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जल्लीकट्टू: प्रदर्शनकारियों के हाथों में ओसामा की तस्वीरें, TN को अलग देश बनाने की मांग
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 27 Jan 2017 09:53 PM IST
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तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने आरोप लगाया है कि जो लोग जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वे असमाजिक और राष्ट्र- विरोधी तत्व हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथों में मारे जा चुके आतंकी ओसामा बिन लादेन की तस्वीरें और काले झंडे हैं। ये लोग तमिलनाडु को अलग देश बनाने की मांग कर रहे हैं। इन असमाजिक और शरारती लोगों के विरोध प्रदर्शन करने के पीछे कारण जल्लीकट्टू पर लगा प्रतिबंध हटाना नहीं, बल्कि मुद्दे को लेकर लोगों का ध्यान भटकाना है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगो के खिलाफ जल्द ही मुकदमा दर्ज कर सख्त कारवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस हफ्ते की शुरुआत में पुलिस ने मरिना बीच पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हजारों युवक-युवतियों पर आक्रमण किया था।
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उन्होंने कहा कि ऐसे लोगो के खिलाफ जल्द ही मुकदमा दर्ज कर सख्त कारवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस हफ्ते की शुरुआत में पुलिस ने मरिना बीच पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हजारों युवक-युवतियों पर आक्रमण किया था।
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31 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट करेगा जल्लीकट्टू मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू को हिंसक बताते हुए इस पर रोक लगा दी थी। इस रोक को हटाने के लिए तमिलनाडु में कई जगहों पर प्रदर्शन होने शुरू हो गए थे। कई जगहों से हिंसक प्रदर्शन की भी खबरें आईं थीं।
मामला इतना आगे बढ़ गया था कि राज्य के मुख्यमंत्री पनीर सेल्वम ने इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की अपील की थी। बाद में राज्य सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया था।
इसके बाद पोगंल के मौके पर यह प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। हालांकि इसमें भी कुछ लोगों की मौत हो गई थी। अध्यादेश बनने के बाद भी जल्लीकट्टू के समर्थन करने वालों के प्रदर्शन जारी रहे। इनका कहना है कि जब तक राज्य सरकार इसके लिए कैबिनेट से बिल पास नहीं कर लेती तब वह प्रदर्शन करते रहेंगे।
इसी प्रदर्शन करने पर राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन करने वालों पर कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें देशद्रोही कहा है।
मामला इतना आगे बढ़ गया था कि राज्य के मुख्यमंत्री पनीर सेल्वम ने इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की अपील की थी। बाद में राज्य सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया था।
इसके बाद पोगंल के मौके पर यह प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। हालांकि इसमें भी कुछ लोगों की मौत हो गई थी। अध्यादेश बनने के बाद भी जल्लीकट्टू के समर्थन करने वालों के प्रदर्शन जारी रहे। इनका कहना है कि जब तक राज्य सरकार इसके लिए कैबिनेट से बिल पास नहीं कर लेती तब वह प्रदर्शन करते रहेंगे।
इसी प्रदर्शन करने पर राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन करने वालों पर कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें देशद्रोही कहा है।