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शव दफनाने का विवाद: '15 दिनों से शव मोर्चरी में रखा है', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मामले को सौहार्दपूर्वक निपटाएं

Wed, 22 Jan 2025 03:26 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 22 Jan 2025 03:26 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बात पर नाराजगी जताई कि एक व्यक्ति को अपने पिता को दफनाने के लिए अदालत आना पड़ रहा है, ये बेहद दुखद है। कोर्ट ने ये भी कहा कि शव को याचिकाकर्ता की निजी जमीन पर दफनाया जा सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर भी आपत्ति जताई।

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chhattisgarh Village burial row supreme court says Body in morgue for 15 days amicably settle issue
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के एक गांव में शव दफनाने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि व्यक्ति का शव 15 दिनों से मोर्चरी में रखा है। मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए ताकि पादरी को सम्मानपूर्वक दफनाया जा सके। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने रमेश बघेल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रमेश बघेल ने अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बघेल की याचिका खारिज कर दी थी। 
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क्या है पूरा मामला
रमेश बघेल के पिता एक ईसाई पादरी थे। बीते दिनों उनका निधन हो गया। रमेश बघेल अपने पिता के शव को पैतृक गांव के कब्रिस्तान में दफनाना चाहता है, लेकिन गांव के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर ईसाई समुदाय के लोगों को दफनाने की व्यवस्था है तो शव को वहीं दफनाया जाना चाहिए। हालांकि रमेश बघेल का अपनी याचिका में कहना है कि गांव के कब्रिस्तान में सभी वर्गों के लिए जगह चिन्हित है, जिसमें एक जगह हिंदू आदिवासी, एक जगह ईसाई आदिवासियों के लिए तय है और उसके परिवार के कई लोगों को भी गांव के ही कब्रिस्तान में ईसाईयों के लिए चिन्हित जगह पर दफनाया गया है। हालांकि गांव के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बात पर नाराजगी जताई कि एक व्यक्ति को अपने पिता को दफनाने के लिए अदालत आना पड़ रहा है, ये बेहद दुखद है। कोर्ट ने ये भी कहा कि शव को याचिकाकर्ता की निजी जमीन पर दफनाया जा सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर भी आपत्ति जताई और कहा कि शव को तय जगह पर ही दफनाया जाना चाहिए। मेहता ने ये भी कहा कि अगर शव को गांव में ही दफनाया जाता है तो इससे विवाद बढ़ सकता है और कानून व्यवस्था खराब हो सकती है। बहरहाल पूरा मामला सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इतने दिनों से शव नहीं दफनाए जाने पर चिंता जाहिर की और दोनों पक्षों से सौहार्दपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 
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