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आज ही के दिन चांद की तरफ बढ़े थे भारत के कदम, ऐतिहासिक सफर पर निकला था चंद्रयान-2
Wed, 22 Jul 2020 01:18 PM IST
अमित कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 22 Jul 2020 01:18 PM IST
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चंद्रयान 2
- फोटो : ISRO
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22 जुलाई, 2019। दिन सोमवार। पिछले साल आज का दिन बेहद खास था। खासतौर से वैज्ञानिकों के लिए। भारत ने चांद की ओर अपने कदम बढ़ा दिए थे। इस सफर की शुरुआत साल 2019 में इसी दिन हुई थी। भारत का विक्रम लैंडर स्वदेशी शक्तिशाली रॉकेट पर सवार होकर चंदा मामा से मिलने के लिए ऐतिहासिक सफर पर रवाना हुआ था।
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भारत ने अपने दूसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-2’ का सोमवार को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था। ‘बाहुबली’ नाम के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी-मार्क ।।। एम 1 ने प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद यान को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया था। लैंडर ‘विक्रम’ को चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया था।
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इस वजह से नाम मिला था विक्रम
स्वदेशी तकनीक से निर्मित ‘चंद्रयान-2’ में कुल 13 पेलोड थे। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में। लैंडर ‘विक्रम’ का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया। वहीं 27 किलोग्राम वजनी ‘प्रज्ञान’ का मतलब संस्कृत में ‘बुद्धिमता’ से है।
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महज 16 मिनट में मिली सफलता
43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी मार्क ।।। एम-1 ने आसमान में छाए बादलों को चीरते हुए प्रक्षेपण के 16 मिनट 14 सेकंड बाद 3,850 किलोग्राम वजनी ‘चंद्रयान-2’ को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। सपना था कि ‘चंद्रयान-2’ के साथ रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। हालांकि यह सपना बाद में बहुत करीब पहुंचकर टूट गया। मगर यही वो दिन था जब पूरा देश खुशी की एक उम्मीद के साथ झूम उठा था।