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चंद्रयान-2: चांद पर ढला दिन, नासा के एलआरओ ने खींची विक्रम के लैंडिंग साइट की तस्वीरें
Fri, 20 Sep 2019 11:54 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 20 Sep 2019 11:54 AM IST
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नासा लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है
- फोटो : Social Media
चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के लैंडिग साइट की तस्वीरें नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने खींची हैं। नासा इन तस्वीरों को इसरो के साथ साझा करेगा जिससे लैंडर विक्रम के क्रैश लैंडिग से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं।
चांद पर आज से रात की शुरूआत हो जाएगी। इसके साथ ही लैंडर विक्रम से संपर्क की सभी उम्मीदें भी खत्म हो चुकी हैं। चांद पर दिन वाला समय पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। मतलब, 20-21 सितंबर को चांद पर रात हो जाएगी। वर्तमान में चंद्रमा पर शाम हो गई है। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का जीवनकाल भी 14 दिनों का ही है।
अंधेरे में डूबते ही दक्षिणी ध्रुव का तापमान (जहां विक्रम लैंडर उतरा था) तकरीबन -200 डिग्री फारेनहाइट पहुंच जाएगा। अंधेरा और तापमान बहुत कम हो जाने के बाद लैंडर विक्रम से दोबारा संपर्क करने की उम्मीदें भी धूमिल हो जाएंगी।
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हालांकि, नासा द्वारा ली गई तस्वीरें कितनी साफ आई हैं इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन तस्वीरों का विशेष फायदा इसरो को नहीं होने वाला क्योंकि लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने जब तस्वीरें लीं तब चांद की सतह पर पर्याप्त रोशनी नहीं थी।
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चांद पर आज से रात की शुरूआत हो जाएगी। इसके साथ ही लैंडर विक्रम से संपर्क की सभी उम्मीदें भी खत्म हो चुकी हैं। चांद पर दिन वाला समय पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। मतलब, 20-21 सितंबर को चांद पर रात हो जाएगी। वर्तमान में चंद्रमा पर शाम हो गई है। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का जीवनकाल भी 14 दिनों का ही है।
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अंधेरे में डूबते ही दक्षिणी ध्रुव का तापमान (जहां विक्रम लैंडर उतरा था) तकरीबन -200 डिग्री फारेनहाइट पहुंच जाएगा। अंधेरा और तापमान बहुत कम हो जाने के बाद लैंडर विक्रम से दोबारा संपर्क करने की उम्मीदें भी धूमिल हो जाएंगी।
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हालांकि, नासा द्वारा ली गई तस्वीरें कितनी साफ आई हैं इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन तस्वीरों का विशेष फायदा इसरो को नहीं होने वाला क्योंकि लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने जब तस्वीरें लीं तब चांद की सतह पर पर्याप्त रोशनी नहीं थी।