अब फ्री हैंड स्टाइल में जवाब दे रहे हैं। यानी चीनी सैनिक अगर हथियार लेकर आगे बढ़ते हैं तो हथियारों के बल पर ही उन्हें रोका जाता है। जिन इलाकों में चीनी फौज लोहे की नुकीली छड़ें लेकर आगे आती है तो उसी तरह भारतीय सैनिक भी रॉड लेकर उनसे भिड़ जाते हैं। गलवां घाटी की झड़प के बाद चीन बॉर्डर पर कई तरह के सैन्य बल तैनात किए गए हैं।
लेह में तैनात एक अधिकारी के अनुसार हम अपनी रणनीति का खुलासा नहीं कर सकते। इतना तय है कि गलवां जैसी घटना अब कभी नहीं होगी। वह एक धोखा था, इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि भारतीय सैनिकों की बहादुरी, चीनी फौज गलवां में भी अच्छे से देख चुकी थी।
तभी से भारतीय सेना हर तरह के हथियार एवं दूसरे उपकरणों से लैस है। हमारे जांबाजों की कड़ी जवाबी कार्रवाई का नतीजा है कि अब चीन की ओर से पत्थर नहीं बरसाए जा रहे। वे जानते हैं कि अब भारतीय सैनिक पत्थरों का जवाब कैसे देते हैं। इससे पहले एक नहीं, बल्कि दर्जनों ऐसे मौके आए हैं, जब चीनी फौज बिना किसी वजह के पत्थर फेंकती रही है।
पैंगोंग, गलवां और चुशुल जैसे इलाकों में अब भारतीय सैनिक मजबूत स्थिति में हैं। चीन की सोच है कि सर्दियों में एक साथ कई इलाकों में भारत को उकसाया जाए। अधिकारी के अनुसार, हालांकि सर्दियों में हमारे सैनिक चीन के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में हैं। उनके सैनिक तैनात रहते हैं, मगर शारीरिक दम की बात करें तो वे हमारे जवानों के सामने कहीं नहीं टिकते।
अब चीन का प्रयास है कि भारत के साथ लगती सीमा के विभिन्न इलाकों में घुसपैठ कर दुस्साहस किया जाए। सिक्किम, अरुणाचल, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में अब जिन सैनिकों की तैनाती हुई है, वे युद्ध की अलग अलग विद्याओं के जानकार हैं। अधिकारी का कहना है कि ये नहीं कहा जा सकता, फायरिंग कब और कहां होगी।
वर्तमान में भारतीय सैनिक जिस तरीके से चीन को करारा जवाब दे रहे हैं, वह उनके सैनिकों का उत्साह तोड़ने वाला है। हम जानते हैं कि चीन अब किन इलाकों में विवाद पैदा करेगा, लेकिन वह मुंह की खाएगा, यह तय है।